नृत्य ही था जीवन की धड़कन
मधुमती का जीवन नृत्य के बिना अधूरा था। कहा जाता है कि उनके लिए नृत्य उतना ही जरूरी था, जितना सांस लेना। उनका जन्म 30 मई 1944 को मुंबई के एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता पेशे से जज थे, लेकिन मधुमती का रुझान शुरू से ही नृत्य और अभिनय की ओर था। बचपन से ही उन्होंने भरतनाट्यम, कथक, मणिपुरी और कथकली जैसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में महारत हासिल की थी।
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पढ़ाई से ज़्यादा उन्हें संगीत और नृत्य में दिलचस्पी थी। आगे चलकर उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में नृत्य किया बल्कि कई पीढ़ियों को डांस सिखाया भी। उनके कई शिष्यों ने भारतीय सिनेमा में नाम कमाया, जो आज भी उन्हें अपने गुरु के रूप में याद करते हैं।
हेलेन से होती थी तुलना
मधुमती का करियर उस दौर में शुरू हुआ जब बॉलीवुड में हेलेन अपने डांस नंबरों के लिए प्रसिद्ध थीं। दोनों का लुक और डांस स्टाइल काफी मिलता-जुलता था, जिसकी वजह से अक्सर लोगों में उनकी तुलना की जाती थी। मधुमती ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'हम दोनों अच्छे दोस्त थे। हेलेन जी मुझसे सीनियर थीं। लोग अक्सर हमें एक जैसा समझते थे, लेकिन हमें इससे कभी फर्क नहीं पड़ा।' दोनों ने भारतीय सिनेमा में डांस को नए स्तर तक पहुंचाया। जहां हेलेन कैबरे डांस की पहचान बनीं, वहीं मधुमती ने पारंपरिक और फिल्मी डांस दोनों को एक नई गरिमा दी।
19 साल की उम्र में की थी शादी
मधुमती की निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। उन्होंने मनोहर दीपक नाम के व्यक्ति से विवाह किया था, जो उनसे उम्र में काफी बड़े थे और चार बच्चों के पिता भी थे। दीपक की पहली पत्नी का निधन हो चुका था। हालांकि मधुमती की मां इस रिश्ते से खुश नहीं थीं, लेकिन अभिनेत्री ने अपने दिल की सुनी और 19 साल की उम्र में मनोहर दीपक से शादी कर ली। शादी के बाद भी उन्होंने फिल्मों और नृत्य की दुनिया से दूरी नहीं बनाई। वह डांस को अपनी आत्मा मानती थीं और जीवन के अंतिम समय तक अपने छात्रों को नृत्य सिखाती रहीं।