गधे को घोड़ा मानने वाले आदमी की कहानी
लघु फिल्म फिक्शन श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार के लिए अर्हता प्राप्त करने वाली 'मुर घुरार दुरोंतो गोति' 15 मिनट की असमिया फिल्म है। ये फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताती है, जो मानता है कि उसके पास दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला घोड़ा है। वह चाहता है कि उसका ये घोड़ा शहर की सभी दौड़ जीत जाए, लेकिन असल में उसके पास एक घोड़ा नहीं बल्कि गधा है। फिल्म में ओजापाली कला का प्रयोग किया गया है, जिसमें कलाकार नृत्य, गायन और मजेदार संवाद से कहानी को बताते हैं।
बेंगलुरू इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में जीता पुरस्कार
फिल्म 'मुर घुरार दुरोंतो गोति' की सबसे दिलचस्प बात ये है कि इसे स्टूडेंट प्रोजेक्ट के तहत बनाया था। सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता में महर्षि तुहिन कश्यप ने इसे अपने प्रोजेक्ट के लिए बनाया था। इस फिल्म ने हाल ही में बेंगलुरू इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता है। भारत में फीचर फिल्म को ऑस्कर में भेजने की प्रक्रिया काफी अलग है लेकिन जानकारी के मुताबिक, किसी भी शॉर्ट फिल्म को ऑस्कर रेस में शामिल होने के लिए गलुरू इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में टॉप अवॉर्ड जीतना होता है।
फिल्म के क्रू मेंबर्स में भी ज्यादातर छात्र
फिल्म 'मुर घुरार दुरोंतो गोति' को महर्षि तुहिन कश्यप ने निर्देशित करने के साथ ही इसकी पटकथा भी लिखी है। फिल्म का कुछ भाग कोलकाता के बाहरी हिस्सों में शूट किया गया है, लेकिन फिल्म के ज्यादातर भाग को कैंपस में ही शूट किया गया है। 'मुर घुरार दुरोंतो गोति' के क्रू में भी ज्यादातर छात्र ही शामिल हैं।