पिता ने नहीं किया एक्टर बनने का समर्थन
बातचीत के दौरान आयुष ने अभिनेता बनने के अपने सपने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मैंने अपने पिताजी से कहा कि मैं अभिनेता बनना चाहता हूं। मैंने उन्हें अपना फोटोशूट और अपने अभिनय की सीडी दिखाई। यह मेरे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पल था। लेकिन प्रोत्साहन के बजाय मुझे आलोचना का सामना करना पड़ा।
मेरे पिता ने कहा, ‘न तो तुम लंबे हो, न तुम्हारा शरीर सुडौल है, न तुम्हारी आवाज अच्छी है, न तुम सुंदर हो। तुम्हारा कोई व्यक्तित्व ही नहीं है। जब तुम सड़क पर चलते हो, तो कोई तुम्हें देखता भी नहीं। क्या कभी किसी ने तुमसे कहा है कि तुम अभिनेता बन सकते हो? तुम बच्चन साहब के आस-पास भी नहीं हो, तुम धर्मेंद्र के आस-पास भी नहीं हो। तुम कभी हीरो नहीं बनोगे। मैं तुम्हें स्क्रीन पर देखने के लिए 50 रुपये भी नहीं दूंगा।’
पिता ने पैसे देने को कर दिया था मना, फिर ऐसे माने
आयुष के पिता ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वो इस रास्ते का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मैंने तुम्हें पैसा दिया है, मैंने तुम्हें बहुत सहारा दिया है। तुम अपना सामान पैक करो, हिमाचल आओ और अपना काम करो।’ आर्थिक रूप से अलग-थलग पड़ जाने पर आयुष अकेले पड़ गए। उनकी बचत भी खत्म हो गई। एक्टर ने कहा कि हालात इस हद तक बिगड़ गए थे कि मेरे पास सिर्फ 20 रुपये बचे थे।
मेरे दोस्त ने मुझे फोन करके बताया कि उसे 50,000 रुपये प्रति माह की नौकरी मिल गई है। जब उसे मेरी हालत के बारे में पता चला, तो अगली सुबह मेरे खाते में 50,000 रुपये जमा हो गए। मैं हिमाचल वापस गया और पापा से कहा कि मुझे अपना करियर शुरू करने के लिए 10 करोड़ रुपये चाहिए। किसी ने मुझे यही रकम बताई थी। उन्होंने कहा, ‘बेटा, तूने देखा है कभी लंगड़े घोड़े पर पैसा लगाते हुए? मैं तो चलो 10 करोड़ बेटा समझकर दे भी दूंगा, लेकिन तेरे को देखने कौन आएगा?’ आखिरकार उनके दादाजी ने पापा को उन्हें एक और मौका देने के लिए राजी किया।