रिकॉर्डिंग लता मंगेशकर के एलएम स्टूडियो में की गई है
काव्य और गजल को पुनर्जीवित करने की इन दोनों कलाकारों की ख्वाहिश का नतीजा है नूर। यह गजल इस बात का सबूत है कि अच्छी कविताएं और संगीत कभी भी चलन से बाहर नहीं होते। जब भी अच्छी कविता या गीत सही संगीत के साथ पेश किया जाता है, लोगों को लुभाता है।
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