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Chengiz Movie Review: ना थ्रिल दिखा ना रोमांच, हिंदी पट्टी में बांग्ला सुपरस्टार की पहली कोशिश नाकाम

Sun, 23 Apr 2023 10:41 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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चंगेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
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Movie Review
चंगेज
कलाकार
जीत , सुष्मिता चटर्जी , रोहित बोस रॉय , शताफ फिगर और अन्य
लेखक
नीरज पांडे और राजेश गांगुली
निर्देशक
राजेश गांगुली
निर्माता
जीत , गोपाल मदनानी और अमित जुमरानी
रिलीज
21 अप्रैल 2023
रेटिंग
1/5

भारतीय सिनेमा के इतिहास में बांग्ला फिल्मों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई बांग्ला फिल्मों ने भारत का गौरव बढ़ाया है लेकिन पिछले कुछ अर्से से ये फिल्में राष्ट्रीय स्तर ही अपनी पहचान खोती जा रही है। इसकी  मूल वजह है इन फिल्मों में अपनी संस्कृति को नजरअंदाज करना। जब दर्शक कोई क्षेत्रीय सिनेमा देखने जाता है तो उसके दिमाग में यह बात जरूर होता है कि फिल्मों के माध्यम से वहां के माहौल को भी देखे। लेकिन अब अधिकांश फिल्में ऐसी बन रही है कि पता ही नहीं चलता कि हिंदी सिनेमा देख रहे हैं या फिर किसी भी क्षेत्रीय भाषा की फिल्म। बांग्ला फिल्मों के सुपरस्टार जीत की फिल्म 'चंगेज' अपनी मूल भाषा के अलावा हिंदी में भी रिलीज हुई है। इस फिल्म के निर्माता भी जीत खुद ही हैं।

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चंगेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म 'चंगेज' की कहानी का ताना बाना कोलकाता के 1970 से लेकर 1990 के बीच अंडरवर्ल्ड पर बना गया है। एक दस साल के लड़के के सामने उसके ही इंस्पेक्टर पिता की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है, लेकिन पुलिस प्रशासन उसके पिता के हत्यारों को सजा नहीं दिला पाती। 10 का लड़का जब 16 साल का होता है तो वह अपने पिता के हत्यारे की हत्या करके कोलकाता का अंडरवर्ल्ड डॉन बन जाता है। धीरे- धीरे एक सीधा साधा लड़का अपने सभी दुश्मनों को खत्म करके कैसे चंगेज बन कर अपना एक अलग साम्राज्य बनाया है। यही इस फिल्म की कहानी है।

चंगेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इस तरह के विषय पर बहुत सारी फिल्में बन चुकी है कि एक बेटा अपने बाप के हत्यारे की हत्या करके डॉन बन जाता है। फिर सवाल यह उठता है कि इस तरह की बार- बार दोहराव वाली कहानियों में ऐसी क्या नई बात हो सकती है जिसे दर्शक देखना चाहेंगे ? तो सबसे पहले यह बात आती है कि फिल्म को किस तरह से प्रस्तुत किया जाए। फिल्म की कहानी 1970 के आस पास की है यानी आज से 53 साल पहले कोलकाता कैसा दिखता था, उस समय के पहनावे कैसे होते थे, इस बात ध्यान फिल्म के निर्देशक को रखना चाहिए था। सिर्फ उस दौर की गाड़ियों को फिल्म में दिखा कर उन्होंने फिल्म में कोलकाता को उस दौर को दिखाने की कोशिश की है।  

चंगेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म की कहानी निर्देशक राजेश गांगुली ने नीरज पांडे के साथ मिलकर लिखा है। पूरी फिल्म देखने के बाद ऐसा लगता है कि फिल्म की पटकथा उन्होंने फिल्म के नायक जीत को ही ध्यान में रखकर लिखी है। शायद फिल्म बनाने से पहले ही ये तय कर लिया गया कि इस फिल्म को बांग्ला के साथ साथ हिंदी में रिलीज किया जाना चाहिए। हिंदी सिनेमा में जीत को लांच करने के लिए उन्होंने फिल्म की पूरी पटकथा जीत के इर्द गिर्द ही लिखी है। आसान भाषा में अगर यह समझे तो यह जीत के लिए हिंदी सिनेमा में एक शो रील की तरह है और उन्हें एक एक्शन हीरो के तौर पर पेश करने के चक्कर में बाकी पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया। कहने को तो यह एक दमदार क्राइम थ्रिलर और रोमांचक होने के साथ साथ एक्शन फिल्म है, लेकिन यह फिल्म ना तो थ्रिल पैदा करती है और ना ही रोमांच।

चंगेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अभिनेता जीत बांग्ला फिल्मों के सुपरस्टार स्टार हैं, 11 साल के अभिनय करियर में उनकी आठ फिल्में ईद पर रिलीज हुईं और सभी फिल्में हिट रही हैं। इसी सोच के तहत फिल्म 'चंगेज' को भी ईद पर ही रिलीज किया गया। पूरी फिल्म देखने के बाद उनके परफॉर्मेंस में ऐसी कोई बात नहीं नजर आई जिससे वह दर्शकों को प्रभावित कर सके। इसकी एक वजह यह हो सकती है, हिंदी में उनके डब किए गए संवाद। जब वह डायलॉग बोलते हैं, तो फिल्म के दृश्य के मुताबिक डायलॉग फिट नहीं बैठते। रोहित बोस रॉय ने फिल्म में पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया है लेकिन फिल्म में 60 साल के बाद जब उनके रिटायरमेंट के सीन आते हैं तो उसमे 60 साल वाले इंसान की फीलिंग नहीं आती है, सिर्फ उनके बाल सफेद कर दिए गए है और डायलॉग बोलने का उनका वहीं अंदाज है जब वो पुलिस विभाग में थे। फिल्म की नायिका सुष्मिता चटर्जी, शताफ फिगर और बाकी कलाकारों का अभिनय सामान्य रहा।
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चंगेज - फोटो : सोशल मीडिया
पूरी फिल्म दो घंटे 30 मिनट की है। कम से कम इस फिल्म को 30 मिनट और कम करने की जरूरत थी। इस मामले में फिल्म के एडिटर मलय लहा की चूक दिखती है। ऐसी फिल्मों में फिल्म के सिनेमैटोग्राफर के कंधे पर बहुत ही चैलेंज होता है। उनकी जिम्मेदारी भी होती है कि फिल्म के दृश्यों को खूबसूरती  से पेश करें लेकिन फिल्म सिनेमैटोग्राफर के  मानस गांगुली इसमें नाकामयाब रहे। फिल्म में तीन गाने और दो संगीतकार कौशिक गुड्डू और अनीक धर हैं, जिन्होंने मीका सिंह, अरिजीत सिंह और दिव्य कुमार जैसे गायकों से गीत गवाए हैं। फिल्म में ऐसा कोई गीत नहीं जो फिल्म देखने के बाद याद रहे। फिल्म के बैक ग्राउंड म्यूजिक में सिर्फ शोर सुनाई देता है।
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