आपके पिताजी को हर कोई जानता है। लेकिन आपने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। इसमें कितनी मेहनत लगी?
मल्लिका दुआ: पिताजी ने भले ही सीधे तौर पर मेरी मदद नहीं की। लेकिन जिस स्कूल में भेजा, जहां सिखाया, वह प्रिविलेज मेरे पास था। जिस तरह के माता-पिता मुझे मिले, ऐसे में मैं खुद को सेल्फ-मेड नहीं कह सकती। हां, हास्य की दुनिया में मैंने खुद ही सब सीखा। वहां उन्होंने हाथ पकड़कर नहीं सिखाया। मेरा जो भी सपना था, मैं उसे पूरा कर पाई। न मेरा जर्नलिज्म से नाता है, न मेरे पिता का कॉमेडी से कोई नाता रहा। हमारे पेशे में संघर्ष आंतरिक होता है। खासकर तब, जब आप एक मुकाम पर पहुंच चुके हो। दस लोग आपकी बात पर हंस लिए, आगे क्या? मुझे कहा गया था कि आप स्प्रिंटर की तरह नहीं, मैराथन की तरह अपना करियर देखिए। हर रोज कोई न कोई वायरल हो रहा है, कोई जोक काफी देखा जा रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि 10 साल पहले अगर लोग मुझे जानते थे तो 10 साल बाद भी जान लेंगे।
Taali: सुष्मिता की सीरीज ताली का ट्रेलर हुआ रिलीज, ट्रांसजेंडर बनकर समाज में संदेश देने को तैयार अभिनेत्री
आपके कंटेंट को पसंद किया जा रहा है। आपके पिता के साथ टिडी टॉक्स का वीडियो सबसे ज्यादा देखा गया। ऐसा कंटेंट जनरेट कहां से करती हैं?
मल्लिका दुआ: एक तो इनबिल्ट कीड़ा था। मेरे स्कूल में नंबर नहीं आते थे। सिर्फ भाषाओं में नंबर आते थे। मेरी मां डॉक्टर थीं, लेकिन उनकी बुद्धि मुझसे में नहीं आई। दुख को जाहिर करने का मेरा तरीका होता था दूसरों की नकल उतारना। जो क्लास में करती थी, वह कॉलेज में किया। जो कॉलेज में किया, वह स्टेज पर किया। फिर फोन पर रिकॉर्ड किया। मेरे पिता गंभीर पेशे थे, लेकिन मजाकिया थे। इंस्टाग्राम पर कभी वे यह नहीं कहते थे कि मैं वरिष्ठ पत्रकार हूं, मैं कैसे तुम्हारे साथ नजर आ सकता हूं। मैं दस बार सोचकर चीजें नहीं करती थीं। मन में विचार आता था और वीडियो बनाकर पोस्ट कर देती थी। इंटरनेट पर लोगों को अनफिल्टर्ड देखना पसंद है।
मल्लिका को हमने हमेशा हंसते देखा। कभी ऐसा लगता होगा कि जब मन खराब रहता होगा। तब कैसे कंटेंट पर सोचती हैं?
मल्लिका दुआ: दिन में छह-सात बार मूड ऑफ ही रहता है। फ्रीलांसर होने का फायदा है कि मन करें तो काम करें, नहीं तो ना करें। अब मैंने एक नीति बना ली है कि लोग मुझे बतौर कॉमेडियन और बतौर इंसान भी जानते हैं। मैंने खुशी से ज्यादा अपना दुख बांटा किया। मेरे श्रोता मेरी खुशी और दुख, दोनों का हिस्सा बनते हैं। मैं वर्कहॉलिक नहीं हूं। मैं काम करने के बाद अपने लिए कुछ करना पसंद करती हूं। मेरे माता-पिता को खाना बनाना, गाने गुनगुनाना पसंद था। लोगों के रिश्ते उनके काम से होते हैं, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं है। काम मेरे लिए जिंदगी का एक हिस्सा है।
Jawan: 'जवान' की रिलीज की उलटी गिनती शुरू, शाहरुख खान ने शेयर किया फिल्म का धमाकेदार पोस्टर
पिता-बेटी का रिश्ता अलग होता है। आपने पिता से कुछ चीजें आत्मसात की हैं?
मल्लिका दुआ: पत्रकारिता का उनका अंदाज और उनका दिमाग मुझ में कभी नहीं आ सकेगा। लेकिन जो बात मुझमें आई, वह यह कि एकदम सीधे, निर्भिकता से, खुलकर बात करना, किसी से डरना नहीं। विरासत में मुझे आत्मविश्वास मिला है। उनके जाने के बाद भी हम ठीक से इसी वजह से जी पा रहे हैं।
Amarujala samvad 2023: अमीषा ने टॉम क्रूज से की सनी देओल की तुलना, बोलीं- 'अमर रहेगी तारा-सकीना की जोड़ी'
इन दिनों आपकी नजर में डिजिटल मीडिया कैसा है?
मल्लिका दुआ: ऑनलाइन जो कुछ हो रहा है, वह देखकर मुझे डर लगता है। ऐसा हर मीडिया के साथ हुआ होगा। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आ जाएगा तो पता नहीं क्या होगा। बंदर के हाथ में उस्तरे जैसा हाल है। यह अगर सही हाथ में गया तो ठीक, गलत हाथों में गया तो पता नहीं क्या होगा। संतुलन बनाए रखना जरूरी है। गलत जानकारी तो सदियों से चलती आ रही है, लेकिन अब उसका डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ गया है। इतनी ज्यादा जानकारी है कि सभी संघर्ष कर रहे हैं। हमें थोड़ा वक्त इंटरनेट से दूर बिताना चाहिए। अब लोगों को लत लग गई है। हम स्क्रॉल करते रहते हैं। आम जिंदगी में बातचीत कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। कई लोग फेक न्यूज फैलाने का काम करते हैं। यह बहुत डराने वाली स्थिति है। AI से चेहरे तक मॉर्फ हो जा रहे हैं।
Amarujala Samvad 2023: लोग जब भी मुझे याद करें उनके चेहरे पर मुस्कान हो, अमर उजाला संवाद में बोलीं मल्लिका दुआ
जब लोग आपके वीडियो देखते हैं तो मुस्कान आ जाती है। तनाव भरी जिंदगी में लोगों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?
मल्लिका दुआ: मैं कोई चुटकुला तो नहीं सुनाऊंगी। एक्सरसाइज करना जरूरी है। कुछ भी हो, दर्द जिंदगी में रहता है। नींद पूरी लें, कसरत करें, धूप में बैठें, फोन से दूर रहें। फिर चाहें तो हमारी कॉमेडी देख सकते हैं। मेरी सलाह ताऊजी की तरह है। किसी को साउथ दिल्ली, किसी को नॉर्थ दिल्ली वाला मेरा लहजा पसंद आता है। मुझे डर भी लगता है कि कॉमेडी करते-करते कुछ ऐसा न बोल जाऊं कि लोगों को बुरा लग जाए।