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सीट का समीकरण: रामपुर में 1980 से आजम का दबदबा, विधायकी जाने के बाद भाजपा ने लगाई सेंध, ऐसा है यहां का इतिहास

Tue, 03 Nov 2026 07:23 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

  • उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की रामपुर विधानसभा सीट पर 1952 में पहला चुनाव हुआ था।
  • यहां से स्वतंत्र पार्टी, कांग्रेस, जनता दल, जनता पार्टी, सपा और भाजपा ने अलग-अलग वक्त पर जीत दर्ज की है।
  • अभी इस सीट पर भाजपा के आकाश सक्सेना विधायक हैं। आइये जानते हैं इस सीट सियासी इतिहास...
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रामपुर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में रामपुर विधानसभा सीट की पहचान लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के राजनीतिक प्रभाव से रही है। 1980 के बाद रामपुर की राजनीति में आजम खां का नाम लगातार प्रमुखता से उभरा। आजम ने 1980 में पहली बार रामपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1985, 1989, 1991 और 1993 में भी वह लगातार विधायक चुने गए। 1996 में उन्हें कांग्रेस के अफरोज अली खान से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2002 में उन्होंने फिर वापसी की। इसके बाद 2007, 2012 और 2017 में भी आजम खां ने जीत हासिल की। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की, लेकिन उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना ने सीट पर कब्जा कर लिया था। आइये जानते हैं इस सीट का पूरा चुनावी इतिहास...
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पहले जानते हैं रामपुर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं और यहां विधानसभा की 403 सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला रामपुर है। रामपुर जिला अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है। जिले में रामपुर, स्वार, चमरौआ, बिलासपुर और मिल विधानसभा सीटें हैं। रामपुर सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है। पुराने चुनावी रिकॉर्ड में इस सीट का नाम और क्रमांक अलग-अलग रूप में दर्ज मिलता है। 1951 के चुनाव में यह रामपुर सिटी के नाम से दर्ज थी, जबकि 1957 में रामपुर नाम से चुनाव हुआ। 1962 में इसे फिर रामपुर सिटी के नाम से दर्ज किया गया। बाद के चुनावों में यह रामपुर विधानसभा सीट के रूप में दर्ज होती रही।
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रामपुर की राजनीति में नवाब परिवार का भी ऐतिहासिक प्रभाव रहा है। आजादी से पहले यहां रामपुर रियासत थी। आजादी के बाद लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए यहां की राजनीति आगे बढ़ी। शुरुआती चुनावों में कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों को सफलता मिली, लेकिन बाद के दशकों में कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों ने भी अपनी राजनीतिक जमीन बनाई।

रामपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, वैश्य और लोधी आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद वैश्य और लोधी मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 9-9% है।

अन्य प्रमुख वर्गों में एससी मतदाता लगभग 4% और यादव मतदाता करीब 3% हैं। इसके अलावा बाकी बचे लगभग मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम, वैश्य और लोधी मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं, क्योंकि क्षेत्र में इनकी संयुक्त आबादी अधिक है।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
रामपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

1951: कांग्रेस ने दर्ज की पहली जीत
रामपुर विधानसभा सीट के शुरुआती चुनावी में 1951 का चुनाव रामपुर सिटी के नाम से हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के फजल-उल-हक विजयी हुए। उन्होंने हिंदू महासभा के भुकन सरन को 13,996 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में फजल-उल-हक को 18,570 वोट मिले, जबकि भुकन सरन को 4,574 वोट प्राप्त हुए। इस तरह रामपुर के शुरुआती चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

1957: निर्दलीय उम्मीदवार ने कांग्रेस को हराया
1957 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार असलम खान विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के फजल हक खान को 4,826 वोटों के अंतर से हराया। असलम खान को 17,241 वोट मिले, जबकि फजल हक खान को 12,415 वोट प्राप्त हुए। भारतीय जनसंघ के सीता राम 2,263 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1962: कांग्रेस की वापसी
1962 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सिटी सीट पर कांग्रेस ने फिर जीत हासिल की। इस चुनाव में किश्वर आरा बेगम विजयी हुईं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार फजलुल हक को 21,523 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में किश्वर आरा बेगम को 25,314 वोट मिले, जबकि फजलुल हक को 3,791 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस ने एक बार फिर सीट पर अपना कब्जा जमा लिया।

1967: स्वतंत्र पार्टी ने दर्ज की जीत
1967 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर स्वतंत्र पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में ए. ए. खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के आर. कुमार को 33,419 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में ए. ए. खान को 46,089 वोट मिले, जबकि आर. कुमार को 12,670 वोट प्राप्त हुए। वहीं कांग्रेस की के. ए. बेगम 5,396 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

1969: कांग्रेस ने फिर हासिल की सीट
1969 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। इस चुनाव में सैयद मुर्तजा अली खान विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार रफत जमानी बेगम को 1,816 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सैयद मुर्तजा अली खान को 29,947 वोट मिले, जबकि रफत जमानी बेगम को 28,131 वोट प्राप्त हुए। वहीं भारतीय जनसंघ के रमेश नारायण गुप्ता 4,917 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1974: कांग्रेस ने बरकरार रखी सीट
1974 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मंजूर अली खान उर्फ शानू खान विजयी हुए। उन्होंने मुस्लिम लीग के हिमायत उल्लाह खान को 3,466 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मंजूर अली खान को 18,467 वोट मिले, जबकि हिमायत उल्लाह खान को 15,001 वोट प्राप्त हुए। 

आपातकाल के बाद 1977 में भी कांग्रेस की जीत
1974 के चुनाव के बाद जून 1975 में देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो मार्च 1977 तक चला। आपातकाल हटने के बाद लोकसभा चुनाव हुए, जिनमें कांग्रेस को बड़ा झटका लगा और जनता पार्टी की सरकार बनी। इसके बाद उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव कराए गए।

हालांकि, रामपुर विधानसभा सीट पर इस चुनाव में कांग्रेस ने अपनी जीत बरकरार रखी। चुनाव में कांग्रेस के मंजूर अली खान उर्फ शन्नू खान विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के मोहम्मद आजम खां को 8,353 वोटों के अंतर से हराया। मंजूर अली खान को 35,989 वोट मिले, जबकि मोहम्मद आजम खां को 27,636 वोट प्राप्त हुए।

यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसी में आजम खां पहली बार रामपुर सीट से विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

1980: आजम खां ने पहली बार दर्ज की जीत
1980 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। इस चुनाव में जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर मोहम्मद आजम खां विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार मंजूर अली खान को 1,128 वोटों के मामूली अंतर से हराया। चुनाव में आजम खां को 17,815 वोट मिले, जबकि मंजूर अली खान को 16,687 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ आजम खां ने पहली बार रामपुर विधानसभा सीट से विधायक बनने का सफर शुरू किया। आगे चलकर वह इस सीट की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हुए।

1985: आजम खां ने दोहराई जीत
1985 के विधानसभा चुनाव में आजम खां ने एक बार फिर रामपुर सीट पर जीत दर्ज की। इस बार वह लोकदल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे। उन्होंने कांग्रेस के अफरोज अली खान को 17,013 वोटों के अंतर से हराया। आजम खां को 33,380 वोट मिले, जबकि अफरोज अली खान को 16,367 वोट प्राप्त हुए।

1989: जनता दल के टिकट पर आजम खां की जीत
इस चुनाव में आजम खां ने जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के अफरोज अली खान को 2,946 वोटों के अंतर से हराया। आजम खां को 44,512 वोट मिले, जबकि अफरोज अली खान को 41,566 वोट प्राप्त हुए।

इस चुनाव में आजम खां ने लगातार तीसरी बार रामपुर सीट पर जीत हासिल की। यह दौर उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के कमजोर होने और क्षेत्रीय दलों के उभार का भी था।

1991: आजम खां ने लगातार चौथी बार जीता चुनाव
1991 के विधानसभा चुनाव में भी रामपुर सीट पर आजम खां विजयी हुए। इस बार उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जोगेश चंद्र अरोड़ा को 2,634 वोटों के अंतर से हराया। आजम खां को 27,318 वोट मिले, जबकि जोगेश चंद्र अरोड़ा को 24,684 वोट प्राप्त हुए।

1993: समाजवादी पार्टी के टिकट पर आजम खां की पहली जीत
1993 के विधानसभा चुनाव में आजम खां समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे। इस चुनाव में उन्होंने बेहद करीबी मुकाबले में जनता दल के अफरोज अली खान को हराया। आजम खां को 40,324 वोट मिले, जबकि अफरोज अली खान को 39,724 वोट प्राप्त हुए। इस तरह जीत का अंतर महज 600 वोट रहा। इस चुनाव के साथ आजम खां ने लगातार पांचवीं बार रामपुर सीट पर जीत दर्ज की। 

1996: कांग्रेस ने आजम खां को हराया
1996 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर आजम खां की जीत का सिलसिला टूट गया। इस चुनाव में कांग्रेस के अफरोज अली खान विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के आजम खां को 13,906 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अफरोज अली खान को 69,184 वोट मिले, जबकि आजम खां को 55,278 वोट प्राप्त हुए। इस नतीजे के साथ रामपुर सीट पर कांग्रेस ने वापसी की और आजम खां को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

2002: आजम खां ने फिर की वापसी
2002 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के आजम खां ने रामपुर सीट पर फिर जीत हासिल की। इस बार उन्होंने कांग्रेस के अफरोज अली खान को 37,991 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। चुनाव में आजम खां को 73,920 वोट मिले, जबकि अफरोज अली खान को 35,929 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ आजम खां ने रामपुर सीट पर एक बार फिर अपना राजनीतिक प्रभाव साबित किया।

2007: आजम खां ने लगातार दूसरी बार दर्ज की जीत
2007 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर समाजवादी पार्टी के आजम खां विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अफरोज अली खान को 33,372 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आजम खां को 53,091 वोट मिले, जबकि अफरोज अली खान को 19,719 वोट प्राप्त हुए। वहीं भाजपा के अनिल कुमार वशिष्ठ भइये 15,260 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2012: आजम खां ने बड़ी जीत दर्ज की
2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के आजम खां ने एक बार फिर रामपुर सीट पर जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के डॉ. तनवीर अहमद खान को 63,269 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में आजम खां को 95,772 वोट मिले, जबकि डॉ. तनवीर अहमद खान को 32,503 वोट प्राप्त हुए। इस चुनाव में आजम खां की जीत का अंतर रामपुर सीट के अब तक के बड़े चुनावी अंतरों में शामिल रहा।  

2017: आजम खां ने लगातार चौथी बार जीत हासिल की
2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के आजम खां ने रामपुर सीट पर फिर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के शिव बहादुर सक्सेना को 46,842 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आजम खां को 1,02,100 वोट मिले, जबकि शिव बहादुर सक्सेना को 55,258 वोट मिले। वहीं बहुजन समाज पार्टी के डॉ. तनवीर अहमद खान 54,248 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

इस जीत के साथ आजम खां ने 2002, 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में लगातार चार बार जीत दर्ज की। 1980 से लेकर 2017 के बीच वे रामपुर सीट से नौ बार विधायक चुने गए। 
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2019 के उपचुनाव में आजम खां की पत्नी तजीन फातिमा जीतीं
2019 के लोकसभा चुनाव में आजम खां रामपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण रामपुर विधानसभा सीट खाली हो गई। इस सीट पर अक्टूबर 2019 में उपचुनाव कराया गया। उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फातिमा को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भाजपा के भारत भूषण को 7,716 वोटों के अंतर से हराया। तजीन फातिमा को 79,043 वोट मिले, जबकि भारत भूषण को 71,327 वोट प्राप्त हुए।  इस जीत के साथ समाजवादी पार्टी ने रामपुर विधानसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।
 
2022: आजम खां ने दसवीं बार दर्ज की जीत
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर समाजवादी पार्टी के आजम खां ने एक बार फिर जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के आकाश सक्सेना को 55,141 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आजम खां को 1,31,225 वोट मिले, जबकि आकाश सक्सेना को 76,084 वोट प्राप्त हुए। बहुजन समाज पार्टी के सदाकत हुसैन 4,940 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस जीत के साथ आजम खां ने रामपुर विधानसभा सीट से दसवीं बार जीत दर्ज की। हालांकि, बाद में एक मामले में सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई और सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा।

2022 के उपचुनाव में पहली बार भाजपा ने रामपुर सीट जीती
आजम खां की सदस्यता रद्द होने के बाद दिसंबर 2022 में रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया। इस चुनाव में भाजपा ने आकाश सक्सेना को उम्मीदवार बनाया, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से मोहम्मद आसिम रजा मैदान में उतरे। उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मोहम्मद आसिम रजा को 34,136 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आकाश सक्सेना को 81,432 वोट मिले, जबकि आसिम रजा को 47,296 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ भाजपा ने पहली बार रामपुर विधानसभा सीट पर कब्जा किया। लंबे समय तक आजम खां के राजनीतिक प्रभाव वाली इस सीट पर भाजपा की जीत को एक बड़े राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा गया। 
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