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सीट का समीकरण: बाबागंज में अब तक तीन चुनाव, हर बार जीते विनोद सरोज, ऐसा है यहां का सियासी इतिहास

Wed, 21 Oct 2026 05:38 AM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

प्रतापगढ़ जिले की बाबागंज विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और यहां पहला चुनाव 2012 में हुआ था। यहां हुए अब तक के तीन चुनावों में एक ही चेहरे ने जीत दर्ज की है। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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बाबगंज सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। हर सीट का अपना अलग राजनीतिक इतिहास, सामाजिक समीकरण और चुनावी महत्व है। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात प्रतापगढ़ जिले की बाबागंज विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।

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पहले जानते हैं बाबागंज सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला प्रतापगढ़ है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं, जिनमें रामपुर खास, बाबागंज, कुंडा, विश्वनाथगंज, प्रतापगढ़, पट्टी और रानीगंज शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम प्रतापगढ़ जिले की बाबागंज विधानसभा सीट की बात करेंगे। प्रतापगढ़ जनपद की बाबागंज विधानसभा सीट साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इस विधानसभा सीट पर पहला चुनाव साल 2012 में हुआ था। यहां के पहले विधायक विनोद कुमार बने थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।

बाबागंज विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
बाबगंझ विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में अनुसूचित जाति (दलित), यादव, मुस्लिम, अन्य पिछड़ी जातियां, ब्राह्मण और पटेल समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी अनुसूचित जाति (दलित) मतदाताओं की है, जो लगभग 23% हैं। इसके बाद यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14% और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है, जबकि अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) की हिस्सेदारी करीब 12% और ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है।

अन्य प्रमुख वर्गों में पटेल (कुर्मी) समुदाय के मतदाता करीब 10%, क्षत्रिय (ठाकुर) समाज लगभग 8% और वैश्य मतदाता करीब 4% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं। 

बाबागंज विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

बाबागंज के पहले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने मारी बाजी
प्रतापगढ़ जिले की बाबागंज विधानसभा सीट के पहले यानी कि 2012 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी। चुनाव में बाबागंज विधानसभा सीट से निर्दलीय विनोद कुमार विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के महेंद्र कुमार को 42,066 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में विनोद कुमार को 69,332 वोट, जबकि महेंद्र कुमार को 27,266 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के सुरेश भारतीय 25,920 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2017: निर्दलीय प्रत्याशी ने दोहराई जीत
इसके बाद 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में भी बाबागंज विधानसभा सीट से निर्दलीय विनोद कुमार विजयी हुए। इस बार उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के पवन कुमार को 37,160 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में विनोद कुमार को 87,778 वोट, जबकि पवन कुमार को 50,618 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के दया राम 17,205 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

बाबागंज विधानसभा सीट पर विनोद कुमार ने लगाई जीत की हैट्रिक
वहीं 2022 के चुनाव की बात करें तो बाबागंज विधानसभा सीट पर विनोद कुमार ने जीत की हैट्रिक लगाई। हालांकि, इस बार उन्होंने जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने समाजवादी पार्टी के गिरीश चंद्र को 15,767 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विनोद कुमार को 67,282 वोट, जबकि गिरीश चंद्र को 51,515 वोट मिले। वहीं भाजपा के केशव प्रसाद 30,391 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
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