फिल्म जगत ऐसा है, जहां दोस्ती भी है और दुश्मनी भी। मैंने लगभग हर स्टार के साथ काम किया और सभी ने मुझे हमेशा सपोर्ट भी किया, लेकिन शम्मी कपूर मेरे फेवरेट रहे। उनके साथ पहली ही फिल्म 'दिल देके देखो' में काम करने का मौका मिला था। मैं बहुत घबराई हुई थी, लेकिन उन्होंने बड़े प्यार से हंसी-मजाक कर पहले मुझे कम्फर्टेबल महसूस कराया और उसके बाद हमने फिल्म की शूटिंग शुरू की। शम्मी जी बहुत ही नम्र थे। उन्होंने कभी अपने स्टारडम से दूसरों को असहज नहीं किया।
विज्ञापन
मैं को-स्टार्स के मामले में हमेशा लकी ही रही, जिन भी लोगों के साथ मैंने काम किया, उन्होंने हमेशा मेरा सपोर्ट ही किया। देव आनंद से लेकर राजेश खन्ना तक, मैंने सभी अभिनेताओं के साथ काम किया, लेकिन दिलीप साहब के साथ काम करने का मौका कभी नहीं मिला। मैं उनके साथ हमेशा से काम करना चाहती थी, पर कभी ऐसी कोई स्क्रिप्ट नहीं आई, जिसमें हम दोनों को साथ काम करने का मौका मिलता। मैं आज भी उनके साथ काम करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।
अगर मुझे भविष्य में उनके साथ काम करने का अवसर मिलेगा, तो मैं बिना कुछ सोचे प्रोजेक्ट के लिए तैयार हो जाऊंगी। मुझे याद है एक बार किसी ने ऐसी अफवाह फैलाई थी कि हम दोनों के बीच दुश्मनी और कटुता के चलते हमने साथ में कोई फिल्म नहीं की, लेकिन सब बकवास था। मैंने हमेशा कहा कि उनके, सायरा और मेरे बीच स्नेहपूर्ण रिश्ता रहा है।
विज्ञापन
वैसे फिल्म जगत में जो न हो वही कम है। यहां टोने-टोटके, तंत्र-मंत्र भी खूब चलते हैं। मेरा भी ऐसे ज्योतिषियों या तांत्रिकों से पाला पड़ा था। पर यहां ज्योतिषियों और तांत्रिकों से भी एक कदम आगे रहने वाले लोग हैं, जो अफवाह फैलाते हैं। इन्हें हम 'अफवाह उड़ाने वाले परिंदे' कह सकते हैं, क्योंकि यह जुबां से नहीं 'लिख पढ़कर' नमक-मिर्च से सराबोर करके लोगों को अफवाहों का स्वाद चखाते हैं।
ऐसे लोग अपने फायदे के लिए किसी भी तरह की अफवाह फैलाते रहते हैं। एक बार किसी ने यह अफवाह फैला दी थी कि मैं हर तरह की भूमिका में अपना एक 'भाग्यशाली हीरों का हार' पहनकर शूटिंग करने को कहती हूं। भले ही भूमिका रानी की हो या नौकरानी की और उस परिंदे का कहना था कि 'बहारों के सपने' में, जिसमें मेरी भूमिका एक नौकरानी की ही थी, जो झोपड़पट्टी में रहती है, जमीन पर सोती है, फूटे बर्तनों में खाना खाती है।
लेकिन मैं उस भूमिका में भी अपना भाग्यशाली हार पहनकर शूटिंग करने का आग्रह करती रही और उनके हिसाब से जब निर्देशक को यह सलाह दी कि वे नौकरानी को ‘हीरों का हार’ नहीं पहना सकते तो फिल्म में एक स्वप्न दृश्य तो अलग से लिखवा ही सकते हैं, जिसमें नौकरानी को हीरों का हार पहने हुए दिखलाया जा सकता है, लेकिन इस फिल्म में मेरा ऐसा कोई रोल ही नहीं था, तो वह जादुई हार पहनने का सवाल ही कहां उठता? वैसा जादुई हार मेरे पास था ही नहीं।
मैं केवल अपनी अभिनय क्षमता और काम के प्रति अपनी लगन पर ही विश्वास करती रही। अब तक मुझे जो कुछ भी नसीब हुआ है, वह अपनी कला को अगर कोई 'जादुई हार' कहना चाहे, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं। खैर, मैं तो इन सबको नहीं मानती, लेकिन कभी-कभी इन सस्ते टोटकों से भी किसी-किसी कलाकार को छोटी-मोटी सफलता हासिल हो जाती है और एक बार किसी भी माध्यम से किसी को कोई सफलता मिल जाती है, तो उसका विश्वास हो जाना स्वाभाविक ही है। हालांकि इस सफलता को मैं सफलता नहीं मानती।
यह मात्र संयोग होता है और संयोग की बात को कोई जानता नहीं? यह संयोग है कि मैं अभिनेत्री बनी, वरना क्या पता क्या बनती, अगर मेरे जीवन में वह घटना घट गई होती, वे वर्ष 1942 के दिन थे, उन दिनों गांधी जी का भारत छोड़ो आंदोलन जोरों पर था। मेरी मां कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में से एक थीं। रोज आंदोलन होते और जुलूस निकाले जाते। मेरी मां एक दिन एक ऐसे ही जुलूस में शामिल थीं।
उस समय होता यह था कि जो आदमी जुलूस का नेतृत्व कर रहा होता था, उसे अंग्रेज सरकार पकड़कर जेल में बंद कर देती थी। लोगों में ऐसा जोश था कि एक नेता के पकड़े जाते ही दूसरा आदमी तुरंत उसकी जगह नेतृत्व संभाल लेता था अगर वह भी पकड़ा जाता, तो कोई दूसरा सामने आ जाता। इसी तरह एक के बाद एक लोग अपने आपको गिरफ्तार कराते जाते थे।
इस जुलूस में मेरी मां अपने आपको गिरफ्तार करवाने के लिए बहुत जोर मार रही थी। उस समय मैं पेट में थी। बार-बार लोग मां को गिरफ्तार होने से मना करते और बार-बार वह गिरफ्तारी देने के लिए सामने जा पहुंचतीं। बड़ी मुश्किलों से लोगों ने उन्हें वहां से हटाया।
अब सोचती हूं कि मां उस सयम यदि गिरफ्तार हो गई होती, तो मैं तो जेल में ही पैदा हुई होती? लेकिन यह संयोग ही था, चाहे वह अच्छा था या बुरा, मैं जेल में पैदा होते-होते बच गई। अच्छा इस मायने में कि मैं जेल में नहीं पैदा हुई, जिस वजह से मुझे हीरोइन बनने का अवसर मिल पाया और बुरा इस मायने में कि अगर जेल में पैदा हुई होती, तो आज क्या बनती मुझे स्वयं पता नहीं।