जंग को छोड़कर मोहब्बत की बात करने वाले 'बजरंगी भाईजान' की बात भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान को भी पसंद आई है। सलमान खान की फिल्म 'बजरंगी भाईजान' भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों में सुधार आने की उम्मीद जगाती है।
पाक सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष फख्र-ए-आलम ने एक इंटरव्यू में आईएएनएस फिल्म को दोनों मुल्कों के रिश्ते के लिहाज से शानदार बताया है। आलम ने दोनों देशो के शीर्ष नेतृत्व में चल रही बातचीत का भी जिक्र किया।
पाकिस्तान के सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष फख्र-ए-आलम ने माना कि फिल्में हमारे इतिहास में मौजूद कड़वाहट को हमारे बच्चों के लिए सुखद भविष्य में तब्दील करने में एक अहम भूमिका निभा सकती है।
'बजरंगी भाईजान' की वजह से आलम को कहा गया था 'गद्दार'
'बजरंगी भाईजान' को पाकिस्तान में रिलीज की इजाजत देने पर अपनी जान को खतरा बताने और ट्विटर पर अपने लिए 'गद्दार' शब्द सुनने वाले आलम ने कहा कि 'बजरंगी भाईजान' की रिलीज के बाद साफ हो गया कि फिल्म में नफरत नहीं प्यार है।
ईमेल साक्षात्कार में आलम ने कहा, 'फिल्में लोगों को करीब लाने और एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने का एक बढ़िया तरीका है। यह प्रचार और जागरूकता लाने के लिए एक बहुत कमाल का हथियार है।'
आलम ने कहा कि जिस तरह 'बजरंगी भाईजान' और 'पीके' में काम किया गया वो शानदार है, अगर इस तरह के विषयों को समझदारी से पेश किया जाए तो फिल्म दुनियाभर के लोगों को जोड़ सकती है। दिमाग खोल सकती है और दिलों को जोड़ सकती है।
'बेबी' को पाकिस्तान में बैन कर चुके हैं आलम
पाकिस्तान सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष फख्र-ए-आलम इससे पहले अक्षय कुमार की फिल्म 'बेबी' को पाकिस्तान में बैन कर चुके हैं। उन्होने कहा था कि कि यह भ्रामक प्रचार करने वाली फिल्म है, जो मूलत: यह कह रही है कि सब मुस्लिम आतंकवादी हैं और पाकिस्तान उन्हें पाल-पोस रहा है।
'बजरंगी भाईजान' में सलमान सीधे-सादे युवक की भूमिका में हैं। जो छह साल की पाकिस्तानी गूंगी बच्ची को उसके बिछुड़े मां-बाप तक पहुंचने का बीड़ा उठाता है। फिल्म ने न केवल सलमान की सादगी ने, बल्कि मासूम हर्षाली मल्होत्रा की मासूमियत भी लोगों को भावुक करती है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी के चुटीले संवादों और कबीर खान के भारत-पाक संबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दे को शानदार करीके से पेश करने के तरीके से 'बजरंगी भाईजान' ने पाकिस्तान के दर्शकों का दिल जीत लिया।