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सीट का समीकरण: यहां पिता-पुत्र का दबदबा; पिछले 10 में से आठ चुनाव में जीता परिवार, ऐसा है अतरौलिया का इतिहास

Wed, 30 Sep 2026 08:01 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट 1957 के चुनाव में अस्तित्व में आई। यहां से सपा के कद्दावर नेता रहे बलराम यादव पांच बार तो उनके बेटे संग्राम यादव तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। भाजपा को यहां अब तक जीत नहीं मिली है। वहीं, कांग्रेस आखिरी बार 1980 में जीती थी। बसपा को अतरौलिया मे 1996 और 2007  में सफलता मिली।
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अतरौलिया सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात आजमगढ़ जिले की अतरौलिया विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
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पहले जानते हैं अतरौलिया विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें 403 विधानसभा सीटें आती हैं। इन्हीं में से एक जिला आजमगढ़ है। जिले में कुल दस विधानसभा सीटें हैं। इनमें- अतरौलिया, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़, निजामाबाद, फूलपुर-पवई, दीदारगंज, लालगंज और मेहनगर शामिल हैं।

'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम अतरौलिया विधानसभा सीट की बात करेंगे। अतरौलिया विधानसभा सीट 1956 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और इस सीट पर पहली बार 1957 में विधानसभा चुनाव कराए गए थे। इस सीट के पहले विधायक पद्माकर बने थे, जिन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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अतरौलिया विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
अतरौलिया विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में यादव, दलित और ब्राह्मण आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी यादव मतदाताओं की है, जो लगभग 19% हैं। इसके बाद दलित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 15% और ब्राह्मण मतदाताओं की करीब 13% है। अन्य प्रमुख वर्गों में क्षत्रिय मतदाता लगभग 11%, निषाद मतदाता करीब 10%, मुस्लिम लगभग 9% और वैश्य मतदाता करीब 7% हैं। इसके अलावा भूमिहार और चौहान मतदाता करीब 3-3% हैं। वहीं, बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।  

अतरौलिया विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957: पहले चुनाव में जीती प्रजा सोशलिस्ट पार्टी

अतरौलिया विधानसभा के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में इस सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के पद्माकर विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बृज बिहारी को 4,245 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में पद्माकर को 17,032 वोट, जबकि बृज बिहारी को 12,787 वोट मिले।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1962: पहली बार जीती कांग्रेस
इस चुनाव में अतरौलिया विधानसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के बृज बिहारी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के सभाजीत को 7,161 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बृज बिहारी को 15,638 वोट, जबकि सभाजीत को 8,477 वोट मिले।

1967: संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने जीती चुनाव
इस चुनाव में अतरौलिया विधानसभा सीट पर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के मार्कंडेय विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के जे. बहादुर को 2,539 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मार्कंडेय को 15,245 वोट, जबकि जे. बहादुर को 12,706 वोट मिले।

कांग्रेस ने वापसी करते हुए लगाई जीत की हैट्रिक
इसके बाद राज्य में 1969, 1974 और 1977 के चुनाव हुए। इन तीनों चुनावों में अतरौलिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। इस दौरान वर्ष 1969 और 1974 के चुनाव में कांग्रेस के जंग बहादुर ने जीत हासिल की। उन्होंने क्रमशः संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के मार्कंडेय को 5,522 वोटों और भारतीय क्रांति दल की भगवती को 744 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1977 के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी दुर्ग विजय विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के जंग बहादुर को 2,541 वोटों से हराया।  1980 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से कांग्रेस को जीत मिली। इस बार कांग्रेस के शंभूनाथ जीतने में सफल रहे। 

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1985: बलराम यादव के दबदबे की हुई शुरुआत
इसके बाद राज्य में 1985, 1989, 1991 और 1993 के चुनाव हुए। इन चुनावों में बलराम यादव का दबदबा रहा और उन्होंने चारों चुनावों में जीत दर्ज की। इस दौरान उन्होंने पार्टियां भी बदलीं, लेकिन चुनावी नतीजा नहीं बदला।

1985 के चुनाव में बलराम यादव ने लोक दल के टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस के दुर्ग विजय सिंह को 9,789 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रवींद्र नाथ त्रिपाठी तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद 1989 के चुनाव हुए, जिनमें उन्होंने जनता दल के टिकट पर जीत हासिल की और बसपा के रमाकांत वर्मा को 19,198 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, 1991 के चुनाव में बलराम यादव ने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और भाजपा के कृष्ण कांत चतुर्वेदी को 16,747 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में बसपा के रमाकांत वर्मा तीसरे स्थान पर रहे।

1993: अतरौलिया सीट पर पहली बार जीती समाजवादी पार्टी 
इस चुनाव में अतरौलिया सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा की तरफ से लड़ते हुए बलराम यादव ने जीत दर्ज की। यह उनकी लगातार चौथी जीत थी। चुनाव में उन्होंने भाजपा के इंद्र सेन उर्फ श्याम बहादुर को 27,987 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में जनता दल के विभूति प्रसाद निषाद तीसरे स्थान पर रहे।

1996: पहली बार जीती बसपा
1996 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया विधानसभा सीट पर पहली बार बसपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में विभूति प्रसाद निषाद विजयी हुए। उन्होंने सपा के बलराम यादव को 9,674 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विभूति प्रसाद निषाद को 59,388 वोट, जबकि बलराम यादव को 49,714 वोट मिले। वहीं, भाजपा के इंद्रसेन उर्फ श्याम बहादुर 20,474 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2002: बलराम यादव ने की वापसी
1996 के बाद 2002 के चुनाव हुए। इन चुनावों में अतरौलिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के बलराम यादव ने एक बार फिर जीत हासिल की। इस बार उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के विजय प्रकाश सिंह को 22,056 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में बलराम यादव को 51,665 वोट, जबकि विजय प्रकाश सिंह को 29,609 वोट मिले। वहीं, भाजपा के बिक्रम बहादुर सिंह 27,332 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2007: बहुजन समाज पार्टी ने की वापसी
2002 के बाद 2007 में इस सीट पर एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी की वापसी हुई। इस बार के चुनाव में बसपा के सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने सपा के बलराम यादव को 3,196 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा को 66,413 वोट, जबकि बलराम यादव को 63,217 वोट मिले। वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राम प्रसाद 4,447 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2007 के चुनाव के बाद राज्य में 2012, 2017 और 2022 के चुनाव हुए। इन चुनावों में अतरौलिया विधानसभा सीट पर सपा (समाजवादी पार्टी) का कब्जा रहा। इन तीनों चुनावों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. संग्राम यादव ने लगातार तीन बार जीत हासिल की। बता दें कि डॉ. संग्राम यादव इस सीट से पांच बार विधायक और यूपी सरकार में मंत्री रहे बलराम यादव के पुत्र हैं।

2012 का चुनाव
इस चुनाव में पिता बलराम यादव कि विरासत को आगे बढ़ते हुए डॉ. संग्राम यादव ने सपा के टिकट पर चुनाव में जीत दर्ज की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा को 43,620 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में डॉ. संग्राम यादव को 97,486 वोट, जबकि सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा को 53,866 वोट मिले थे। वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राजेश यादव 8,926 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2017 का चुनाव
इस चुनाव में डॉ. संग्राम यादव ने भारतीय जनता पार्टी के कन्हैया लाल निषाद को 2,467 वोटों के अंतर से हराया। यह उनकी लगातार दूसरी जीत थी. चुनाव में संग्राम यादव को 74,276 वोट, जबकि कन्हैया लाल निषाद को 71,809 वोट मिले थे। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अखंड प्रताप सिंह 56,536 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022 का चुनाव
इस चुनाव में आजमगढ़ जिले की अतरौलिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के डॉ. संग्राम यादव ने सपा के टिकट पर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने निषाद पार्टी के प्रशांत सिंह को 17,247 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में डॉ. संग्राम यादव को 91,502 वोट, जबकि प्रशांत सिंह को 74,255 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के सरोज कुमार 51,293 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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