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अभिनय से सामाजिक सेवा तक का सफर
फिल्मों से दूरी बनाने के बाद नरगिस दत्त ने खुद को समाजसेवा के कार्यों में समर्पित कर दिया। उन्होंने सुनील दत्त के साथ मिलकर अजंता आर्ट्स कल्चरल ट्रूप की शुरुआत की, जो भारतीय जवानों के मनोरंजन के लिए देशभर में कार्यक्रम आयोजित करता था।
1970 के दशक में उन्होंने 'स्पास्टिक सोसाइटी ऑफ इंडिया' के साथ मिलकर विकलांग बच्चों के अधिकारों के लिए काम किया। वो इस संस्था की पहली संरक्षक बनीं और विकलांगता के मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाई।
राज्यसभा की सदस्य और पद्मश्री सम्मान
1980 में नरगिस दत्त को राज्यसभा के लिए नामित किया गया, जिससे वो पृथ्वीराज कपूर के बाद दूसरी फिल्मी हस्ती बनीं जो संसद पहुंचीं। 1958 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
संजय दत्त की पोस्ट ने दिल छू लिया
संजय दत्त की पोस्ट ने यह साबित कर दिया कि मां की कमी कोई समय भर नहीं सकता। फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान को न सिर्फ उनके अभिनय बल्कि उनकी सामाजिक सेवाओं के लिए भी हमेशा याद किया जाता रहेगा। नरगिस दत्त सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक आदर्श मां, समाजसेविका और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थीं।