पूरे 23 साल बाद प्रसिद्ध गायिका आशा भोंसले एक बार फिर से बंगाली में अपनी आवाज का जादू बिखेरने को तैयार हैं। इस दुर्गा पूजा के दौरान आशा भोंसले की सुरीली आवाज में एक बंगाली गाना "इबार पुजोय इलाम फिरे" सुनने को मिलेगा। आशा भोंसले ने इससे पहले भी दुर्गा पूजा के लिए अपने संगीतकार पति आर डी बर्मन के साथ 66 गाने गाये थे लेकिन बर्मन की मौत के बाद आशा ने बंगाली गाना गाने बंद कर दिए थे। म्यूजिक एल्बम "पूजोय आशा" में अमित कुमार की आवाज सुनने को मिलेगी। वह इस एल्बम में "सुरे तुमि" गीत गाते सुनाई देंगे। इस एल्बम में दो संगीतकारों ने संगीत दिया है जिसमें से एक शिलादित्य चौधरी भी हैं। शिलादित्य आशा जी से साथ काम करके काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि, "आशा जी के साथ काम
करना किसी सपने के सच होने जैसा है।
इस बंगाली पूजा गाने में अपनी आवाज देने के लिए आशा जी को काफी मनाना पड़ा, क्योंकि पंचम दा की मौत के बाद उन्होंने बंगाली गाना गाना लगभग छोड़ ही दिया था।" बता दें की ये बंगाली गाने बंगाल के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार दुर्गा पूजा के लिए गाये जाते हैं। ये गाने पुराने लोगों को अक्सर अपना जमाना यानि 1960 का वो दौर याद करने पर मजबूर कर देते हैं। ये वो दौर था जब बंगाली गानों का मतलब सिर्फ आशा भोंसले, लता मंगेशकर, आर डी बर्मन, हेमंत मुखोपाध्याय, मन्ना डे और किशोर कुमार हुआ करते थे।
1963 में आशा भोसले द्वारा गाया धार्मिक गाना "आमार खातर पाते" पहला गाना था जिसे मन्ना डे ने लिखा था। लेकिन करीब 50 साल पहले 1968 में आशा भोंसले के गाये गाने को पहली बार आर डी बर्मन ने संगीतबद्ध किया था। "एई एडीके ऐशो" और "जाबो की जबोना" गानों को गौरी प्रसन्ना मजूमदार ने लिखा था। "दुर्गे दुर्गे दुरगोटिनाशिनी" और "मोयना बोलो तुमि कृष्णो राधे" की तरह ये भी उस समय के हिट गानों में से थे। अपने 85 वें जन्मदिन के ठीक एक हफ्ते बाद ही आशा भोंसले ने "इबार पुजोय इलाम फिरे" गाया है। चौधरी ने बताया की , "इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान आशा जी ने पंचम दा के साथ अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। ये जानकर की अभी भी लोग उनके गाये गानों को सुनना पसंद करते हैं, उन्हें बहुत ख़ुशी हुई।" राज रॉय इस एल्बम के सह सगीतकार हैं और गानों को लिखा है उत्पल दास ने।