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जब 'तलाक' पर आई थी ये फिल्म, भारत ही नहीं पाक के लोग भी भड़क उठे थे

Fri, 19 May 2017 03:23 PM IST
बीबीसी हिंदी
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'निकाह' फिल्म
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जब निकाह औरत की मर्जी के बगैर नहीं हो सकता तो तलाक कैसे हो सकता हैं? यही वो सवाल था जिसने तीन तलाक जैसे मुद्दे पर भारत की सबसे सुपरहिट फिल्म 'निकाह' की कहानी लिखने के लिए लेखिका अचला नागर को मजबूर कर दिया था।
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करीब 35 साल पहले बनी इस फिल्म को लेकर तब भी उतने ही विवाद उठे थे जितने आज इस मुद्दे को लेकर उठ रहे हैं। इसी फिल्म से पाकिस्तानी अदाकारा सलमा आगा ने बॉलिवुड में अपने करियर की शुरूआत की थी। राज बब्बर हीरो थे और दीपक पाराशर सह कलाकार थे। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे तीन तलाक एक औरत की जिंदगी में तूफान ले आता है। मजबूत स्टारकास्ट ना होने के बावजूद फिल्म सुपर डुपर हिट रही थी।

1982 में बीआर चोपड़ा के निर्देशन में फिल्म निकाह का नाम पहले तलाक...तलाक...तलाक रखा गया था। लेकिन तलाक नाम से पहले ही किसी निर्माता ने अपनी फिल्म के लिए रजिस्टर करवा रखा था।
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'निकाह' फिल्म
फिल्म की लेखिका अचला नागर बताती हैं कि कैसे चरित्र अभिनेता इफ्तिखार ने भी इस पर चुटकी ली थी, अचला ने बताया, 'वो बोले कि अच्छा हुआ चोपड़ा साब आपने फिल्म का नाम तलाक...तलाक...तलाक नहीं रखा नहीं तो हम बीवी से कहते चलो तलाक...तलाक...तलाक. देखने चलते हैं तो हमारा तो फिल्म देखने से पहले ही तलाक हो जाता।'

अचला ने बताया कि फिल्म किसी मजहब को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई थी बल्कि उसका मकसद ये बताना था कि औरत को भी इंसान समझा जाए लेकिन फिर भी विवाद उठ ही गए। अचला ने बताया कि 'फिल्म रिलीज होने के चौथे दिन ही किसी ने मुस्लिम बहुल इलाके भिंडी बाजार में पोस्टर लगा दिए कि इस फिल्म में मजहब के खिलाफ बातें की गई हैं। फतवे जारी कर दिए गए थे। तब रातोंरात विरोध करने वाले मौलवियों को बुलाकर फिल्म दिखाई गई थी।'

फिल्म समीक्षक और वरिष्ठ पत्रकार जिया-उस-सलाम कहते हैं कि, 'भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी फिल्म को लेकर प्रदर्शन हुए थे। कई जगहों पर इसकी रिलीज पर रोक लगा दी गई थी। कुछ मौलानाओं का कहना था कि इसमें तलाक तो दिखाया लेकिन हलाला के बारे में नहीं बताया गया।'
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'निकाह' फिल्म
अचला नागर का कहना है कि फिल्म रिलीज होने के बाद भारत ही नहीं पाकिस्तान की कई महिलाओं ने उनसे इस कहानी को लिखने के लिए शुक्रिया कहा था। अचला ने बताया कि नासिक के पास धुले में उनसे मिलने कई मुस्लिम महिलाएं पहुंची थीं। एक मुस्लिम महिला ने बताया कि उनके प्रोफेसर पति ने उन्हें महज इसलिए तीन बार तलाक बोलकर रिश्ता तोड़ दिया था क्योंकि वो समय पर खाना नहीं दे पाई थीं। तो दूसरी को उनके शौहर ने फोन पर तलाक दे दिया था। वो 'निकाह' देखने के बाद अपना दर्द उस फिल्म में देख पा रही थीं।

तीन तलाक को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रही सुप्रीम कोर्ट की वकील फराह फैज के मामा उमर खैय्याम सहारनपुरी ने बीआर चोपड़ा की फिल्म निकाह के लिए धार्मिक मामलों के सलाहकार के तौर पर काम किया था। फरहा ने जनवरी 2016 में तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर की थी।

फरहा बताती हैं कि, 'उस वक्त मैं 8 साल की थी। तब फिल्म पर करीब 20 केस हुए थे। 15-20 दारुलइफ्ताओं के दिए फतवे तो मेरे मामू खुद इकट्ठे करके लाए थे। हमारे घर में तभी से इस मुद्दे पर चर्चा होती है। मैं आज इस मुद्दे को खिलाफ खड़ी हूं तो इसकी वजह वही लोग हैं जिनसे लड़ते हुए मैंने अपने मामू को देखा।'

वैसे तो अमिताभ बच्चन की सौदागर जैसी कुछ और फिल्मों में भी तीन तलाक दिखाए गए हैं लेकिन संवेदनशील मुद्दे के तौर पर इसे 'निकाह' फिल्म में ही उठाया गया।
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