मुंबई के एनसीपीए थिएटर में विवादित नाटक 'एग्नेस ऑफ गॉड' का मंचन पूरा हो चुका होगा। इस नाटक को लेकर कैथोलिक ईसाई समुदाय में भारी नाराजगी है। वो पूरे भारत में इसके मंचन पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
लेकिन इस नाटक के मंचन पर रोक लगती नहीं दिख रही है। इसके निर्माता-निर्देशक कैजाद कोतवाल का कहना है कि वो इसे पूरे भारत में लेकर जाएंगे। विस्तार से पढ़िए क्यों इसका विरोध हे रहा है?
साल 1982 में न्यूयॉर्क की ब्रॉडवे प्ले पब्लिशिंग कंपनी के जॉन पाईलमियर के नाटक 'एग्नेस ऑफ गॉड' को भारत में दिखाया जा रहा है। यह काम कर रहे हैं 'वजाइना मोनोलॉग' जैसे विवादित और चर्चित नाटक का मंचन कर चुके कैजाद कोतवाल।
एक नन के गर्भवती हो जाने और उसके बाद पैदा हुए हालात पर आधारित इस नाटक पर कैथोलिक ईसाई समाज को खासी आपत्ति है। वे इस नाटक में इस्तेमाल कई शब्दों को ननों के लिए अभद्र और आपत्तिजनक मानते हैं। इस मुद्दे पर 1985 में एक हॉलीवुड फिल्म भी बन चुकी है। उस समय भी यूरोप और दूसरे देशों में ईसाई समाज ने इसका विरोध किया था।
बिना देखे विरोध
हालांकि मुंबई में इस नाटक के मंचन पर रोक लगाने की मांग की गई है। लेकिन सोमवार को हुए इस नाटक के मंचन पर कोई बड़ा विरोध नहीं किया गया।
इस नाटक के निर्देशक कैजाद कोतवाल ने बीबीसी से कहा, " हमारे नाटक को कुछ विशेष लोग बिना देखे ही बैन करने की मांग कर रहे हैं और गलत ठहरा रहे हैं।"
वो कहते हैं, " हमने यह नाटक सेंसर बोर्ड से पास करवाने के बाद ही दिखाना शुरू किया है। महाराष्ट्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एकनाथ खड़से ने मुझे आश्वासन दिया है कि अगर हमने कानून नहीं तोड़ा है तो नाटक को भी नहीं रोका जाएगा।"
एकनाथ खड़से ने इस बात की पुष्टि की कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों से कैजाद को पुलिस सुरक्षा दी गई है।
शबाना आजमी ने भरा जोश
इस मामले पर कैथोलिक समुदाय के बिशप का कहना है," इस नाटक में संन्यासी जीवन जीने वाली ननों को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। इस मामले में हम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिलने भी वाले हैं।"
लेकिन कैजाद इस विरोध को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन मानते है। वो कहते हैं, '' ननों के साथ बुरी घटनाएं होती हैं। यह सच है और मैं सिर्फ सच को दिखा रहा हूं और दिखाता रहूंगा।" कैजाद को भले ही ईसाई समुदाय के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन कुछ लोगों का उन्हें समर्थन भी मिला है।
अभिनेत्री शबाना आजमी ने ट्वीट कर कहा, " मैं कैजाद और महाबानों (सह निर्माता) के साथ खड़ी हूं क्योंकि इस नाटक को सरकारी स्वीकृति मिली है। यह काफी है।" सोशल एक्टिविस्ट कविता कृष्णन कहती हैं," इस नाटक पर बैन की मांग एक असहनशील माहौल का उदाहरण है। बैन कल्चर नहीं चलेगा, अभिव्यकित की स्वतंत्रता की रक्षा होनी चाहिए।"