विदेशों से खरीदकर लाते कीमती उपहार
किताब के लेखक गौतम चिंतामणि ने 'डार्क स्टार' में लिखा है कि साल 2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद उनके बंगले 'आशीर्वाद' से 64 पैक सूटकेस मिले थे, जिनमें वे तोहफे थे, जो वे विदेश से लाए, लेकिन कभी किसी को नहीं दे पाए थे। किताब में लिखा है, 'राजेश खन्ना जब भी विदेश घूमने जाते, वहां से महंगे उपहार लाते। कभी-कभी वह इन्हें उन्हें सौंप देते, जिनके लिए वो लाते थे। कभी-कभी इन्हें देना ही भूल जाते थे। कई सूटकेस तो वे खोल भी नहीं पाते थे। उनके दुनिया से चले जाने के बाद ऐसे ही करीब 64 सूटकेस घर में मिले। इन सभी में लोगों के लिए गिफ्ट भरे हुए थे'।
2012 में छोड़ गए दुनिया
राजेश खन्ना ने 60 और 70 के दशक में कई सुपरहिट फिल्में दी थीं। उन्होंने 1966 में फिल्म आखिरी खत से डेब्यू किया था। 'आराधना', 'दो रास्ते', 'सच्चा झूठा', 'आन मिलो सजना', 'कटी पतंग', 'आनंद', 'हाथी मेरे साथी', 'अमर प्रेम', 'बावर्ची', 'दाग', 'नमक हराम' और 'रोटी' उनकी कुछ चर्चित फिल्में हैं। लंबी बीमारी के बाद 18 जुलाई 2012 को काका का निधन हो गया। निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी शादी अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से हुई। कपल की दो बेटियां ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना हैं।