आनंद बख्शी ने अपने जीवन काल में हिंदी सिनेमा को बेहतरीन गाने दिए हैं। उनका आखिरी गाना मशहूर निर्माता निर्देशक सुभाष घई की फिल्म मजनू के लिए संगीतकार अनु मलिक ने रिकॉर्ड किया था। उदित नारायण का गाया ये गाना कभी बाहर न आ सका क्योंकि ये फिल्म ही बंद हो गई।
मैं कोई बर्फ नहीं हूं जो पिघल जाऊंगा
मैं कोई हर्फ़ नहीं हूं जो बदल जाऊंगा..
मैं सहारों पे नहीं खुद पे यकीं रखता हूं
गिर पड़ूंगा तो हुआ क्या मैं संभल जाऊंगा..
चांद सूरज की तरह वक़्त पे निकला हूं मैं
चांद सूरज की तरह वक़्त पे ढल जाऊंगा..
काफिले वाले मुझे छोड़ गए हैं पीछे
काफिले वालों से आगे मैं निकल जाऊंगा...
मैं अंधेरों को मिटा दूंगा चरागों की तरह
आग सीने में लगा लूंगा मैं जल जाऊंगा..
हुस्नवालों से गुज़ारिश है के परदा कर लें
मैं दीवाना मैं आशिक हूं मचल जाऊंगा
रोक सकती है मुझे रोक ले दुनिया ‘बख्शी’
मैं तो जादू हूं मैं जादू मैं चला जाऊंगा..
- आनंद बख्शी
(21 जुलाई 1930 रावलपिंडीं - 30 मार्च 2002 मुंबई)