उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही मतदाताओं को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं रानीगंज विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला प्रतापगढ़ है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं, जिनमें रामपुर खास, बाबागंज, कुंडा, विश्वनाथगंज, प्रतापगढ़, पट्टी और रानीगंज शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज विधानसभा सीट की बात करेंगे। प्रतापगढ़ जनपद की रानीगंज विधानसभा सीट साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह विधानसभा दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों का हिस्सा थी। इस विधानसभा सीट पर पहला चुनाव साल 2012 में हुआ था। यहां के पहले विधायक प्रोफेसर शिवकांत ओझा बने थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
इस विधानसभा सीट पर पिछले यानी कि 2022 के चुनाव में राकेश कुमार वर्मा उर्फ डॉ. आर. के. वर्मा विजयी हुए थे। उन्होंने सपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
कब-किस पार्टी को मिली जीत?
- फोटो : अमर उजाला
रानीगंज का जातीय समीकरण
रानीगंज विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, पिछड़ा वर्ग, क्षत्रिय, मुस्लिम और यादव समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 25% हैं। इसके बाद पिछड़ा वर्ग के अन्य मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 19% और क्षत्रिय मतदाताओं की आबादी लगभग 16% है। वहीं मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 12% और यादव मतदाताओं की आबादी लगभग 6% है। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
रानीगंज विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
रानीगंज के पहले चुनाव में सपा ने मारी बाजी
प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज विधानसभा सीट के पहले यानी कि 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बाजी मारी। चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रो. शिवकांत ओझा विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के मनशा अहमद को 12,604 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में प्रो. शिवकांत ओझा को 63,076 वोट, जबकि मनशा अहमद को 50,472 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मी नारायण पांडेय 'गुरु जी' 16,779 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
- फोटो : 2022 का नतीजा
2017 में भाजपा ने जीता चुनाव
इसके बाद 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में भाजपा का बोलबाला रहा। चुनाव में यूपी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। इस लहर का असर रानीगंज विधानसभा सीट पर भी दिखा, जहां भाजपा के अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के शकील अहमद खान को 9,009 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा को 67,031 वोट, जबकि शकील अहमद खान को 58,022 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रो. शिवकांत ओझा 37,816 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
रानीगंज विधानसभा सीट पर सपा ने की वापसी
वहीं 2022 के चुनाव की बात करें तो रानीगंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के राकेश कुमार वर्मा उर्फ डॉ. आर.के. वर्मा विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा को 2,649 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राकेश कुमार वर्मा को 75,583 वोट, जबकि अभय कुमार को 72,934 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अजय यादव 21,411 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।