फिल्म 'छावा' में कवि कलश का किरदार निभाकर अभिनेता विनीत कुमार सिंह इन दिनों सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसे मौके के बारे में खुलासा किया, जिसने शायद उनका करियर को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया होता। यह मौका था लक्ष्मण उतेकर की साल 2019 की हिट फिल्म 'लुका छुपी' में लीड रोल निभाने का। इस मौके को विनीत ने सिर्फ एक गलतफहमी के कारण गंवा दिया था।
विनीत ने किया खुलासा
विनीत ने डिजिटल कॉमेंट्री से बातचीत में साझा किया कि उन्हें फिल्म के लिए पहले संपर्क किया गया था, लेकिन अंत में यह भूमिका कार्तिक आर्यन को मिली। उन्होंने कहा कि एक छोटी सी गहलफहमी उनके लिए बड़ी समस्या बन गई। विनीत ने कहा कि उनके एक दोस्त ने एक स्क्रिप्ट लिखी थी जो लक्ष्मण उतेकर की फिल्म के लिए थी। शुरुआत में उन्हें यह स्क्रिप्ट एक औपचारिक पिच की तरह नहीं लगी, बल्कि उन्हें लगा कि उनका दोस्त इस स्क्रिप्ट पर अपनी प्रतिक्रिया मांग रहा है।
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गहलफहमी की वजह से हाथ से फिसली फिल्म
विनीत ने कहा, "मैंने थोड़ी देर से जवाब दिया और इससे निर्माताओं को यह लगा कि मुझे इसमें रुचि नहीं है। बाद में लक्ष्मण उतेकर से बात करते हुए मुझे एहसास हुआ कि यह भूमिका मुझे ही ऑफर की गई थी। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ, क्योंकि मैंने इसे सिर्फ एक फीडबैक के रूप में लिया था। यह मेरी बदकिस्मती थी। मेरे कई दोस्त लेखक हैं, जो अक्सर अपनी स्क्रिप्ट्स पर मुझसे फीडबैक लेते हैं।"
पहले इस नाम से बनने वाली थी फिल्म
विनीत ने इस बात को भी माना कि कभी-कभी करीबी रिश्ते ही गलतफहमियों का कारण बन जाते हैं। उन्होंने कहा, "यह फिल्म पहले 'मथुरा लाइव्स' के नाम से बनने वाली थी, लेकिन बाद में इसका नाम 'लुका छुपी' रखा गया। मुझे कार्तिक आर्यन की भूमिका ऑफर की गई थी।"
छावा की सफलता से खुश हैं विनीत
विनीत ने यह भी स्वीकार किया कि 'मुक्काबाज' जैसी बेहतरीन फिल्म देने के बाद भी उन्हें वो सफलता नहीं मिली जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने साझा किया कि कभी-कभी उन्हें किरदार चुनने के बजाय, सिर्फ अपनी जिंदगी गुजारने के लिए काम करना पड़ता था। लेकिन, अब 'छावा' में उनकी परफॉर्मेंस को लेकर मिली प्रतिक्रिया ने उन्हें नई उम्मीद दी है। विनीते ने सोशल मीडिया पर अपने फैंस के लिए एक दिल छूने वाला पोस्ट भी हाल ही में लिखा था। अभिनेता ने इसमें लिखा था, "छावा के बाद मुझे यकीन है कि जो लोग मेरी पहले की फिल्में देखकर मुझे पसंद करते हैं, वे अब मुझसे मिलकर यह सवाल नहीं करेंगे, ‘सर, अगर आपको बुरा न लगे तो… आपका नाम क्या है?’"