वर्ष 1995 में मुकुल आनंद के निर्देशन में आई फिल्म 'त्रिमूर्ति' में गागरिन ने अंतिम बार कैमरा ऑपरेटर का काम किया। इससे पहले वर्ष 1987 में आई एक उड़िया भाषा की फिल्म 'अन्याय साहिबी नहीं' में ही पहली बार गागरिन को सिनेमैटोग्राफी करने का मौका मिल गया था। लेकिन, उन्होंने सिनेमैटोग्राफर के रूप में अपना काम वर्ष 2001 में ज्योति स्वरूप (Jyoti Sarup) के निर्देशन में बनी कश्मीरी भाषा की फिल्म 'बब (Bub)' से जारी किया। इसके बाद से वह सिर्फ मुख्य सिनेमैटोग्राफर बन गए। यह सिलसिला काबू, टाडा, कुछ कहा आपने... जैसी फिल्मों के साथ चलता रहा। गागरिन ने अंतिम बार वर्ष 2018 में आई कॉमेडी फिल्म 'हसीना' में एक सिनेमैटोग्राफर की भूमिका निभाई थी। पिछले महीने की 15 तारीख को इस दुनिया से अलविदा लेने वाले गागरिन के भाई देबेन भी उड़िया फिल्मों के वीडियो संपादक थे।