प्रख्यात लेखक चेतन भगत की एक और किताब लॉन्च हुई है। उसका नाम 'वन इंडियन गर्ल' है। लॉन्च के मौके पर उन्होंने कुछ खास बातें अमर उजाला से शेयर कीं।
-क्या कुछ है इस नई किताब में?
मेरी नई किताब वन इंडियन गर्ल लॉन्च हुई है। इसमें एक सफल लड़की की कहानी है। वह भी सफल भारतीय लड़की। अक्सर यहां जब एक भारतीय लड़की सफल हो जाती है तो उसे प्यार मिलने में कितनी मुश्किलें होती हैं, यह उस बारे में है।
-यह सवाल बार-बार उठता रहा है कि क्यों लेखक इस मोहपाश में बंधे रहते हैं कि उनके लिखे पर फिल्म बने ही? यह सिलसिला प्रेमचंद से लेकर आप तक चला आ रहा है?
मैं कोई प्रेमचंद तो नहीं हूं और मोहपाश तो बहुत बड़ा वर्ड हो गया। मैं कहानियों को कहानी मानता हूं। चाहे वह किताब में हो। फिल्म में हो। जहां कहानीकार की जरूरत होती है, मैं वहां चला जाता हूं। यह मेरे लिए मोहपाश नहीं है। मेरे लिए बुक लॉन्च भी उतनी ही अहम है, जितनी फिल्म। या यूं कहूं कि यह फिल्मों से भी ज्यादा जरूरी है। फिल्मों की भी मैं रिस्पेक्ट करता हूं। वह देश के कोने-कोने तक पहुंचती हैं। टीवी का माध्यम भी बहुत बड़ा है। मैं दोनों में शामिल होना चाहता हूं।
-यह सवाल आपसे बार-बार पूछा जाता रहा है कि आपने पहले इंजीनियरिंग की, फिर एमबीए किया। फाइनली आप लेखक बन गए। इससे यह तो हुआ ही कि आईआईटी और आईआईएम में आप को मिली सब्सिडी जाया हुई?
सब्सिडी जाया न हो, उसके लिए मैं क्या करता? बताइए।
-यही कि आप उसी प्रोफेशन से जुड़े रहते?
ऐसी कोई बात नहीं है। आप सोसायटी में कहीं रहते हुए समाज की बेहतरी में अपना योगदान दे सकते हैं। आप सोसायटी में कहीं भी रहें, उसका वैल्यू जीडीपी में जाता है। आप जितना कंट्रीब्यूट कर रहे हैं, उससे देश की जीडीपी में इजाफा हो रहा है तो ठीक है न। साथ ही जो टैक्स मैंने दिया है, वह बतौर इंजीनियर नहीं दे सकता था। आप यही सोच रहे हैं कि आईआईटी वाले को यही करना चाहिए तो मैं टैक्स की कैलकुलेशन बताता हूं। आईआईटी और आईआईएम में मुझे जितनी सब्सिडी मिली, मैंने उसका सौ गुना ज्यादा टैक्स दे दिया। तो मेरे ख्याल से मैंने सरकार से अपना हिसाब पूरा कर लिया।