मैंने जिस फिल्म के लिए पहली बार ऑडिशन दिया था उसमें मेरा शशि कपूर साहब के बचपन यानी पंद्रह साल के करीब की उम्र का रोल था। फिल्म थी तू पायल मैं गीत (1971)। यह फिल्म रिलीज नहीं हुई। संयोग ऐसा रहा कि इसके बाद मैं कभी उनके साथ किसी फिल्म में काम भी नहीं कर सका। परंतु उनका योगदान रहा है मेरे कॅरिअर में। मुझे याद है मैं सेंट जेवियर्स कॉलेज में था। मंच पर एक नाटक कर रहा था और उसमें वह मुख्य अतिथि थे। उस साल मुझे कॉलेज में सबसे बेहतरीन एक्टर का अवार्ड दिया गया था। दिलीप कुमार साहब के नाम पर वह अवार्ड था। एक बड़ी-सी शील्ड थी। शशि कपूर साहब ने मेरा प्ले देखा। बहुत पसंद किया। उन्हीं के हाथों मुझे यह अवार्ड मिला। अवार्ड देने के बाद वह जहां जाते थे मेरे बारे में बात करते थे। मेरी तारीफ करते थे। उस समय इंडस्ट्री के काफी बड़े लोगों से उन्होंने कहा कि एक अच्छा ऐक्टर आ रहा है। वह मेरे लिए बहुत बड़ी सफलता थी।
मैं बचपन से स्ट्रगलर रहा हूं
मैं बचपन से स्ट्रगलर रहा हूं। संयोग यह कि मैंने जिस फिल्म (तू पायल मैं गीत) का पहला ऑडिशन दिया उसमें ही मुझे शशि जी बचपन का रोल मिला। मुझे याद है किरदार यह था कि वह एक संगीतकार का बेटा है और खुद भी एक गायक बनना चाहता है। ऑडिशन में सीन यह था कि लड़के के पिता ने उसे गले में पहनने का एक तानपूरे के डिजाइन वाला लॉकेट दिया हुआ है। बच्चे को लगता है कि उसकी आवाज उस तानपूरे वाले लॉकेट में है। फिल्म में विलेन उस बच्चे के गले से लॉकेट तोड़ लेता है और टॉर्चर करता है। इससे उस बच्चे की आवाज चली जाती है। प्राण साहब ने पर्दे पर विलेन का रोल निभाया था। वह ऑडिशन में मौजूद नहीं थे। (जैसा उन्होंने रवि बुले को बताया)
अमिताभ के साथ खास था रिश्ता
- फोटो : self
यह रोचक तथ्य है कि शशि कपूर अमिताभ बच्चन से उम्र में दस साल बड़े थे परंतु दोनों ने जितनी फिल्मों में साथ काम किया, लगभग सभी में वह अमिताभ के छोटे भाई बने। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और जिन दो ऐक्टरों वाली फिल्मों में अमिताभ होते थे, वह उसमें शशि कपूर का नाम आगे बढ़ाते थे। एक वक्त इंडस्ट्री में यहां तक कहा जाता था कि दोनों के बीच अनुबंध है कि वे दो हीरो वालों फिल्मों में साथ काम करेंगे। जब कोई प्रोड्यूसर उनसे मिलता है, तो वे उसे अनुबंध दिखा देते हैं। शशि-अमिताभ ने रोटी कपड़ा और मकान, दीवार, कभी कभी, त्रिशूल, सुहाग, काला पत्थर, शान, दो और दो पांच, सिलसिला, नमक हलाल में साथ काम किया। असल में शशि कपूर ने अमिताभ के संघर्ष के दिनों में उनका खूब साथ दिया था और एक बार दोनों जब मुंबई के सी रॉक होटल की 18वीं मंजिल पर शूटिंग कर रहे थे तभी अमिताभ को दमा का अटैक पड़ा था। इसमें अमिताभ होश खो बैठे थे और सांस लेने के लिए इतनी तेजी से खिड़की की तरफ भागे थे कि अगर दौड़ कर शशि ने उन्हें पीछे न खींचा होता तो वे ऊंचाई से नीचे गिर जाते।
रह गई तमन्ना
जुनून, कलयुग, 36 चौरंगी लेन, विजेता, उत्सव और अजूबा जैसी फिल्में प्रोड्यूस करने वाले शशि कपूर की तमन्ना दिलीप कुमार को लीड रोल में लेकर फिल्म बनाने की थी। इसके लिए उन्होंने स्क्रिप्ट भी तैयार कर ली थी परंतु फिल्म निर्माण में घाटे और खराब स्वास्थ्य ने उन्हें यह मौका नहीं दिया।