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सीट का समीकरण: ऊंचाहार में अब तक हुए तीन चुनाव, तीनों बार सपा की जीत; ऐसा है यहां का सियासी इतिहास

Wed, 21 Oct 2026 09:34 AM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

रायबरेली जिले की ऊंचाहार विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां 2012 में पहला चुनाव हुआ था। इस सीट पर अब तक तीन चुनाव हुए हैं, और इन सभी चुनावों में समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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ऊंचाहार सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश की राजनीति का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात रायबरेली जिले की ऊंचाहार विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
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पहले जानते हैं ऊंचाहार विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला रायबरेली है। जिले के अंतर्गत कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली, सलोन, सरेनी और ऊंचाहार शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम ऊंचाहार विधानसभा सीट की बात करेंगे। रायबरेली जिले की ऊंचाहार विधानसभा सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां साल 2012 में पहला चुनाव हुआ था। इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। अस्तित्व में आने के बाद से ही इस सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) का कब्जा रहा है। अब तक यहां हुए तीन चुनावों में सपा ने ही जीत हासिल की है, जबकि बाकी अन्य पार्टियों को अभी भी अपनी पहली जीत का इंतजार है।

ऊंचाहार विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में पासी, यादव, ब्राह्मण, क्षत्रिय और मौर्य समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी पासी मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 13% और ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है, जबकि क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 11% है। अन्य प्रमुख वर्गों में मौर्य समाज के मतदाता लगभग 8% और मुस्लिम मतदाता करीब 6% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं। 

ऊंचाहार विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
ऊंचाहार में अब तक हुए तीन चुनाव, तीनों में सपा ने मारी बाजी


2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में रायबरेली जिले की ऊंचाहार विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार पांडेय विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उत्कृष्ट मौर्य को 2,582 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मनोज कुमार पांडेय को 61,930 वोट, जबकि उत्कृष्ट मौर्य को 59,348 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के अजय पाल सिंह 47,898 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
सपा ने दोहराई जीत
इसके बाद 2017 में समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार पांडेय लगातार दूसरी बार विजयी हुए। इस बार उन्होंने भाजपा के उत्कृष्ट मौर्य को 1,934 वोटों से हराया। चुनाव में मनोज कुमार पांडेय को 59,103 वोट, जबकि उत्कृष्ट मौर्य को 57,169 वोट मिले। वहीं, बसपा के विवेक विक्रम सिंह 45,356 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
वहीं पिछले यानी कि 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार पांडेय ने लगातार तीसरी बार ऊंचाहार विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के अमरपाल मौर्य को 6,621 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मनोज कुमार पांडेय को 82,514 वोट, जबकि अमरपाल मौर्य को 75,893 वोट मिले। वहीं, बसपा की अंजलि मौर्य 34,692 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

2027 में बदले दिखेंगे समीकरण
2027 के विधानसभा चुनाव में ऊंचाहार सीट पर सपा को नया उम्मीदवार ढूंढना होगा। इस सीट पर सपा को लगातार  तीन जीत दिलाने वाले मनोज कुमार पांडेय अब सपा का साथ छोड़कर सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा हो चुके हैं। साथ ही योगी कैबिनेट में मंत्री हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में पांडेय भाजपा के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं। वहीं, सपा को नया चेहरा खोजना होगा। 
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