हसरत जयपुरी के लिखे लोकप्रिय गाने ‘लाख छुपाओ छुप न सकेगा, राज हो कितना गहरा, दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा’ वाली ऋषिकेश मुखर्जी निर्देशित फिल्म ‘असली नकली’ साल 1962 में जब रिलीज हुई होगी, तो किसे ही पता होगा कि इस गाने की ये बात एक दिन सच भी साबित हो जाएगी! जी हां, करीब ढाई हजार साल पहले भरत मुनि के लिखे नाट्य शास्त्र में बताए गए अभिनय के नौ रसों- हास्य, श्रृंगार, करुण, शांत, वीर, वीभत्स, रौद्र, भयानक और अद्भुत, को चेहरे पर लाने के लिए मानव शरीर और चेहरे पर होने वाली हरकतों का अध्ययन करके देश में एक ऐसा एआई (कृत्रिम मेधा) टूल विकसित कर लिया गया है, जो सिर्फ 90 सेकंड में बता सकता है कि अमुक व्यक्ति झूठ बोल रहा है या सच!
पुणे में शुरू हुआ मानवीय परीक्षण
सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माने जाने वाले महाराष्ट्र के पुणे शहर में निहिलेंट टेक्नोलॉजीज की लैब में बीते कई साल से चल रहा इस एआई टूल का प्रयोग सफल रहा है। पुणे के ही जहांगीर अस्पताल में इसका मानव परीक्षण शुरू हो चुका है और इसके दैनिक जीवन में उपयोग इतने व्यापक हैं कि ये आने वाले समय में तमाम परीक्षणों में लगने वाले समय, श्रम और धन की भारी बचत कर सकते हैं। इस एआई टूल का नाम है, एमोस्केप यानी इमोशनल लैंडस्केप। किसी भी समय मनुष्य के चेहरे की मांसपेशियां और उससे अंग, मनुष्य के मस्तिष्क में घुमड़ रही भावनाओं के अनुरूप ही हरकतें करती हैं। लेकिन, क्या हो कि अगर मनुष्य सोच कुछ रहा हो और चेहरे पर दिखा कुछ रहा हो तब? तब, एमोस्केप इसे तुरंत पकड़ लेगा।
पंकज शुक्ल, निहिलेंट संस्थापक- एल सी सिंह
- फोटो : अमर उजाला, ब्यूरो
एमोस्केप ने पकड़ा शाहबाज का झूठ
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी ठिकानों पर जो हमले किए, और उसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अपने देश की जनता के सामने जो कथित ‘विजयी भाषण’ दिया, उसकी तहकीकात भी इस एआई टूल एमोस्केप ने की है। इस बारे में बनी गोपनीय रिपोर्ट कहती है, “ये भाषण देते समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खुद पर काबू बनाए रखने की कोशिश में हैं। वह कह कुछ भी रहे हों लेकिन भीतर से वह डरे हुए थे और ये वास्तविक था। उनके चेहरे पर दिख रही शांति केवल दिखावा है। उनके दिमाग में बढ़ता तनाव उनकी शख्सीयत में पड़ी दरारें दिखाता है। भाषण देते समय शाहबाज भारी आंतरिक और भू-राजनीतिक दबाव में रहे और उन्हें एक ऐसे कथन को बनाए रखने के लिए मजबूर किया गया जिस पर वह खुद ही विश्वास नहीं करते।”
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एमोस्केप लैब
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हार्वर्ड और निमहैंस के वैज्ञानिकों से मिली मदद
‘अमर उजाला’ देश का पहला मीडिया हाउस है जिसे एमोस्केप विकसित करने वाली प्रयोगशाला तक जाने की मंजूरी मिली है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से लेकर देश के शीर्ष मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, निमहैंस तक के मनोवैज्ञानिकों, चिकित्सकों और विशेषज्ञों की मदद से विकसित एमोस्केप का इन पंक्तियों के लेखक ने खुद अपने ऊपर भी परीक्षण करके देखा और पाया कि इसके नतीजे उनकी मानसिक दशा को हू ब हू बयान करते हैं। देश में आईटी उद्योग के पिता कहलाने वाले टीसीएस के संस्थापक एफ सी कोहली ने इस प्रयोगशाला का आठ साल पहले उद्घाटन किया था और कोहली के साथ लंबे समय तक काम करने वाले देश के प्रमुख आईटी उद्योगपतियों में से एक, एल सी सिंह की कंपनी निहिलेंट ने एमोस्केप की कल्पना को अमली जामा पहनाने में बीते कई सालों तक मोटा निवेश किया है। अब जबकि इस एआई टूल के मानव परीक्षण शुरू हो चुके हैं, इस काम में लगी पूरी टीम बेहद उत्साहित है।
एमोस्केप लैब
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बच्चों की मनोदशा जानने में बेहद उपयोगी
एमोस्केप परियोजना की देखरेख करते रहे विशेषज्ञ संदीप पेंडुरकर बताते हैं, “किसी के भी चेहरे और शरीर के मनोभावों को जानने में सौ फीसदी नतीजे देने वाला ये एआई टूल बहुत काम का हो सकता है। मसलन आप अपने बच्चे को कोटा भेजना चाहते हैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने और बच्चा डर के मारे कुछ कह भी नहीं पा रहा है। एमोस्केप ये बता सकता है कि बच्चा अपने माता पिता के इस फैसले के साथ है, या सिर्फ डर की वजह से हां कर रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी ये बहुत लाभकारी है और उनकी इमोशनल मैपिंग करके उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नजर रख सकता है। बड़ी कंपनियां नई नियुक्तियों के समय काफी समय, श्रम और संसाधन अपने कर्मचारियों का मनोवैज्ञानिक टेस्ट करने में खर्च करती हैं, एमोस्केप ये काम सिर्फ 90 सेकंड में कर सकता है।”
एमोस्केप लैब
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