देश में ऐसी मान्यता है कि फिल्म जगत में अपना करियर स्थापित करना आसान नहीं है। हालांकि जब कोई कलाकार तमाम मुश्किलों को दूर करते हुए एक बार इस इंडस्ट्री में कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंच जाता है तो यहां उसके लिए दूसरे मौके भी खुल जाते हैं। हाल में ऐसा ही कुछ अभिनेत्री राधिका आप्टे के साथ भी देखने को मिला। साल 2005 में फिल्म 'वाह लाइफ हो तो ऐसी' से हिंदी फिल्म जगत में कदम रखने वाली 34 वर्षीय अभिनेत्री ने अब निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने के लिए कमर कस ली है।
शॉर्ट फिल्म का किया निर्देशन
राधिका आप्टे ने 'स्लीपवॉकर्स' नाम की एक शॉर्ट फिल्म का निर्देशन किया है। इस फिल्म की अवधि 30 मिनट है। हाल में इस फिल्म की शूटिंग खत्म हुई है। इस फिल्म को हनी त्रेहान, अभिषेक चौबे और ललित प्रेम शर्मा प्रोड्यूस कर रहे हैं। वहीं गुलशन देवैया और शहाना गोस्वामी मुख्य किरदार में हैं। वैसे तो राधिका अपने करियर में बतौर एक्ट्रेस कई शॉर्ट फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हैं जिनमें आशीष अविकुन्तक की फिल्म दरमियान, अनुराग कश्यप की फिल्म इव टीजिंग, देट डे आफ्टर एवरीडे और सुजॉय घोष की बंगाली फिल्म अहल्या शामिल है। अब राधिका नए अवतार में एक और शॉर्ट फिल्म का हिस्सा बनने जा रही हैं।
अहम सवालों पर आधारित फिल्म
'स्लीपवॉकर्स' के बारे में बात करते हुए राधिका ने कहा, 'यह सब अचानक हुआ। मैं शॉर्ट फिल्म लिखने की कोशिश कर ही रही थी कि ललित, हनी और अभिषेक ने इसे प्रोड्यूस करने की रजामंदी दे दी। अपने पहले निर्देशन के दौरान मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है।' वहीं फिल्म के बारे में बात करते हुए हनी त्रेहान ने कहा, राधिका ने अपनी काबिलियित को समय के साथ साबित किया है। हम कहानी पेश करने के अनोखे तरीके को फिल्माने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। वहीं प्रोड्यूसर ललित शर्मा ने कहा, हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन मुद्दों को उठाए जिनकी वजह से हमें बड़े स्तर पर नुकसान का शिकार होना पड़ता है। स्लीपवॉकर्स ऐसे ही कुछ अहम सवालों पर आधारित है।
इन अभिनेत्रियों ने भी किया निर्देशन
राधिका आप्टे से पहले भी कई अभिनेत्रियों ने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा और नाम कमाया। इन अभिनेत्रियों में बीते जमाने से लेकर नए जमाने की ढेरों अभिनेत्रियां शुमार हैं। जिनमें नंदिता दास, पूजा भट्ट, अपर्णा सेन, रेवथी, हेमा मालिनी और कोंकणा सेन मुख्य हैं। वहीं हाल में फिल्म मणिकर्णिका से कंगना रनौत और फिल्म रोम रोम से तनिष्ठा चटर्जी ने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा है। वहीं अभिनेत्री, निर्देशक और पटकथा लेखक फातिमा बेगम को भारतीय सिनेमा की पहली महिला फिल्म निर्देशक माना जाता है। उन्होंने पहली बार1926 में फिल्म बुलबुल-ए-परिस्तान का निर्देशन किया था।