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80 साल-80 किस्से: हरिवंश राय बच्चन ने कैसे लिखी थी मधुशाला', अमिताभ ने बताया था पिता से जुड़ा यह मजेदार किस्सा

Tue, 11 Oct 2022 01:00 PM IST
कविता गोसाईंवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने कई मौकों पर अपने पिता हरिवंंश राय बच्चन को याद किया है। लेकिन एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए उनकी लिखी 'मधुशाला' गाई और इससे जुड़ा एक मजेदार किस्सा भी बताया।
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माता-पिता के साथ अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। 11 अक्तूबर यानी आज अपना 80वां जन्मदिन मनाने वाले अमिताभ लंबे अरसे से हिंदी सिनेमा में सक्रिय हैं और उन्होंने यहां रहते हुए कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया है। एक शानदार अभिनेता होने के साथ-साथ अमिताभ एक पारिवारिक व्यक्ति भी हैं। यह बात किसी से नहीं छिपी है कि वह अपने परिवार से बेपनाह प्यार करते हैं और अपने माता-पिता को याद कर आज भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं। अमिताभ अक्सर अपने पिता हरिवंश राय बच्चन और मां तेजी बच्चन की याद करते हुए नजर आते हैं। वह कई मौकों पर अपने पिता को याद करते हुए उनकी लिखी प्रसिद्ध कविता ‘मधुशाला’ की पंक्तियां गुनगुनाते दिखे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरिवंश राय बच्चन ने ‘मधुशाला’ को लिखा क्यों था? तो चलिए अमिताभ के 80वें जन्मदिन पर 'बॉलीवुड का शहंशाह, 80 साल-80 किस्से' सीरीज के तहत जानते हैं।

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क्यों लिखी गई ‘मधुशाला’
हिंदी साहित्य या फिर कविताओं को पसंद करने वाले लोगों ने ‘मधुशाला’ जरूर पढ़ी या सुनी होगी। हरिवंश राय बच्चन ने अपने इस काव्य को साल 1933 में लिखा था, जो आज तक पसंद की जाती है। साल 2011 में भोपाल में अमिताभ फिल्म ‘आरक्षण’ की शूटिंग कर रहे थे। तब वहां पर उन्होंने एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां अमिताभ बच्चन ने पिता को याद करते हुए उनकी 'मधुशाला' गई। साथ ही उन्होंने बताया कि बाबूजी शराब नहीं पीते थे, बहुत से लोगों को आश्चर्य होता था पीते नहीं हैं तो शराब पर लिखते कैसे हैं? लोगों को लगता था यह लेखक दिन-रात शराब के नशे में चूर रहता है।

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लोगों के सवाल पर अमिताभ का जवाब
इसके आगे अभिनेता ने कहा था कि एक बार बाबूजी ने कहा था कि नशे से इंकार नहीं करूंगा। जिंदगी ही एक नशा है। कविता भी एक नशा है और भी बहुत से नशे हैं। अपने प्रेमियों का भ्रम दूर करने के लिए मैंने एक समय एक रुबाई लिखी। हालांकि, पिता के इस जवाब के बाद भी लोग उनसे पूछ ही लेते थे कि जब पीते नहीं हैं तो प्रेरणा कैसे मिलती है? तब उनका कहना था कि एक बार मेरे मन में ख्याल आया कि मेरा जन्म कायस्थों कुल में हुआ है, जो प्रसिद्ध ही पीने के लिए है, तो यह सब मेरे अंदर तो जन्म से होगा।

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मधुशाला की कुछ पंक्तियां
अमिताभ बच्चन समय-समय पर भी ट्विटर पर ‘धमुशाला’ की पंक्तियां लिख पिता को याद करते हैं। दीवाली के मौके पर उन्होंने अपनी तस्वीर शेयर की थी और इस कविता की चंद लाइनों को लिखा था। वह इस प्रकार थी....

अपने युग में सबको अनुपम ज्ञात हुई अपनी हाला,
अपने युग में सबको अदभुत ज्ञात हुआ अपना प्याला
फिर भी वृद्धों से जब पूछों, एक यही उत्तर पाया
अब न रहे वो पीने वाले, अब न रही वो मधुशाला
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