गौरव ने रंगमंच की शुरुआत 2010 में डॉ. नीलकमल चटर्जी द्वारा निर्देशित यमदीप से की। आगे चलकर अपने मित्र पुनीत कुमार मिश्रा और गुरु डॉ. अष्टभुजा मिश्र से नौटंक की बारीकियां सीखी। गौरव ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सपने देखना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है उसे पूरा करने की कोशिश करना। परिणाम हमारे हाथ में नहीं होता, हमारे हाथ में बस कोशिश करना होता है।