विदेशी संपत्ति और बैंक अकाउंट से जुड़े सबूत मिले
जांच एजेंसी ने कहा, ‘कुछ विदेशी खरीदारों से एक्सपोर्ट से मिलने वाली रकम नहीं मिली थी। न ही अधिकृत डीलर बैंक से समय बढ़ाने की अनुमति ली गई थी। रकम की वसूली के लिए कोई दस्तावेजी कोशिश भी नहीं की गई थी।’ ईडी की जांच में पता चला कि एक्सपोर्ट इनवॉइस या शिपिंग बिल में बताए गए कंसाइनी (माल पाने वाले) या खरीदार के अलावा किसी तीसरी पार्टी से एक्सपोर्ट से जुड़ी रकम मिली थी।
ईडी ने कहा, ‘कार्रवाई के दौरान बिना जानकारी वाली विदेशी संपत्ति और विदेशी बैंक अकाउंट से जुड़े सबूत भी मिले। उदाहरण के लिए धर्मेश संघानी की एक ऐसी कनाडाई कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी पाई गई, जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। संबंधित विदेशी बैंक अकाउंट और उससे जुड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी भी सही अधिकारियों को नहीं दी गई थी। एक और मामले में, यूएई की एक ऐसी बिजनेस एंटिटी की पहचान की गई है, जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अभी तक कनाडा, यूएस और यूएई में बिना जानकारी वाले विदेशी बैंक अकाउंट की पहचान की गई है।’
इस मामले में अमेरिका और यूके के कस्टम अधिकारी संघानी के कुछ ट्रांजेक्शन की जांच कर रहे हैं। ईडी भी ऐसे ट्रांजेक्शन में फेमा के उल्लंघन की जांच कर रही है।