राज कुमार, बिस्वजीत चटर्जी
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अपनी जिंदगी निजी रखते थे राजकुमार
एएनआई के साथ बातचीत में बिस्वजीत ने राज कुमार के साथ काम करने के दिनों को याद किया और ऑफ-स्क्रीन उनकी पर्सनैलिटी के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि राज कुमार अपनी निजी जिंदगी को निजी ही रखना पसंद करते थे। उनका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत तेज था। दोनों कलाकार ने 1967 की मल्टी-स्टारर सोशल ड्रामा फिल्म 'नई रोशनी' में साथ में काम किया था। इसमें अशोक कुमार, माला सिन्हा और तनुजा भी शामिल थे।
राज कुमार, बिस्वजीत चटर्जी
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बिस्वजीत को किस नाम से बुलाते थे राज कुमार?
राज कुमार के साथ अपने रिश्ते को याद करते हुए बिस्वजीत ने कहा कि वह उन्हें बहुत पसंद करते थे। वह अक्सर उन्हें 'जानी' कहकर बुलाते थे। यह अंदाज राज कुमार की पर्सनैलिटी का हिस्सा बन गया था। बिस्वजीत ने कहा, 'मैंने राज कुमार के साथ कई फिल्में की हैं। वह मुझे बहुत पसंद करते थे। मैंने 'वासना' और 'नई रोशनी' जैसी फिल्में कीं। वह मुझे 'जानी' कहकर बुलाते थे। यह उनका अंदाज था। वह बॉम्बे पुलिस में थे। उनके साथ मेरा बहुत खास रिश्ता है।'
मजा लेते थे राज कुमार
राज कुमार की हाजिर-जवाबी पर्सनैलिटी की एक झलक दिखाते हुए, बिस्वजीत ने एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने याद करते हुए कहा, 'वह हल्के-फुल्के मजाक करते थे। कभी-कभी किसी को बुरा भी लग जाता था। वह मजा लेते थे। एक बार एक निर्माता आया तो उन्होंने (राज कुमार) कहा, 'आपने जो यह कपड़ा पहना है, वह बहुत खूबसूरत है, अच्छा है, चमक रहा है, सुंदर है, मुझे पसंद है', तो पूछा कि कहां से लिया। मैंने भी यह लिया था, हमने तो इसका पर्दा बना लिया'।' राज कुमार के बारे में बात करते हुए बिस्वजीत ने कहा, 'उनका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा था। वह कभी-कभी व्यंग्य भी करते थे।'
धर्मेंद्र, राज कुमार
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कार्यक्रम में राज कुमार के आने से सब हैरान थे
बिस्वजीत ने एक ऐसे मौके को भी याद किया जब राज कुमार उनकी तरफ से फंड इकट्ठा करने के लिए आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि अभिनेता के अचानक आने से वह और दर्शक दोनों ही हैरान रह गए थे। उन्होंने कहा, 'मैंने एक कार्यक्रम आयोजित किया था। काली मंदिर के लिए फंड इकट्ठा करने के मकसद से किशोर कुमार के दो शो हुए थे। उस दिन मैं राज कुमार के साथ शूटिंग कर रहा था। मैंने निर्माता से कहा, 'आज मेरा एक शो है, इसलिए मुझे लंच टाइम में जाना होगा।' राज कुमार ने पूछा, 'इतनी जल्दी क्या है? कहां जा रहे हो?' मैंने उनसे कहा, 'मेरा एक शो है।' मैंने उन्हें बताया कि मैं फंड इकट्ठा करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा हूं। उन्होंने कहा, 'मुझे भी बुला लेते जानी। मैं आऊंगा'।'
बिस्वजीत ने आगे कहा, 'मुझे लगा कि वे मजाक कर रहे हैं। शो चल रहा था तभी अचानक किसी ने आकर मुझे बताया, 'राज साहब आपसे मिलने आए हैं।' मैं बाहर गया और देखा कि वे कार में बैठे हैं। उन्होंने कहा, 'जानी, मैंने कहा था न कि मैं आऊंगा। मैं आ गया हूं।' मुझे यकीन ही नहीं हुआ।' उन्होंने कहा, 'वह बंगाली दर्शकों से मिलकर खुश थे। बंगाली दर्शकों को पता नहीं था कि वह आएंगे और वह राज कुमार को देखकर बहुत उत्साहित थे।'
राज कुमार, दिलीप कुमार
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उस वक्त किस तरह की प्रतिस्पर्धा थी?
बिस्वजीत चटर्जी ने कलाकारों के बीच मौजूद कॉम्पिटिशन की भावना के बारे में बात की और कहा कि कलाकार एक-दूसरे के काम की तारीफ भी करते थे और साथ ही एक-दूसरे से बेहतर करने की कोशिश भी करते थे। उन्होंने याद करते हुए कहा, 'कॉम्पिटिशन तो था। मगर बहुत हेल्दी कॉम्पिटिशन। हम कहते थे, 'तुम अच्छी एक्टिंग कर रहे हो लेकिन मैं तुमसे बेहतर परफॉर्म करूंगा।''
जितेंद्र, धर्मेंद्र और विनोद खन्ना के साथ किया मेकअप
इस अनुभवी कलाकार ने फिल्मिस्तान स्टूडियो में शूटिंग के दिनों का एक दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया। उन्हें वह समय याद आया जब उन्हें दिग्गज स्टार्स जितेंद्र, धर्मेंद्र और विनोद खन्ना के साथ एक ही मेकअप रूम शेयर करना पड़ा था। उन्होंने कहा, 'एक बार हम फिल्मिस्तान गए और मेकअप रूम सभी हीरोइनों ने ले रखे थे। इसलिए प्रोडक्शन कंट्रोलर ने आकर कहा, 'आज कोई मेकअप रूम नहीं है'। जीतू (जितेंद्र) हॉल में नीचे मेकअप कर रहे थे, जो एक लंबी और बड़ी जगह थी। जीतू ने मुझे वहां बुलाया, 'बिश्वा जी, यहां आकर बैठिए। हम बात करेंगे।'' बिस्वजीत ने आगे कहा, 'कुछ देर बाद धर्मेंद्र भी आ गए। मैंने सुना कि वह किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। कोई मेकअप रूम नहीं था। बाद में विनोद खन्ना भी आ गए। तो, हम चारों हीरो उस एक मेकअप रूम में बैठकर मेकअप करने लगे।'
राज कुमार
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पेड़ के नीचे होता था मेकअप
अभिनेता ने यह भी याद किया कि उन दिनों काम का माहौल आज के कलाकारों के अनुभव से कितना अलग था और वैनिटी वैन न होने की बात भी बताई। उन्होंने कहा, 'उन दिनों वैनिटी वैन नहीं होती थी। एक बार तो मुझे फिल्मिस्तान में एक पेड़ के नीचे अपना मेकअप करना पड़ा था। वह जिंदगी ही कुछ अलग तरह की थी।'
निर्देशन में भी आजमाया हाथ
- इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कलाकार बिस्वजीत चटर्जी ने कई हिंदी और बंगाली फिल्मों में काम किया है।
- उनकी हिंदी फिल्मों में 'बीस साल बाद', 'किस्मत' और 'नाइट इन लंदन' शामिल हैं।
- उनकी बंगाली फिल्मों में 'चौरांगी', उत्तम कुमार के साथ 'गढ़ नसीमपुर' और 'कुहेली' जैसी फिल्में शामिल हैं।
- बाद में अपने करियर में, चटर्जी ने फिल्म निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा।
- उनके बच्चे, एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी और पल्लवी चटर्जी भी बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने चेहरे हैं।