निर्देशक आनंद एल रॉय, अभिनेता धनुष
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
मुझसे पूछे बिना बदलाव? ये गलत होगा
'AI डायरेक्टर की जगह नहीं ले सकता। यह मददगार हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर होना चाहिए। बिना सहमति के बदलाव गलत हैं। अगर कोई मेरी फिल्म का अंत AI से बदल दे और मुझसे ना पूछे, तो ये सरासर गलत होगा। रचनात्मकता का सम्मान जरूरी है।’
- अमर कौशिक, फिल्म निर्देशक और लेखक
तकनीक चले, मगर इंसान की मर्जी से
'AI एक नई तकनीक है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर होना चाहिए। कई बार फिल्में वैसी नहीं चलतीं जैसी उम्मीद होती है, लेकिन हर फिल्म में मेहनत और सोच होती है। अगर वर्षों बाद लगे तो AI की मदद से कुछ सुधार हो सकता है मगर फिर भी, डायरेक्टर और लेखक की मंजूरी जरूरी है।'
- अनिल शर्मा, फिल्म निर्देशक
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AI से डरो मत, समझदारी से चलो
'AI अब भविष्य नहीं, वर्तमान है। हॉलीवुड में इसकी शुरुआत हो चुकी है और हमें भी इसके साथ चलना होगा, नहीं तो हम पीछे रह जाएंगे। आज अगर शूट के दाैरान किसी एक्टर का निधन हो जाता है, तो AI हमें कहानी को पूरा करने का विकल्प देता है- पहले ये संभव नहीं था। हमें इसे एक खतरे की बजाय एक अवसर की तरह देखना चाहिए।'
- शब्बीर बॉक्सवाला, निर्माता व पटकथा लेखक
'बिना पूछे बदलाव करना कानून गलत है'
'कानूनी रूप से सबसे अहम बात होती है अनुबंध। अगर उसमें साफ लिखा है कि बदलाव का हक सिर्फ निर्माता के पास है, तो वह AI से क्लाइमैक्स बदल सकता है, भले ही निर्देशक नाखुश हो। इसलिए, जैसे-जैसे AI कंटेंट बदलने की ताकत बढ़ा रहा है, वैसे-वैसे जरूरी हो गया है कि लेखक, निर्देशक और निर्माता के बीच होने वाले अनुबंध में यह बात पहले से तय हो कि किसे कितना रचनात्मक नियंत्रण मिलेगा? बदलाव की इजाजत कौन देगा? वरना, नए डायरेक्टर्स की बात अनसुनी हो जाएगी और बड़ा प्रोडक्शन हाउस जो चाहेगा वही करेगा।’
- रोहित प्रधान, एडवोकेट और मीडिया एंटरटेनमेंट कानून विशेषज्ञ