फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदलते दौर में बदल गए प्रमोशन के तरीके, कुछ दिखे तीखे-कुछ पड़े फीके

Sat, 03 Aug 2019 12:12 PM IST
Avinash Pal अविनाश सिंह पाल, अमर उजाला
विज्ञापन
बॉलीवुड और प्रमोशन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

बॉलीवुड के बदलते दौर में प्रमोशन के तरीके भी हाइटेक हो रहे हैं। फिल्मों के प्रमोशन से शुरू हुआ सिलसिला अब टीवी सीरियल, रियालिटी शोज, वेब सीरीज तक भी पहुंच गया है। प्रमोशन के लिए मेकर्स नए-नए ढंग इजाद कर रहे हैं। रिलीज के पहले ही उसके पोस्टर्स, टीजर, ट्रेलर, गाने रिलीज होने शुरू हो जाते हैं। सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया जाता है। फिल्म के सेट से जुड़े मजेदार फोटोज, वीडियोज और किस्से भी सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हो जाते हैं। यही नहीं इसके साथ ही सेलेब्स भी ऑडियंस के बीच पहुंच जाते हैं और फिल्मों को जमकर प्रमोट करते हैं। दरअसल आज के वक्त में जैसे फिल्मों का प्रमोशन होता है वैसा शुरू से नहीं था। पहले के वक्त में कैसे होता था फिल्मों का प्रमोशन ? कई सवालों के जवाबों के साथ ही इस पैकेज में आपको बताएंगे कि आखिर क्या होता है प्रमोशन और इसकी जरूरत क्यों? 

विज्ञापन
Trending Videos

क्या होता है प्रमोशन और क्यों है इसकी जरूरत?

parmanu promotion - फोटो : अमर उजाला
दरअसल प्रमोशन का अर्थ है किसी भी चीज को प्रमोट करना। फिल्म प्रमोशन का अर्थ होता है उनका प्रचार प्रसार करना। अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों जरूरी है प्रमोशन? जवाब सीधा है- दर्शकों को सिनेमाघर की सीट तक खींच लाने के लिए जरूरी है प्रमोशन। दरअसल प्रमोशन इस बात के लिए कई हद तक जिम्मेदार होता है कि कितने दर्शक उस फिल्म को देखने जाएंगे। वहीं दर्शकों की भीड़ से ही फिल्म के हिट और फ्लॉप होने की कवायद शुरू होती है। तो ऐसे में आज के वक्त में जितनी अच्छी स्क्रिप्ट, एक्टिंग और डायरेक्शन की जरूरत होती है, उतनी ही जरूरत होती है फिल्म के प्रमोशन की। अच्छी स्क्रिप्ट, एक्टिंग और डायरेक्शन जैसी तमाम चीजें तब ही फायदेमंद हैं जब फिल्म देखने के लिए दर्शक पहुंचे। 

पहले कैसे होते थे फिल्म प्रमोशन

हॉलीवुड से कॉपीड हैं ये बॉलीवुड पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
जैसे आज फिल्मों के प्रमोशन होते हैं शुरुआत में वैसा नहीं था। पहले प्रमोशन काफी सामान्य तरीके से होते थे। फिल्म रिलीज होने के कुछ हफ्ते पहले से ही शहरों में दीवार पर पोस्टर नजर आने लगते थे। तब कोई नहीं पूछता और जानता था कि फिल्म का कलेक्शन कैसा रहा? सभी यही देखते थे कि फिल्म कितने दिन या हफ्ते चली। वहीं जब कोई फिल्म लंबे वक्त तक सिनेमाघर पर टिकी रहती थी तो फिर उसकी सफलता के पोस्टर लगते थे। जैसे 100 दिनों के सफल प्रदर्शन के पोस्टर लगाए जाते थे। हो सकता है आप में से कई लोगों ने देखा और कई लोगों ने न देखा हो लेकिन करीब 15-20 साल पहले रिक्शा-ऑटो रिक्शा को चारों तरफ से फिल्म के कपड़े अथवा कागज के पोस्टर से ढक कर फिल्म का प्रचार किया जाता है। उसमें एक ऊंची ध्वनि वाला स्पीकर लगाते थे और गाने बजाते थे, बीच-बीच में फिल्म के बारे में थोड़ी-बहुत बातें भी बताते थे।हालांकि कई छोटे शहरों में आज भी ये देखने को मिल सकता है।

कैसे बदला है प्रमोशन

kabir singh poster and shilpa shetty - फोटो : social media
बदलते वक्त में सिनेमा के साथ ही साथ प्रमोशन का अंदाज भी बदल गया है। अब फिल्म आने के दो-दो साल पहले से ही माहौल तैयार किया जाने लगता है। प्रमोशन में अब सारा जोर जानकारी से अधिक जिज्ञासा पर रहता है। माना जाता है कि दर्शकों की क्यूरोसिटी बढ़ेगी तो वे सिनेमाघरों में आएंगे और क्यूरोसिटी बढ़ाने के लिए कतई जरूरी नहीं है कि सिर्फ फिल्म की बात की जाए। फिल्म के प्रमोशन के लिए सेलेब्स अलग- अलग जगहों पर जाते हैं। कभी धार्मिक स्थानों में मत्था टेकते हैं तो कभी फिल्म के गानों पर ही नाच गाना होता है। यानी जो भी हो बात सिर्फ इतनी रहती हैं कि जनता को फिल्म के बारे में पता लगना चाहिए और क्यूरोसिटी भी बढ़ती रहनी चाहिए।

हाईटेक हो गया है प्रमोशन

'की एंड का' का पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
बदलते वक्त के साथ प्रमोशन के तौर तरीके भी बदले हैं और अब फिल्मों का प्रमोशन काफी हाईटेक माने जाने लगे हैं। पुराने वक्त की तरह दीवारों पर फिल्मों के कई सारे पोस्टर्स का भी चलन धीरे- धीरे बाहर हो गया है और अब उनकी जगह ले ली है सड़कों के किनारे लगे एलईडी स्क्रीन्स ने। जहां पोस्टर में एक ही बात हमेशा लिखी दिखाई देती थी। तो वहीं अब एलईडी के वीडियोज को आसानी से बदला जा सकता है और दर्शकों को नया देखने को मिलता है। कभी उस एलईडी पर फिल्म ट्रेलर देख सकते हैं तो कभी कोई गाना। वहीं कभी-कभी सेलेब्स के प्रमोशनल वीडियो भी आपको देखने को मिल जाएंगे। वैसे ये तो साफ है कि एक फोटो से ज्यादा अट्रैक्टिव एक वीडियो माना जाता है।

टीवी और रियालिटी शोज में फिल्मों का प्रमोशन

द कपिल शर्मा शो - फोटो : सोशल मीडिया
धीरे-धीरे प्रमोशन का एक और स्तर विकसित हो रहा है। वो है अपकमिंग फिल्म की स्टारकास्ट का टीवी सीरियल्स और रियालिटी शोज में आना और अपनी फिल्म प्रमोट करना। बिग बॉस में तो हर सप्ताह कोई न कोई सेलिब्रेटी जाता था और कंटेस्टेंट से टास्क करवाता। कपिल शर्मा का कॉमेडी शो तो इन्हीं सेलिब्रेटीज के दम पर चल रहा है जो प्रमोशन के लिए उनके शो पर पहुंचते हैं। तकरीबन हर सिगिंग शोज में हर सप्ताह सेलिब्रेटी अपनी अपकमिंग फिल्मों के प्रमोशन के लिए पहुंचते हैं। न सिर्फ फिल्म के गानों पर नाच- गाना होता है बल्कि कई बार शूटिंग और फिल्म से जुड़े किस्से भी रिवील किए जाते हैं। टीवी सीरियल्स में भी स्पेशल एपिसोड बनाकर इन सेलिब्रेटीज की एंट्री करवाई जाती है, ताकि वे उस सीरियल की टीआरपी का फायदा लेने के लिए अपनी अपकमिंग फिल्म को प्रमोट कर सके। टीवी शोज में जानें से फिल्म की जानकारी उन लोगों तक भी पहुंच जाती है जो अपने पसंदीदा टीवी शोज देखना नहीं भूलते हैं।

सोशल मीडिया और प्रमोशन

kartik aaryan - फोटो : social media
सोशल मीडिया के बिना फिल्म प्रमोशन अधूरा है। खुद सेलेब्स से लेकर फिल्म के प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और फिल्म से जुड़े बाकी लोग शूट के साथ ही फिल्म से जुड़ी बातें पोस्ट करना शुरू कर देते हैं। ऐसे में सबसे पहले जहां फिल्म का पोस्टर सामने आता है तो फिर शूटिंग सेट से फोटोज लीक होने लगते हैं। वहीं सेलेब्स के अफेयर की भी चर्चाएं जोर पकड़ने लगती हैं और उनके फोटोज और वीडियोज वायरल होने लगते हैं। अब इन खबरों में कितनी सच्चाई होती ये तो कोई नहीं जानता लेकिन हां फिल्म का प्रमोशन जरूर तेजी से होता है। उदाहरण के तौर पर बात करते हैं इम्तियाज अली की फिल्म की। फिल्म 'लव आजकल' के सीक्वल के शूट के साथ ही फिल्म के शूटिंग सेट के फोटोज सामने आने लगे। वहीं सारा अली खान और कार्तिक आर्यन के अफेयर की खबरें भी तेजी पकड़ने लगीं। वैसे ये पहली बार नहीं है जब साथ में शूट करते हुए दो सेलेब्स के नाम आपस में जुड़े हों। ये लिस्ट भी काफी लंबी है।

प्रमोशन में होता है बड़ा खर्चा

फिल्म प्रमोशन के दौरान सलमान खान - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्मों का प्रचार फिल्म निर्माण का आज सबसे अहम हिस्सा है। बकायदा अभिनेताओं से फिल्म साइन कराते वक्त ही अनुबंध कर लिया जाता है। यानी कि फिल्म में अभिनय करने के साथ अभिनेता को उसके प्रचार के भी दिन-तारीख, पैसे तय करने होते हैं। फिल्म के निर्माण के साथ ही साथ फिल्म के प्रमोशन पर कैसे और कितना खर्च होगा इसका भी हिसाब तय कर लिया जाता है। चलिए इसको कुछ फिल्मों के उदाहरण से समझते हैं। बाजीराव मस्तानी के निर्माण में निर्माता कंपनी की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार फिल्म में कुल 100 करोड़ रुपये के खर्च आए। लेकिन इसके बाद 20 करोड़ रुपये फिल्म के प्रचार/विज्ञापन पर खर्च करने पड़े। वहीं शाहरुख खान की 'दिलवाले' को बनाने में 85 करोड़ रुपये का खर्च आया। इसके बाद करीब एक चौथाई से भी ज्यादा रुपये यानी 25 करोड़ रुपये सिर्फ प्रमोशन पर खर्च कर दिए गए। इसी तरह सलमान की  'प्रेम रतन धन पायो' को बनाने में 80 करोड़ खर्च किए गए थे। लेकिन इसके प्रचार में सूरज बड़जात्या टीम ने 30 करोड़ खर्च कर डाले। आपको जानकर हैरानी होगी कि जहां 'प्रेम रतन धन पायो' के प्रचार का बजट 30 करोड़ था; वहीं 'हेट स्टोरी 3' का कुल बजट महज 24 करोड़ था। लेकिन उसको बनाने में भी महज 17 करोड़ खर्च किए गए थे, बाकी के सात करोड़ प्रचार पर। ऐसे में ये तो साफ है कि कई फिल्मों के सिर्फ प्रमोशन पर जितना पैसा खर्च किया गया है उतने में तो छोटे बजट की पूरी फिल्म बन सकती है।
विज्ञापन

प्रमोशन के अपवाद

thugs of hindostan
फिल्मों के प्रमोशन पर एक बड़ा पैसा खर्च किया जाता है। लेकिन बावजूद इसके कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन नहीं कर पाती हैं। हालांकि फिल्म के सफल और असफल होने की कई वजहें होती हैं। लेकिन एक बात तो साफ है कि प्रमोशन फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं है।

इस लिस्ट में बड़े स्टार्स और बड़े बजट की फिल्में भी शामिल हैं जिनके प्रमोशन पर जमकर खर्चा किया गया लेकिन फिल्म बड़े पर्दे पर सफल नहीं हो पाई। जीरो, हीरो, रेस 3, कलंक, ट्यूबलाइट, ठग्स ऑफ हिंदोस्तान सहित कई ऐसी फिल्में हैं जिनका जमकर प्रमोशन किया गया लेकिन बावजूद इसके फिल्म कुछ खास नहीं कर पाई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें