संवाद कार्यक्रम में अमीषा पटेल ने 'गदर 2' के तारा सिंह यानी एक्टर सनी देओल की तुलना टॉम क्रूज से कर डाली। अमीषा ने कहा, 'तारा-सकीना की जोड़ी अमर रहेगी'।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में आज अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी फिल्म 'गदर 2' की पूरी स्टारकास्ट शामिल हुई। इस दौरान फिल्म के लीड स्टार सनी देओल और अमीषा पटेल ने 22 साल पहले आई फिल्म 'गदर' और अब इसके सीक्वल 'गदर 2' पर कई बातें रखीं। इसके अलावा 'गदर 2' में विलेन का रोल निभा रहे एक्टर मनीष वाधवा भी उपस्थित रहे। साथ ही एक्टर उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर ने भी कई दिलचस्प बातें साझा कीं।
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अमीषा ने की सनी देओल की तारीफ
संवाद कार्यक्रम में अमीषा पटेल ने 'गदर 2' के तारा सिंह यानी एक्टर सनी देओल की तुलना टॉम क्रूज से कर डाली। अमीषा ने कहा, 'तारा-सकीना की जोड़ी अमर रहेगी। सेट पर वैसे ही लगा जैसे हम 2001 में 'गदर' के दौरान थे। सकीना के शौहर तारा सिंह और युवा होते जा रहे हैं। कल इनकी परफॉर्मेंस देखी तो मैंने इनसे कहा कि ये रोमांस और डांस कहां छुपा रखा था? तारा-सकीना की जोड़ी जादुई है। मैं सनी जी से हमेशा यह कहती हूं कि टॉम क्रूज तीस साल बाद हिट ला सकते हैं तो बॉलीवुड में यह काम सिर्फ सनी जी कर सकते हैं'।
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'खुशनसीब हूं कि 'गदर 2' से डेब्यू करने को मिला'- सिमरत
संवाद में सिमरत कौर भी शामिल हुईं। पत्रकार मीनाक्षी कंडवाल ने सिमरत से उनका अनुभव पूछा तो एक्ट्रेस ने कहा, 'सेट पर रैगिंग जैसा तो कुछ नहीं हुआ। हंसी-मजाक के साथ शूटिंग होती थी। मैं सबसे खुशनसीब हूं कि मुझे गदर-2 से डेब्यू करने को मिल रहा है। इससे बड़ी बात किसी के लिए कुछ नहीं हो सकती। मुझे सनी जी के साथ एक इमोशनल सीन करना था। मैं नवर्स थी क्योंकि उनकी बहुत इज्जत करते हैं सब। सनी जी ने कहा कि दिल से महसूस करो, अपने आप आंखों और चेहरे पर इमोशंस आ जाएंगे। पुरानी 'गदर' की जब अमृतसर स्टेशन के पास शूटिंग हो रही थी, तब उसी भीड़ में मैं अपनी मां के साथ गोदी में मौजूद थी'।
सनी देओल को परिवार से मिली थी यह नसीहत
संवाद में सनी देओल से पूछा गया कि 'कैसे नन्ही आंखों में सपने पूरे होते हैं, जैसा सिमरत के साथ हुआ। नए अभिनेताओं का आपने कैसे हौसला बढ़ाया? इस पर एक्टर ने कहा, 'पहले तो मुझे समझ नहीं आता कि मेरी उम्र क्या है। मेरी लोग इज्जत करते हैं तो अजीब सा लगता है। शुरू-शुरू में पता नहीं चला। फिर बॉर्डर जैसी फिल्में आईं तो लोग आकर पैर छूने लगे। तब समझ आया कि यह जिम्मेदारी है। ऐसी फिल्में करो जिससे परिवार के लोगों को अच्छी नसीहत मिले। देश के लिए कुछ कर सकें। अब तारा सिंह बन गया। लोगों को लगा कि तारा सिंह पता नहीं क्या होता है। हर आदमी हर तरह का किरदार, हर तरह का बदमाश भी होता है। जो अपने किरदार को काबू रखकर चल सके, वह सही बंदा होता है।
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