अमर उजाला संवाद कार्यक्रम जारी है। कार्यक्रम में हर पल राज्य के विकास के पहलुओं पर बात हो रही है। इसमें देश की चर्चित हस्तियां अपनी बात रख रही हैं। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और केद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल तक पहुंचे हैं। इसी के साथ फिल्मी हस्तियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। इंद्रधनुष सत्र में कैलाश खैर, श्रिया सरन, मिनाक्षी दीक्षित पहुंची। यहां उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए।
सुमित अवस्थी: आप हिन्दुस्तान में क्या नई चीजें और बदलाव देखना चाहते है? ऐसी कौन सी बातें हैं जिसे आपको लगता है की उन्हें तुरंत ठीक करना चाहिए?
श्रिया सरन: उत्तराखंड मेरे लिए काफी महत्वपूर्ण है। मेरे पापा देहरादून से हैं और मेरे दादाजी यहां डीएवी कॉलेज में प्रोफेसर थे। मेरा जन्म हरिद्वार में हुआ और 16 साल की उम्र तक यहीं रहीं। मेरे लिए यह घर वापसी जैसा है। हरिद्वार की हर गली में एक कहानी छिपी है। जो इंसान जिस दुनिया से गुजरा है, उसे ही ज्यादा अच्छी तरह समझता है। इसी के साथ मैं कथक डांसर भी हूं। हमारे देश में आर्ट क्लासिकल डांस फॉर्म्स हैं। मुझे लगता है कि युवाओं को इन क्लासिकल डांस को सीखना चाहिए। मैं चाहती हूं कि क्लासिकल डांस फॉर्म्स को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मैं जब दिल्ली में पढ़ती थी, वहां ब्लाइंड स्कूल में काम करती थी। मैंने वहां स्पा भी शुरू किया था, जहां काम करने वाले सभी लोग विजुअली चैलेंज्ड थे। वैसे तो सरकार ऐसे लोगों के लिए काफी काम कर रही है, लेकिन हमें भी उनके लिए कदम बढ़ाने चाहिए। युवा पीढ़ी के लिए ये दोनों चीजें काफी अहम हैं।
सुमित अवस्थी: साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री में क्या अंतर है? क्यों साउथ हिट होता जा रहा है और बॉलीवुड वहां तक पहुंच ही नहीं पा रहा है?
श्रिया सरन: अपनी बात को शुरू करते हुए श्रेया कहती है,
मेरी तो दोनों फिल्में हिट हो गई थीं। आरआरआर भी हिट हुई थी और दृश्यम भी हिट हो गई थी। मुझे लगता है कि अच्छी फिल्में चल रही हैं और अच्छी कहानियां लोग पसंद कर रहे हैं और लोग थिएटर जा रहे हैं तो वह ही काफी अच्छा है। दरअसल, कोविड के बाद लोग थिएटर जाने से डरते थे। अगर आप बुजुर्गों के साथ रहते थे तो आप भी उनकी सेहत का ख्याल रखने के कारण डरते थे। अब आरआरआर और दृश्यम के बाद सबकुछ बदल गया है। दरअसल, लोग दो-तीन साल थिएटर नहीं गए और अब वे थिएटर जा रहे हैं। अब फिल्ममेकर्स को यह समझने की जरूरत है कि फिल्म में चाहे बड़ा स्टार हो या बड़ा डायरेक्टर हो, लेकिन फिल्म की कहानी ज्यादा अहम हो गई है। अब देखा जाता है कि स्टोरी टेलिंग किस तरह से है और स्क्रिप्ट क्या है? मैं एक डायरेक्टर से मिली थी। उनका कहना था कि यह हमारे लिए काफी इंट्रेस्टिंग टाइम है। जरूरी यह नहीं है कि हमारी फिल्म चल रही है या नहीं चल रही है, जरूरी यह है कि हम कैसे नया करें और क्या नया करें, क्योंकि इस दौर में हमें सीखने को मिल रहा है।