‘थिएटर के सामने सबसे बड़ी चुनौती है पायरेसी’
फिल्मों के ऑनलाइन लीक होने को लेकर भी अभिनेता ने बात की। उन्होंने कहा, ‘थिएटर के सामने सबसे बड़ी मुसीबत पायरेसी है। यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है जो फिल्म इंडस्ट्री के लिए काफी नुकसानदेह है। पायरेसी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, लेकिन आजकल यह बहुत ज्यादा हो रही है, जो बहुत ही दुखद है।’
‘शूटिंग में एक भी टकराव नहीं हुआ’
आमिर ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा, ‘सच कहूं तो ये पहली बार हुआ कि पूरी शूटिंग के दौरान एक भी बार किसी तरह का टकराव नहीं हुआ। वरना आमतौर पर हर फिल्म में कहीं न कहीं डायरेक्टर-डीओपी के बीच या प्रोडक्शन और कॉस्ट्यूम डिजाइनर के बीच कुछ न कुछ हो ही जाता है। लेकिन इस फिल्म में जरूरत ही नहीं पड़ी किसी को शांत करवाने की।’
उन्होंने आगे कहा, ‘इसका पूरा क्रेडिट उन दस न्यूरोडाइवर्जेंट एडल्ट्स को जाता है जिनके साथ हमने शूट किया। वो जैसे ही सेट पर आते थे, उनके चेहरे पर मासूम मुस्कान होती थी, वो सबको गले लगाते थे, प्यार से मिलते थे और उनकी एनर्जी पूरे सेट में फैल जाती थी।’
आमिर ने कहा, ‘उनकी मौजूदगी ने हमें भी बदल दिया। कोई ऊंची आवाज में बात नहीं करता था, कोई किसी से उलझता नहीं था। सब अपने आप ज्यादा शांत, समझदार और केयरिंग हो गए थे। मैं ये दिल से कहता हूं - उनकी वजह से हम सबका व्यवहार बेहतर हो गया और शायद हम थोड़े बेहतर इंसान भी बन गए।’
‘स्क्रीनिंग आम लोगों के लिए रखी’
आमिर ने फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर कहा, ‘मैं हर फिल्म की टेस्ट स्क्रीनिंग करता हूं लेकिन उसमें मैं फिल्म के लोगों को नहीं बुलाता। डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, ऐक्टर्स - इनका नजरिया अलग होता है। मैं ऑडियंस को बुलाता हूं वो जो आम लोग हैं, जिनका सीधा कनेक्शन सिर्फ स्टोरी से होता है, इमोशन से होता है। और वही असली रिएक्शन होता है मेरे लिए।’
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आमिर ने कहा, ‘इस फिल्म में भी हमने यही किया और बहुत स्ट्रॉन्ग रिस्पॉन्स मिला। लोगों को फिल्म बहुत पसंद आई। खास तौर पर ये जो 10 किरदार हैं और ये जो रियल न्यूरोडाइवर्जेंट ऐडल्ट्स हैं, इनका काम देखकर लोग हैरान रह गए।’
न्यूरोडाइवर्जेंट लोगों के साथ काम का अनुभव
आमिर ने फिल्म की शूटिंग के दौरान न्यूरोडाइवर्जेंट के साथ काम करने के अपने अनुभव को भी शेयर किया। उन्होंने कहा, ‘न्यूरोडाइवर्जेंट लोगों के साथ काम करने में उतना ही टाइम लगा जितना आम एक्टर्स के साथ, कभी-कभी तो कम। ये भी मेहनत करते हैं, लाइन्स रिहर्स करते हैं, और कभी-कभी लाइन भूल जाते हैं, जैसे सभी करते हैं। रीटेक होता है, लेकिन कभी देरी नहीं हुई।’
‘बदतमीज होने का मौका मिला तो खूब एन्जॉय किया’
इसके अलावा आमिर ने अपने किरदार के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘मैंने इस किरदार को बहुत एन्जॉय किया क्योंकि मुझे बदतमीज होने का मौका बहुत कम मिलता है। असल जिंदगी में मेरी मम्मी ने बहुत अच्छी परवरिश की है, मुझे बदतमीजी करना नहीं आता, मैं किसी से रूडली बात नहीं कर पाता। लेकिन इस फिल्म में, मुझे बदतमीजी करनी थी, हर किसी को कुछ न कुछ कड़वा बोलना था। तो मैंने इस बदतमीजी को करने का भरपूर मजा लिया।’
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‘स्पोर्ट्स फिल्मों में मेरी किस्मत अच्छी रही’
आमिर ने आगे कहा, ‘स्पोर्ट्स बेस्ड फिल्मों में मेरी किस्मत हमेशा अच्छी रही है- ‘लगान’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘दंगल’ जैसी फिल्मों ने मेरी जिंदगी और करियर दोनों को खास बनाया है। मुझे कभी नहीं लगा था कि मैं स्पोर्ट्स फिल्मों में इतना काम कर पाऊंगा।’
उन्होंने कहा, ‘मैंने ‘अव्वल नंबर’ जैसी फिल्म में भी काम किया है, हालांकि वो फ्लॉप रही। लेकिन रणबीर कपूर उस फिल्म के बड़े फैन हैं। पहले मुझे लगा था कि वो मजाक कर रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने जोश से फिल्म के हर सीन और डायलॉग सुनाए, तब समझ आया कि उन्हें सच में ये फिल्म बचपन से बहुत पसंद है और उनके दिल में इसकी खास जगह है।’
आमिर खान की फिल्म 'सितारे जमीन पर'
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