'पिता से कभी बहस मत करना'
कविता में अनुपम खेर ने उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर पिता से होने वाली सहमति और असहमति का जिक्र किया है। किशोर उम्र के बाद अक्सर संतान पिता के विचारों को नकारती है। मगर, फिर एक वक्त ऐसा आता है, जब लगता है कि पिता बिल्कुल सही थे। इसी को लेकर उन्होंने कुछ लाइनें सुनाई हैं और सुनाते हुए उनकी आंखें छलक आई हैं। अनुपम खेर ने सुझाव दिया है, 'पिता का तजुर्बा कभी गलत नहीं होता। इसलिए, अपने पिता से कभी बहस मत करो। उनके सम्मान पर आंच मत आने देना, क्योंकि पापा सबकुछ जानते हैं'।
यूजर बोले- 'आपकी बात ने दिल छू लिया'
अनुपम खेर के इस पोस्ट पर नेटिजन्स के कमेंट आ रहे हैं। यूजर्स लिख रहे हैं कि यह कविता सुनकर वे भी इमोशनल हो गए हैं। एक यूजर ने लिखा, 'मेरी आंखों में आंसू आ गए'। एक अन्य यूजर ने लिखा, 'आपकी बात ने हमारा दिल छूल लिया। आपने जो बताया, वही जीवन का सत्य हे, लेकिन इंसान को जानने में जीवन गुजर जाता हे। उन्हें ये जरूर सुनना ओर समझना चाहिए'। एक यूजर ने लिखा, 'कितने सरल तरीके से इतनी गहरी बात कही है'।