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सीट का समीकरण: पिछले चार चुनाव में तीन दल और तीन अलग चेहरे जीते, ऐसा है मोहम्मदाबाद-गोहना का चुनावी इतिहास

Wed, 16 Sep 2026 05:52 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

मऊ जिले की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। तब यहां से दो विधायक चुने गए थे। 1962 से यहां से एक विधायक चुने जा रहे हैं। 2022 में यहां सपा के राजेंद्र कुमार ने भाजपा की पूनम सरोज को हराया। आइये इस सीट का पूरा इतिहास जानते हैं...

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मोहम्मदाबाद-गोहना सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से हर सीट पर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। मऊ जिले की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट भी इससे अछूती नहीं है। यहां चुनावी तैयारियों के साथ-साथ पुराने सियासी समीकरणों और बदलते राजनीतिक मिजाज पर भी नजरें टिकी हैं। ऐसे में आइए जानते हैं मोहम्मदाबाद-गोहना सीट का इतिहास, सामाजिक ताना-बाना और अब तक का सियासी सफर।
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पहले जानते हैं मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला मऊ है। जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें- मधुबन, घोसी, मोहम्मदाबाद-गोहना और मऊ सदर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट की बात करेंगे। 1951-52 में देश के पहले आम चुनाव हुए, तब तक मोहम्मदाबाद-गोहना के नाम से स्वतंत्र विधानसभा सीट नहीं बनी थी। उस समय मऊ अलग जिला नहीं था, बल्कि मोहम्मदाबाद-गोहना आजमगढ़ जिले की एक प्रमुख तहसील और विधानसभा सीट हुआ करती थी। इसे मोहम्मदाबाद-गोहना दक्षिण के नाम से जाना जाता था। 1952 के चुनाव में यहां से पदमाकर निर्वाचित हुए थे।

वहीं, 1957 के चुनाव में मोहम्मदाबाद-गोहना एक द्विसदस्यीय सीट थी। इस चुनाव में मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा क्षेत्र से दो विधायक चुने गए। इनमें एक सीट सामान्य वर्ग के लिए थी, जिस पर कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के चंद्रजीत यादव विजयी हुए, जबकि दूसरी सुरक्षित सीट पर कांग्रेस के श्रीनाथ निर्वाचित हुए। इसके बाद 1962 के विधानसभा चुनाव तक इस क्षेत्र का स्वरूप फिर बदला और मोहम्मदाबाद-गोहना क्षेत्र एकल-सदस्यीय विधानसभा सीट के रूप में सामने आया।

मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में अनुसूचित जाति, यादव, मुस्लिम, चौहान और राजभर आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। अगर जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी अनुसूचित जाति के मतदाताओं की है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 24% हैं। इसके बाद यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% है। मुस्लिम मतदाता लगभग 16%, चौहान मतदाता करीब 8% और राजभर मतदाता लगभग 7% हैं। वहीं पासी और राजपूत मतदाताओं की आबादी लगभग 4-4% है। इसके अलावा वैश्य, मौर्य, ब्राह्मण, भूमिहार, विश्वकर्मा, धोबी, सोनकर, साहू, लोहार, गोंड़, प्रजापति, कायस्थ, चौरसिया, निषाद और गड़ेरी जैसी अन्य जातियां 1% से लेकर 2% तक की हिस्सेदारी रखती हैं, जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य समुदायों से आते हैं।

मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

1962: भाकपा को मिली जीत 
1962 में अपने मूल स्वरूप में आई मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी के चंद्रजीत यादव विजयी हुए थे। चुनाव में उन्हें 15,278 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के उमराव 10,145 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे।

1967: कांग्रेस के नाथ जीते
इस चुनाव में कांग्रेस के एस. नाथ विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के डी. राम को 2,273 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में एस. नाथ को 12,496 वोट, जब कि डी. राम को 10,223 वोट मिले।

1967 के बाद 1969 में फिर से मध्यावधि चुनाव कराए गए। दरअसल, 1967 में बनी राज्य की पहली गैर-कांग्रेसी 'संविद सरकार' विधायकों के दल-बदल और आपसी खींचतान के कारण अल्पमत में आ गई थी। इसके चलते अप्रैल 1968 में विधानसभा भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और 1969 में दोबारा चुनाव कराने पड़े।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1969: पहली बार जीती संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1969 के चुनाव में मऊ जिले की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के श्याम लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के दीपा को 2,185 वोटों के अंतर से हराया।

1974 में भारतीय क्रांति दल ने मारी बाजी
वहीं 1974 के चुनाव में मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से भारतीय क्रांति दल के शिव प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के श्याम लाल को 7,101 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव प्रसाद को 26,599 वोट मिले, जबकि श्याम लाल को 19,498 वोट मिले।

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

शिव प्रसाद दूसरी तो जनता पार्टी पहली बार जीती
1977 के चुनाव में मऊ की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से जनता पार्टी के शिव प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टापेश्वर को 9,990 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव प्रसाद को 30,488 वोट, जबकि टापेश्वर को 20,498 वोट मिले। शिव प्रसाद की ये यहां से लगातार दूसरी जीत थी। 

राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1980: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने की वापसी
इस विधानसभा चुनाव में मऊ जिले की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के टापेश्वर विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस (आई) के श्री नाथ को 6,159 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में टापेश्वर को 18,989 वोट मिले, जबकि श्री नाथ को 12,830 वोट मिले।

1985: कांग्रेस की हुई वापसी
1980 के बाद राज्य में 1985 के चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस के राम बदन विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी छोटे लाल को 6,656 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम बदन को 17,615 वोट मिले, जबकि छोटे लाल को 10,959 वोट मिले।

1989: पहली बार जीती बसपा
इस चुनाव में पहली बार इस सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के फौजदार विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के श्याम लाल को 2,171 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में फौजदार को 26,573 वोट मिले, जबकि श्याम लाल को 24,402 वोट मिले।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: पहली बार जीती भाजपा
इस चुनाव में मऊ की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट पर पहली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के श्रीराम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के रामदेव को 4,452 वोटों के अंतर से हराया।

1993: बसपा की हुई वापसी
इसके बाद 1993 के चुनाव में मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के फौजदार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के श्री राम को 22,001 वोटों के अंतर से हराया।

1996: भाजपा ने फिर जीती चुनाव
वहीं 1996 के चुनाव में मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के श्रीराम विजयी हुए। इस बार उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के बनवारी को 2,845 वोटों के अंतर से हराया।

2002: मोहम्मदाबाद-गोहना सीट पर पहली बार जीती सपा
1996 के बाद राज्य में 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के बैजनाथ विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के बनवारी को 929 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बैजनाथ को 52,447 वोट, जबकि बनवारी को 51,518 वोट मिले।

2007 में बसपा ने मारी बाजी
2007 के चुनाव की बात करें तो मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट पर बसपा ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राजेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के बनवारी को 3,562 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजेंद्र कुमार को 42,949 वोट, जबकि बनवारी को 39,387 वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा के श्रीराम 20,152 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012 में सपा ने की वापसी
2012 के चुनाव की बात करें तो मोहम्मदाबाद-गोहना से समाजवादी पार्टी के बैजनाथ विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के राजेंद्र को 3,139 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बैजनाथ को 52,691 वोट मिले, जबकि राजेंद्र को 49,552 वोट मिले। वहीं भाजपा के श्रीराम 28,635 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

2017: भाजपा ने जीता चुनाव
2017 के चुनाव में मऊ जिले की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के श्रीराम सोनकर विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के राजेंद्र कुमार को 538 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्रीराम सोनकर को 73,493 वोट, जबकि राजेंद्र कुमार को 72,955 वोट मिले। वहीं सपा के बैजनाथ 59,871 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

2022: सपा ने फिर की वापसी
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मऊ जिले की मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के राजेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की पूनम सरोज को 26,649 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजेंद्र कुमार को 94,688 वोट मिले, जबकि पूनम सरोज को 68,039 वोट मिले। वहीं बसपा के धरम सिंह गौतम 56,350 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
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