असम के पुलिस महानिदेशक जी पी सिंह द्वारा निर्मित शॉर्ट डाक्यूमेंट्री 'फेहुजाली - द न्यू डॉन' को 15 जून से शुरू हो रहे मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखाया जाएगा। इसकी जानकारी फिल्म निर्देशक और महानिरीक्षक पार्थसारथी महंत ने सोमवार को दी। बता दें कि इस डाक्यूमेंट्री ने मार्च में आयोजित हुए सातवें नई दिल्ली फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ शार्ट डाक्यूमेंट्री का पुरस्कार भी जीता है। 19 मिनट की इस डाक्यूमेंट्री में युवाओं को उग्रवाद से दूर रहने, अपने लक्ष्य और धार्मिकता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया गया है।
उग्रवाद से दूर रहने के लिए जागरूक करती है फिल्म
असम पुलिस महानिदेशक जी पी सिंह ने जानकारी देते हुए कहा, ‘हमने देखा है कि कुछ युवा लड़के और लड़कियां विभिन्न हथकंडों का शिकार होकर आतंकवादी संगठनों के शिविरों में शामिल हो जाते हैं। हमने उन लोगों के बीच मोहभंग की सच्ची कहानियों को सार्वजनिक डोमेन में लाने का फैसला किया, जो इस तरह के प्रचार अभियानों का शिकार हुए और आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए।’
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चरमपंथियों के जाल में फंसे युवाओं का संघर्ष दिखाती है डाक्यूमेंट्री
निर्देशक ने कहा कि यह डाक्यूमेंट्री राज्य के युवाओं के लिए एक जागृति का काम करती है, जो चरमपंथी गुटों के जाल में फंसे हाशिए के युवाओं के संघर्षों पर प्रकाश डालती है।
धर्म के मार्ग पर चलने का करती है आग्रह
निर्देशक ने आगे कहा कि यह फिल्म युवाओं के मोहभंग से स्पष्टता की ओर के सफर को दिखाती है। महंत ने जोर देकर कहा कि 21 जून को एमआईएफएफ में ‘फेहुजाली’ की स्क्रीनिंग न केवल इसकी सिनेमाई बेहतरी को पहचानती है, बल्कि जागरूकता और बदलाव के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के तौर पर इसकी भूमिका को उजागर करती है। सात दिवसीय मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) शार्ट फिल्मों और एनिमेशन के लिए दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा मंच है।
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