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सीट का समीकरण: 2017 में भाजपा तो 2022 में सपा ने दर्ज की जीत, ऐसा है सिकंदरपुर विधानसभा का चुनावी इतिहास

Wed, 16 Sep 2026 08:25 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

बलिया की सिकंदरपुर विधानसभा सीट 1962 में अस्तित्व में आई। समय-समय पर इस सीट का समीकरण बदलता रहा है। 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी तो 2017 के चुनाव में यहां से भाजपा को जीत मिली थी।आइये जानते हैं इस सीट का इतिहास...
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सिकंदरपुर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ भाजपा के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, वहीं समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और अन्य दल अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।

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पहले जानते हैं सिकंदरपुर विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बलिया है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, फेफना, बलिया नगर, बांसडीह और बैरिया शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम सिकंदरपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट साल 1962 में परिसीमन के बाद पहली बार अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 1962 में हुआ था। यहां से पहले विधायक जगन्नाथ चौधरी बने थे, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।

सिकंदरपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
सिकंदरपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में क्षत्रिय, मुस्लिम, यादव, राजभर और ब्राह्मण आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। अगर जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो राजपूत मतदाता लगभग 10% हैं। मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 9%, यादव मतदाता लगभग 9% और राजभर मतदाता करीब 9% हैं। वहीं ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी लगभग 5% और भूमिहार मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 4% है, जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य कई समुदायों से आते हैं।  

सिकंदरपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1962: कांग्रेस के दबदबे के साथ शुरुआत
बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1962 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के जगन्नाथ विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के बैजनाथ को 12,764 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगन्नाथ को 23,981 वोट, जबकि बैजनाथ को 11,217 वोट मिले।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1967: निर्दलीय ने जीता चुनाव
इस विधानसभा चुनाव में सिकंदरपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी आर. राम (राजाराम) विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के जे. चौधरी (जगन्नाथ चौधरी) को 3,759 वोटों के अंतर से हराया।

इसके बाद राज्य में 1969 में फिर चुनाव हुए क्योंकि 1967 में बनी राज्य की पहली गैर-कांग्रेसी 'संविद सरकार' विधायकों के दल-बदल और आपसी खींचतान के कारण अल्पमत में आ गई थी। इसके चलते अप्रैल 1968 में विधानसभा भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और 1969 में दोबारा चुनाव कराने पड़े।

1969: चेहरा नया पर विजेता निर्दलीय 
इस चुनाव में बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी निर्भय नारायण सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव मंगल सिंह को 13,026 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में निर्भय नारायण सिंह को 41,295 वोट, जबकि शिव मंगल सिंह को 28,269 वोट मिले।

1974: 1969 में निर्दलीय जीते निर्भय नारायण इस बार कांग्रेस के टिकट जीते
इस चुनाव में कांग्रेस ने सिकंदरपुर सीट पर वापसी की। चुनाव में निर्भय नारायण सिंह उर्फ लाल बाबू विजयी हुए, जिन्हें कुल 31,003 वोट मिले। वहीं निर्दलीय नरेंद्र बहादुर 25,110 वोटों के साथ दूसरे और भारतीय क्रांति दल के कपिलदेव चौधरी 6,835 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1977: पहली बार जीती जनता पार्टी
1977 के चुनाव में जनता पार्टी के शिव मंगल सिंह विजयी हुए, जिन्होंने कुल 38,900 वोट हासिल किए। वहीं कांग्रेस के निर्भय नारायण सिंह 27,758 वोटों के साथ दूसरे और निर्दलीय राम इकबाल त्रिपाठी 2,978 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1980 का चुनाव
इस चुनाव में कांग्रेस (आई) के निर्भय नारायण सिंह विजयी हुए, जिन्हें कुल 30,852 वोट मिले। वहीं जनता पार्टी (एससी) के शिव मंगल सिंह 19,929 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। वहीं निर्दलीय सूरज राय तीसरे नंबर पर रहे, जिन्हें कुल 14,411 वोट मिले। सिंकदरपुर में निर्भय नारायण की ये तीसरी जीत थी। 

1985: पहली बार जीता लोकदल
1985 के चुनाव में सिकंदरपुर सीट पर पहली बार लोकदल ने जीत दर्ज की। चुनाव में लोकदल के शिव मंगल सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के निर्भिक नारायण सिंह को 2,133 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव मंगल को 25,604 वोट मिले, जबकि निर्भिक नारायण सिंह को 23,471 वोट मिले।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1989: जनता पार्टी ने मारी बाजी
इसके बाद राज्य में 1989 के चुनाव हुए। इस चुनाव में जनता पार्टी ने एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के राजधारी विजयी हुए, जिन्हें कुल 26,470 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के निर्भय नारायण सिंह 20,731 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में सिकंदरपुर विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: कांग्रेस ने की वापसी
1991 के यूपी विधानसभा चुनाव में सिकंदरपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के मारकंडेय विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के राजधारी को 10,700 वोटों के अंतर से हराया।

1993: पहली बार जीती सपा
इस चुनाव में सिकंदरपुर विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में दीनानाथ चौधरी विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के राजधारी को 6,949 वोटों के अंतर से हराया।

1996: सोशल एक्शन पार्टी की जीत
1996 के चुनाव में सिकंदरपुर विधानसभा सीट से सोशल एक्शन पार्टी (SAP) ने जीत दर्ज की। चुनाव में  सोशल एक्शन पार्टी  के राजधारी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जियाउद्दीन उर्फ मोहम्मद रिजवी को 13,103 वोटों के अंतर से हराया।

2002: सपा ने की वापसी
1996 के बाद राज्य में 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में सिकंदरपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के जियाउद्दीन रिजवी विजयी हुए। उन्होंने समता पार्टी के राजधारी को 7,363 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जियाउद्दीन रिजवी को 36,907 वोट, जबकि राजधारी को 29,544 वोट मिले। वहीं तीसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के केदार नाथ वर्मा रहे, जिन्हें 22,922 वोट मिले।

2007: पहली बार जीती बसपा
इस विधानसभा चुनाव में बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के श्रीभगवान विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जियाउद्दीन रिजवी को 7,999 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्रीभगवान को 39,773 वोट मिले, जबकि जियाउद्दीन रिजवी को 31,774 वोट मिले। वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राजधारी 30,636 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012 का चुनाव
इस चुनाव में बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव में जियाउद्दीन रिजवी विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के चंद्रभूषण राजभर को 28,531 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जियाउद्दीन रिजवी को 58,266 वोट मिले, जबकि चंद्रभूषण राजभर को 29,735 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के राजधारी 25,453 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2017: पहली बार जीती भाजपा
वहीं 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में संजय यादव विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जियाउद्दीन रिजवी को 23,548 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजय यादव को 69,536 वोट मिले, जबकि जियाउद्दीन रिजवी को 45,988 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के राजनारायण 34,968 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022: सपा ने की वापसी
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बलिया जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव सपा के जियाउद्दीन रिजवी विजयी हुए। यह उनकी तीसरी जीत थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संजय यादव को 11,855 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जियाउद्दीन रिजवी को 75,446 वोट, जबकि संजय यादव को 63,591 वोट मिले। वहीं तीसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के संजीव कुमार वर्मा रहे, जिन्हें 29,604 वोट मिले।
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