उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अब जमीन पर दिखाई देने लगी हैं। सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी समीकरण साधने में जुट गए हैं। आगामी चुनाव में जहां भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास करेगी, वहीं विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन की उम्मीद के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात प्रयागराज जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं प्रतापपुर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला प्रयागराज है। जिले में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, प्रतापपुर, हंडिया, मेजा, करछना, इलाहाबाद पश्चिम, इलाहाबाद उत्तर, इलाहाबाद दक्षिण, बारा और कोरांव शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम प्रयागराज जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। प्रयागराज जनपद की प्रतापपुर विधानसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह विधानसभा दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों का हिस्सा थी। प्रतापपुर नाम से पहला विधानसभा चुनाव यहां साल 1967 में हुआ था।
इस विधानसभा सीट पर पिछले यानी कि 2022 के चुनाव में विजमा यादव विजयी हुई थीं। उन्होंने सपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
प्रतापपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
प्रतापपुर के पहले चुनाव में कांग्रेस ने मारी बाजी
प्रतापपुर विधानसभा सीट के अपने पहले यानी कि 1967 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के एम. हसन विजयी हुए थे। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के एस. सुरत को 2,613 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में एम. हसन को 18,181 वोट, जबकि एस. सुरत को 15,568 वोट मिले।
प्रतापपुर में पहली बार जीती संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1969 के चुनाव में प्रयागराज जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट पर पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) ने जीत दर्ज की। चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के श्याम सुरत विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के मुजफ्फर हसन को 2,308 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम सुरत को 13,777 वोट, जबकि मुजफ्फर हसन को 11,469 वोट मिले।
प्रतापपुर विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल की हुई एंट्री
1969 के चुनाव के बाद प्रतापपुर में 1974 के चुनाव हुए। इन चुनावों में भारतीय क्रांति दल ने बाजी मारी। चुनाव में हर प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के श्याम सुरत उपाध्याय को 1,886 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हर प्रताप सिंह को 20,533 वोट, जबकि श्याम सुरत उपाध्याय को 18,647 वोट मिले।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
पहली बार जनता पार्टी प्रतापपुर विधानसभा सीट से जीती
आपातकाल खत्म होने के बाद राज्य में 1977 के चुनाव हुए। प्रतापपुर विधानसभा सीट से जनता पार्टी के हर प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के श्याम सुरत उपाध्याय को 604 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया। चुनाव में हर प्रताप सिंह को 25,767 वोट, जबकि श्याम सुरत उपाध्याय को 25,163 वोट मिले।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980: प्रतापपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव की बात करें तो प्रयागराज जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के श्याम सूरत उपाध्याय विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के हर प्रताप सिंह को 11,123 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम सूरत उपाध्याय को 37,847 वोट, जबकि हर प्रताप सिंह को 26,724 वोट मिले।
कांग्रेस ने दोहराई जीत
1980 के बाद राज्य में 1985 के चुनाव हुए। इस चुनाव में प्रतापपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के श्यामसूरत उपाध्याय विजयी हुए। उन्होंने लोक दल के हर प्रताप सिंह को 3,980 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्यामसूरत उपाध्याय को 34,263 वोट, जबकि हर प्रताप सिंह को 30,283 वोट मिले।
प्रतापपुर से पहली बार जीता जनता दल
1989 के चुनाव में प्रयागराज जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट पर पहली बार जनता दल ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता दल के राजेंद्र त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के श्याम सूरत उपाध्याय को 19,336 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजेंद्र त्रिपाठी को 54,910 वोट, जबकि श्याम सूरत उपाध्याय को 35,574 वोट मिले।
1991: जनता दल ने दोहराई जीत
इस चुनाव में प्रतापपुर सीट पर जनता दल ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की। चुनाव में विक्रम जीत मौर्य विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के जवाहर लाल दिवाकर को 11,874 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विक्रम जीत मौर्य को 31,167 वोट, जबकि जवाहर लाल दिवाकर को 19,293 वोट मिले।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
प्रतापपुर सीट पर पहली बार जीती बसपा
1993 के चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में प्रतापपुर विधानसभा सीट पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के जवाहर लाल दिवाकर विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के श्याम सूरत उपाध्याय को 27,682 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में जवाहर लाल दिवाकर को 56,967 वोट, जबकि श्याम सूरत उपाध्याय को 29,285 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के दिग्विजय सिंह 25,583 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
प्रतापपुर में पहली बार जीती सपा
वहीं 1996 के चुनाव में इस सीट पर पहली बार सपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के जोखू लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के देवराज सिंह को 14,823 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जोखू लाल को 48,157 वोट, जबकि देवराज सिंह को 33,334 वोट मिले।
2002: कांग्रेस ने की वापसी
इसके बाद राज्य में 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस प्रतापपुर सीट पर एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज करने में सफल रही। चुनाव में कांग्रेस के श्याम सूरत उपाध्याय विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जोखू लाल यादव को 1,890 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम सूरत उपाध्याय को 33,207 वोट, जबकि जोखू लाल यादव को 31,317 वोट मिले।
2007: सपा ने की वापसी
वहीं 2007 के चुनाव में प्रतापपुर सीट पर सपा ने जीत हासिल की। चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) के जोखू लाल यादव विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सईद अहमद को 6,757 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जोखू लाल यादव को 41,454 वोट, जबकि सईद अहमद को 34,697 वोट मिले।
2012: सपा ने दोहराई जीत
इस चुनाव में प्रतापपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की विजमा यादव विजयी हुईं। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद मुजतबा सिद्दीकी को 12,808 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विजमा यादव को 62,582 वोट, जबकि मोहम्मद मुजतबा सिद्दीकी को 49,774 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के श्याम सूरत उपाध्याय 24,990 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
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1993 के बाद प्रतापपुर विधानसभा सीट पर बसपा की वापसी
2017 के चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में 1993 के बाद बसपा की वापसी हुई। इस चुनाव में बसपा के प्रत्याशी मोहम्मद मुजतबा सिद्दीकी विजयी हुए। उन्होंने अपना दल (सोनेलाल) के करन सिंह को 2,654 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद मुजतबा सिद्दीकी को 66,805 वोट, जबकि करन सिंह को 64,151 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी की विजमा यादव 51,645 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
2022 के चुनाव में सपा ने मारी बाजी
इस विधानसभा चुनाव में प्रयागराज जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की विजमा यादव विजयी हुईं। उन्होंने अपना दल (सोनेलाल) के राकेश धर त्रिपाठी को 10,956 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विजमा यादव को 91,142 वोट, जबकि राकेश धर त्रिपाठी को 80,186 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के घनश्याम पांडेय 34,912 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।