दिग्गज संगीतकार की कलात्मक यात्रा दिखाई गई
इस कार्यक्रम में भूपेन हजारिका की रचनात्मक विरासत और कलात्मक यात्रा को प्रदर्शित किया गया। इस शताब्दी वर्ष के दौरान संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया। बयान में कहा गया कि असम के सांस्कृतिक कलाकारों ने उनके गीतों की गहराई, उनकी रचनाओं की खास शैली और उनकी आर्टिस्टिक विजन पर प्रकाश डाला, जो राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती, सांस्कृतिक जीवंतता और यूनिवर्सल ह्यूमनिज्म को झलक पेश करती हैं।
जापान के साथ था घनिष्ठ रिश्ता
सांस्कृतिक दल ने उनके कुछ सबसे आइकॉनिक गानों, जिनमें 'महाबाहु ब्रह्मपुत्र', 'मोई एति जजाबोर' और 'मनुहे मनुहोर बेबे' शामिल हैं, की नृत्य प्रस्तुतियां प्रस्तुत कीं। बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम में जापान के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों के दर्शकों ने भी हिस्सा लिया। इसमें कहा गया है कि भारत रत्न से सम्मानित हजारिका का जापान के साथ घनिष्ठ रिश्ता था। उन्होंने कई अवसरों पर उस देश का दौरा किया और वहां के लोगों के साथ मधुर रिश्ते बनाए।
2011 में दुनिया को कह दिया अलविदा
बता दें कि भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को हुआ था। निधन 5 नवंबर 2011 को हुआ। हजारिका असम के बहुमुखी प्रतिभा के गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वे असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे। वे भारत के ऐसे विलक्षण कलाकार थे जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे। उन्हें दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम जीवित सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता है। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया।