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पढ़िए 'कृष 3' के बनने से जुड़ी 8 सीक्रेट कहानियां

Tue, 06 Aug 2013 05:28 PM IST
रवि बुले
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ऋतिक रोशन की बहुप्रतीक्षित फिल्म कृष 3 का फर्स्ट लुक जारी हो गया है। यह फिल्म इसी साल दीवाली पर रिलीज हो रही है। इस फिल्म की रिलीज से पहले जानिए 'कृष 3' के बारे में 9 सीक्रेट कहानियां, खुद सुपरहीरो ऋतिक रोशन की जुबानी।
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‘कृष’ के बारे में कुछ भी बताने के लिए सबसे सही व्यक्ति रितिक रोशन हैं। जब मुंबई  ‘कृष 3’ का फर्स्ट लुक रिलीज हुआ तो रितिक ने दीवाली पर रिलीज होने जा रही महत्वाकांक्षी फिल्म से जुड़े हर सवाल का जवाब दिया। इस मौके पर फिल्म में ‘काल’ नाम के विलेन बने विवेक ओबेराय और उनकी ‘पार्टनर इन क्राइम’ कंगना रनौत भी थीं। निर्माता-निर्देशक और रितिक के पिता राकेश रोशन भी मौके पर मौजूद थे। लेकिन सबसे ज्यादा बातें कृष ने ही की। जानिए जो रितिक ने कहा, उन्हीं की जुबानी...


अब मैं स्वस्थ हूं...

‘कृष 3’ को बनने में पूरे तीन साल लग गए। हमने इस दौरान कुछ और नहीं सोचा। यह फिल्म हम सब ऐक्टरों के लिए चुनौती थी। मैं, विवेक, प्रियंका और कंगना अपने-अपने  किरदारों को सही ढंग से निभा सकें, इसके लिए हमें खूब तैयारियां करनी पड़ी। हम उम्मीद करते हैं कि हम ऐक्टरों के काम से डैड खुश होंगे। फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद मेरे सिर में भी तकलीफ हुई। ऑपरेशन हुआ। अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मेरे लिए दुआएं करने वाले सभी फैंस का मैं शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।
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एक फिल्म तीन किरदार...

फिल्म में मेरे तीन अलग-अलग गेट-अप हैं और इनके लिए तैयार होना ही थका देता था। किसी भी गेट-अप को तैयार करने में चार घंटे लग जाते थे और उसके बाद शूटिंग करनी पड़ती था। मेरे लिए फिल्म भावनात्मक रूप से भी कड़ी मेहनत कराने वाली थी क्योंकि इसमें पिता और पुत्र दोनों के किरदार तो निभाने ही थे, साथ ही उस सुपर हीरो का रोल भी मेरे जिम्मे था, जो किसी भी कठिन परिस्थित में हार नहीं मानता।

सुपर हीरो से शक्तिशाली

फिल्म में विलेन कोई साधारण विलेन नहीं है, वह ‘सुपर विलेन’ है। सुपर विलेन के बिना सुपर हीरो कुछ भी नहीं। हम जानते थे कि सुपर हीरो से लड़ने के लिए असाधारण खलनायक चाहिए। लेकिन स्क्रिप्ट पर काम करते हुए हम तब चौंके जब लगा कि सुपर विलेन तो सुपर हीरो से ज्यादा शक्तिशाली बन गया है। हर फिल्म में एक बुरा आदमी होता है, लेकिन हमने अपने बैड मैन को इतने पावर दे दिए कि सुपर हीरो के लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं। हमें दोनों के बीच शक्ति संतुलन करना था। मुझे लगता है कि हम इसमें कामयाब हुए।

नाम सिर्फ विवेक का तय हुआ

हमने जब स्क्रिप्ट तैयार कर ली और सुपर विलेन किसे बनाना है, इस पर विचार करते हुए लिस्ट बनाने बैठे तो विश्वास कीजिए कि सिर्फ ही नाम लिख सके। विवेक ओबेराय। हमें लगा कि उनसे बेहतर यह काम और कोई नहीं कर सकता। इसके बाद हमने किसी और नाम पर विचार नहीं किया। विवेक ने शानदार काम किया है। लोग उन्हें इस विलेनगिरी के लिए याद रखेंगे।

दिल आया विलेन पर

यह बात पूरी तरह सच है कि मेरा दिल फिल्म के विलन के किरदार पर आ गया था और मैं सोचता था कि मुझे विलेन बनने का मौका मिले। यानी फिल्म में मेरे चार किरदार हो जाते। लेकिन डैडी ने फैसला किया कि विलेन कोई और होगा। फिल्म में मैंने विवेक को जब काम करते देखा तो लगा कि यह ठीक ही हुआ। विवेक ने जो काम किया है, वह मैं नहीं कर सकता था।

याद करें सिर्फ प्यार से

हमने फिल्म में बच्चों का भी ध्यान रखा है। मेरे भी दोनों बच्चे अब क्रमशः सात और पांच साल के हो चुके हैं। बड़े वाले रेहान ने जब फिल्म का प्रोमो देखा तो देखता रह गया। उसने कहा कि ‘एवेंजर्स’ और ‘कृष 3’ मेरी बेस्ट लिस्ट में हैं। मुझे इसमें कोई ऐतराज नहीं कि बच्चे इस फिल्म को देख कर मुझे ‘कृष’ नाम से बुलाएं। मैं चाहता हूं कि कोई मुझे याद करे तो सिर्फ प्यार से। फिर चाहे कृष कहे या रितिक।

देख ले दुनिया

जिन दिनों हम यह फिल्म बना रहे तब हॉलीवुड की ‘एवेंजर्स’, ‘आयरन मैन’ और ‘सुपर मैन 3’ जैसी फिल्में आई। हम उन्हें बार-बार देखते और सोचते थे कि हमारे लिए चैलेंज बढ़ रहा है। उनका स्टेंडर्ड देख कर लगता था कि हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते। हम उनके मुकाबले क्यों नहीं फिल्म बना सकते। डैड ने हमेशा कहा कि हम ऐसा कर सकते हैं और आपको जान कर खुशी होगी कि फिल्म में जितने भी स्पेशल इफेक्ट्स हैं, वे सब इंडिया में किए गए हैं। हम दुनिया को बता देना चाहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है, जो हम नहीं कर सकते हैं।

नजर अब नतीजे पर

‘कृष 3’ में काम करना भीतर तक हिला देने वाला अनुभव था। शूटिंग के बाद दिन जब खत्म होता था तो हम लोग थक कर चूर हो जाते थे। यह फिल्म हमारी पूरी टीम की मेहनत का परिणाम है। खास तौर पर डैड की। उन्होंने ही इस फिल्म का सपना देखा। उन्होंने अपनी सीमाओं से परे जाकर इस सपने को साकार किया। एक-एक बात पर उनकी पैनी नजर थी। वे हमें बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते थे। हमारी कास्ट और क्रू ने फिल्म को बनाने में हर संभव योगदान दिया। उनके बिना हम कुछ नहीं हैं। लेकिन अब देखना यह है कि इस मेहनत का क्या परिणाम आता है क्योंकि अगर अच्छे नतीजे नहीं मिलते तो सारा श्रम व्यर्थ चला जाता है।
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