अपनी आने वाली फिल्म मुबारकां के प्रमोशन के लिए पूरी फिल्म की कास्ट दिल्ली पहुंची हुई थी। डबल रोल निभा रहे अर्जुन ने फिल्म के बारे में काफी दिलचस्र बातें बताईं। साथ ही पहली बार कॉमेडी में अपना लक आजमा रहे अर्जुन ने खासतौर पर इस तरह की फिल्म के लिए निर्माता अनीस बज्मी और चाचा अनिल कपूर का धन्यवाद कहा। अर्जुन के मुताबिक वो इस फिल्म में खुद को एक्सप्लोर कर पाए क्योंकि उनके साथ इस फिल्म में चाचा अनिल कपूर भी थे।
इस वक्त बॉलीवुड के गलियारों में नेपोटिज्म को लेकर माहौल थोड़ा गरमाया हुआ है। iifa के स्टेज से जो विवाद शुरू हुआ था वो अब तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर सबसे पहले कंगना रानौत ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद माफी मांगते हुए सैफ अली खान ने कंगना रानौत को एक ओपन लेटर लिखा था लेकिन फिर कंगना ने सैफ के ओपने लेटर के जवाब में लंबा चौड़ा ओपन लेटर दे मारा। इसी मुद्दे पर जब कपूर खानदान से आने वाले अर्जुन से सवाल पूछा गया तो उन्होंने बेबाकी से इसका जवाब दिया। अर्जुन ने कहा कि, “मेरा साफ जवाब है इस पर कि सवाल-जवाब और चर्चा से आगे बढ़ चुकी है ये बात, यह एक डिबेट बन गया है। जब एक तरह से सोचने वाले लोग साथ बैठते हैं तो बातचीत होनी चाहिए इस वक्त थोड़ा सा ज्यादा ऊंचे सुर पर बातें हो रही हैं और उसके नीचे अगर खरोच कर देखेंगे तो...जब सभी थोड़ा शांत हो जाएंगे तो मैं इसपर एक चर्चा करना चाहूंगा। मैंने पहले भी बिना झिझक इसके बारे में बोला है। हाफ-गर्लफ्रेंड के दौरान भी मुझसे एक बार पूछा गया था, सब का अपना संघर्ष होता है और मैं हर किसी के संघर्ष की इज्जत करता हूं क्योंकि यह एक बहुत ही मुश्किल काम है।
बोनी कपूर के बेटे अर्जुन कपूर ने बीते 5 साल में 9 फिल्मों में काम किया है और अर्जुन ने ये माना कि एक स्टारकिड होने से एक बात का फायदा जरूर मिलता है कि इंडस्ट्री के अंदर के लोगों से आपकी जान-पहचान बढ़ती है लेकिन आखिरकार सफलता पाने के लिए आपको दर्शकों के दिल में जगह बनानी पड़ती है।
“तो मैं खुद से बिना जोड़े सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि...फिल्म इंडस्ट्री बहुत ही बड़ी जगह है, इस वक्त एक्टिंग को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। अगर आप थोड़े खुले दिमाग पूरे फील्ड को देखेंगे तो जो हमारे कैमरामैन होते हैं, लिरिक्स राइटर हैं, म्यूजिक डायरेक्टर हैं, डायरेक्टर हैं टेक्निशियन हैं, जो लोग काम करने आते हैं, 200-250 लोगों की एक युनिट होती है। अगर आप बड़े नजरिए से देखेंगे तो आप ये महसूस करेंगे कि एक्टिंग एक हिस्सा है जो हमेशा आंखों के सामने रहता है लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के अंदर ये इतना नहीं है जितना इस वक्त दिखाया जा रहा है। मैं ये बिल्कुल भी मना नहीं कर सकता कि ये नहीं होता है। हमारे लिए एक आसानी होती है बातें-मुलाकातें होती हैं लेकिन अंत में तो दर्शक ही फैसला करती है।”