यूनिट को ध्यान में रखकर बनाई फिल्म
यूनुस ने कहा, "तो, उन्होंने मूल रूप से वह फिल्म केवल अपनी यूनिट के लिए बनाई थी।" उन्होंने आगे कहा कि फिल्म निर्माता ने उनसे कहा कि भले ही वह दो साल तक काम न करें, कोई बात नहीं लेकिन उनकी यूनिट के लोगों का क्या होगा? चूंकि कोई भी काम नहीं कर रहा था।
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कोरोना काल के दौरान की ये फिल्म
कोरोना काल के दौरान हर कोई केवल अपनी बचत खर्च कर रहा था इसलिए शेट्टी स्टूडियो-आधारित फिल्म बनाना चाहते थे ताकि यूनिट के परिवार और घर सुचारू रूप से चल सकें। यूनुस ने यह भी बताया कि उन्होंने जूनियर कलाकारों को काम पर रखा और सभी को समय पर भुगतान किया। उन्होंने कहा, "वह यह बात कभी किसी को नहीं बताएंगे, उन्होंने फिल्म को असफल मान लिया।"
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फिल्म सर्कस के लिए 500 लोगों को दिया वेतन
उन्होंने कहा, "वह यह बात कभी किसी को नहीं बताएंगे, उन्होंने फिल्म को असफल मान लिया।" यूनुस सजावल के अनुसार, रोहित सभी 500 लोगों को वेतन देते थे, जबकि 100 लोगों की सीमा के कारण वे रोटेशन में काम करते थे।