विवेक शर्मा और अमिताभ बच्चन
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मेहमान घर आए तो गेट तक छोड़ने आते हैं अमिताभ
‘चूंकि उनके विचार थोड़े साहित्यिक आधार वाले हैं और वो हरिवंश राय बच्चन के वंशज हैं, इसलिए उनके अंदर एक अलग तहजीब है। यकीन मानिए, यदि कोई भी उनसे उनके घर मिलने जाए तो वो गेट तक जाकर उन्हें छोड़ने आते हैं। यह शुरुआत से उनका नियम रहा है। आज की तारीख में लोग आपके मैसेज का जवाब नहीं देंगे या कॉल नहीं उठाएंगे, लेकिन अमिताभ बच्चन सीधे बात करते हैं और सीधे लोगों से मिलते हैं।’
पांच मिनट लेट होने के लिए मांगी माफी
‘'भूतनाथ' की शूटिंग के दौरान मैं मेहबूब स्टूडियो में था। अमिताभ केवल पांच मिनट के लिए लेट हो रहे थे, लेकिन उन्होंने मुझसे खुद मैसेज पर माफी मांगी और लिखा – 'मैं पांच मिनट लेट हो रहा हूं।' मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। मैंने कहा, दादा ऐसा मत कहिए। लेकिन उन्होंने बड़ी गंभीरता से कहा - 'नहीं विवेक, मुझे 11:30 बजे पहुंचना था और मैं 11:35 पर पहुंचा। इसके लिए मैं माफी मांगता हूं।' इस छोटे से पांच मिनट ने मुझे स्तब्ध कर दिया।’
सही समय पर सही काम होगा - यही है उनका मंत्र
‘कई बार मैं उन पर चिढ़ता हूं जब वो मुझे अपना डेट नहीं देते, लेकिन यकीन मानिए, वो मेरी बात पूरी सुनते हैं। मेरा गुस्सा भी वो देखते हैं। शांत रहते हैं और कहते हैं - सही समय पर सही काम होगा। उनमें जो धैर्य है, वह आज के किसी भी अभिनेता में नहीं है। उन्हें लोगों और परिस्थितियों को संभालना आता है। यही उनकी पीढ़ी की खासियत है। उनका बेटा अभिषेक और बहू ऐश्वर्या भी उन्हीं की तरह तहजीब वाले हैं।’
1984 के चुनावी दिनों को किया याद
‘कुछ महीने पहले मैं अपनी फिल्म 'चुल्लूभर पानी' के बारे में उनसे चर्चा करने गया। उन्होंने मुझे 1984 में जब वे चुनाव लड़ रहे थे, तब पानी की स्थिति कैसी थी, कैसे पानी एसिडिक होता था, पीले रंग का क्यों होता था - यह सब विस्तार से बताया। ऐसा लगता है जैसे यह आदमी भीष्म पितामह है। सच में, यह आदमी कमाल का है।’
बच्चन साहब की एनर्जी का कोई मुकाबला नहीं
‘अमिताभ कभी अपनी फिल्मों का सिनोप्सिस नहीं मांगते। वो लोगों से मिलकर कहानी सुनना पसंद करते हैं। 83 साल की उम्र में भी काम करना आसान नहीं है, लेकिन उनकी सेल्फ डिसिप्लिन और एनर्जी की दाद देनी चाहिए। आप मानेंगे नहीं, वो खुद ही अपने आपको लगातार मोटिवेट करते रहते हैं। बच्चन साहब के एनर्जी लेवल का कोई मुकाबला नहीं है। आज भी वो काम के भूखे हैं।’
स्टेज पर फुर्ती और एनर्जी आज भी देखते बनती है
‘कुछ महीने पहले एक इवेंट के दौरान मैं और मेरी बहन स्टेज पर थे और अमिताभ नीचे खड़े थे। मेरी बहन ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें ऊपर ले जाने की कोशिश की, लेकिन अमिताभ थे अमिताभ। वो मेरी बहन की कलाई पकड़ते हुए सीधे स्टेज पर कूदकर आ गए। उनमें आज भी विजय दीनानाथ चौहान जैसी फुर्ती और ऊर्जा है।’
टेलीविजन और विज्ञापनों को तुच्छ समझते थे
‘मुझसे एक बार अमिताभ ने कहा था कि वो टेलीविजन और विज्ञापनों को बहुत तुच्छ समझते थे। उन्हें लगता था कि यह स्टार के स्तर का काम नहीं है और मैं यह क्यों करूं। लेकिन जब उन पर 90 करोड़ का कर्ज आ गया और उनके साथ राजनीतिक तौर पर कई खेल खेले गए, तब आर्थिक मजबूरी में उन्होंने 'बागबान' और 'मोहब्बतें' जैसी फिल्में साइन कीं। फिल्ममेकरों को सीधे कॉल करके काम मांगना पड़ा। तभी यश चोपड़ा और रवि चोपड़ा ने उन्हें काम दिया।’
केबीसी के लिए मिले 350 करोड़
‘इसी बीच उन्हें 'कौन बनेगा करोड़पति' का ऑफर आया। उन्होंने इसे पहले तो हिचकिचाते हुए ज्वाइन किया। लेकिन उन्हें यह शो इसलिए भी अच्छा लगा क्योंकि इससे उन्हें भारत के उस हिस्से से जुड़ाव महसूस हुआ जो गरीबी से जूझ रहा है, मिडिल क्लास है, जानकार है और भाषा न आने के बावजूद उभरने की कोशिश कर रहा है। उस वक्त उन्हें पूरे सीजन के लिए लगभग 350 करोड़ रुपए मिले। पैसा तो वजह थी ही, लेकिन लोगों से जुड़ना उन्हें ज्यादा पसंद आया। इस शो ने उन्हें एक अलग पहचान दी और यही वजह है कि जब तक उनकी सेहत साथ देगी, वो इसे कभी नहीं छोड़ेंगे। इस शो के प्रति उनका लगाव और कृतज्ञता इस बात का प्रमाण है कि इसने उनके बुरे वक्त में उनका साथ दिया।’
इंडस्ट्री के एकमात्र हीरो जो अपने स्टाफ का पैसा प्रोड्यूसर से नहीं लेते
‘समय के साथ उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वो अब लीड एक्टर नहीं बल्कि करैक्टर हीरो हैं। उन्होंने सेंट्रल किरदार निभाया, लेकिन कभी यह डिमांड नहीं की कि फिल्म में मेरी एंट्री या एग्जिट ऐसी होनी चाहिए, या किरदार इस तरह दिखना चाहिए। वो इंडस्ट्री के एकमात्र हीरो हैं जो अपने स्टाफ का पैसा प्रोड्यूसर से नहीं लेते। उनके स्टाफ का खर्चा वो अपनी जेब से देते हैं। अपने वैनिटी वैन का खर्चा भी खुद उठाते हैं। सेट पर वो खुशी-खुशी बैठते हैं और वैनिटी वैन में भी तभी जाते हैं।’
रात 3 बजे भी रिप्लाई करते हैं
‘वो बहुत कम सोते हैं, रात के 3 बजे भी रिप्लाई करते हैं। हमेशा लंबा मैसेज भेजते हैं, कभी छोटा या सिर्फ नाम के लिए नहीं। वो डायरेक्टर के क्रिएटिव इरिटेशन को समझते हैं। साथ ही अपने गेस्ट के स्वाद को भी बखूबी जानते हैं - किसे मीठा पसंद है, किसे नमकीन, बिना पूछे ही सबका ध्यान रखते हैं।’
हल्का अल्जाइमर का इश्यू
‘अमिताभ को कई स्वास्थ्य समस्याएं हैं - आंत की परेशानी और हल्का अल्जाइमर का इश्यू, जिससे उन्हें लाइनों को याद करने में थोड़ी दिक्कत होती है। कोरोना होने के बाद से वो बेहद सतर्क हो गए हैं। अब वो ज्यादातर सैनिटाइज्ड बबल या स्टूडियो में ही शूट करना पसंद करते हैं और अचानक लोगों से मिलने से भी बचते हैं। इस उम्र में वो किसी भी जोखिम को मोल नहीं लेना चाहते, इसलिए स्वास्थ्य कारणों से आउटडोर शूट से भी थोड़ी दूरी बनाए रखते हैं।