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नतीजों के निहितार्थ: महिला केंद्रित योजनाओं, संघ से समन्वय और स्थानीय मुद्दों को तरजीह से चमत्कार

Sun, 24 Nov 2024 05:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

Maharashtra And Jharkhand Assembly Election 2024 Result: महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधनों की आंधी चली। महाराष्ट्र में महायुति ने राजनीति की नई कहानी रच दी। भगवा आंधी में भाजपा, शिवसेना, एनसीपी (अजीत) ने 80% सीटें जीत लीं, तो झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने करीब 70% सीटों पर कब्जा जमा लिया। दोनों ही राज्यों में लोकसभा चुनाव के उलट नतीजे आए। झारखंड में लोकसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक सीटें मिली थीं, जबकि महाराष्ट्र में भाजपा और उसके सहयोगियों को करारा झटका लगा था। नतीजों ने सबक दिया कि केंद्र और राज्य की राजनीति अलग-अलग होती है।
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जीत के बाद पीएम मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव में लगे झटके से उबरते हुए भाजपा ने हरियाणा के बाद अब महाराष्ट्र में भी जोरदार वापसी के साथ चमत्कार कर दिया है। आरएसएस से समन्वय बेहतर करने के साथ ही आधी आबादी को साधने के लिए लाडकी बहिन जैसी महिला केंद्रित योजना शुरू करने और स्थानीय मुद्दों व नेतृत्व को तरजीह देकर हारी बाजी पलट दी। हालांकि, सशक्त स्थानीय नेतृत्व और मुद्दे के अभाव में रणनीति के बावजूद झारखंड में उसकी नैया पार नहीं लगी।

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भाजपा ने महाराष्ट्र में हताश कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए फिर संघ का सहारा लिया। इससे कार्यकर्ता जमीन पर उतरे और मराठा समुदाय व ओबीसी से बढ़ी दूरी कम हुई। इसके अलावा, नए वोट बैंक के रूप में उभरी आधी आबादी को साधने के लिए महायुति सरकार ने माझी लाडकी बहिन योजना शुरू की।

नतीजे बताते हैं कि भाजपा की इस रणनीति की काट महाविकास आघाड़ी नहीं खोज पाया। वह लोकसभा की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को भुनाने में पूरी तरह नाकाम रहा। रही-सही कसर शिंदे सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं के सकारात्मक असर ने पूरी कर दी। सबसे अहम बात यह रही कि हरियाणा की तर्ज पर भाजपा ने चुनाव को केंद्रीय मुद्दों पर केंद्रित नहीं होने दिया।
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संघ से समन्वय का फायदा
लोकसभा चुनाव के बाद संघ से रिश्ते बेहतर करने का भाजपा को फायदा मिला। महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार में संघ के जुटने के कारण राज्य में लोकसभा के मुकाबले 4 फीसदी अधिक मतदान हुआ। रणनीतिकारों का मानना है कि बढ़ा मतप्रतिशत भाजपा समर्थकों का था। इसी बढ़े मतप्रतिशत ने महायुति और एमवीए के प्रदर्शन में बड़ा अंतर पैदा किया।

नतीजे से भाजपा को क्या मिला : संविधान व आरक्षण खत्म करने की विपक्ष की बनाई धारणा हुई कमजोर

  • लोकसभा चुनाव के बाद चार राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। भाजपा हरियाणा व महाराष्ट्र में सत्ता बरकरार रखने में सफल रही। जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन बेहतर हुआ। इन नतीजों ने आम चुनाव के बाद बनी ब्रांड मोदी और भाजपा के कमजोर होने की धारणा को तोड़ दिया है।
  • विपक्ष की संविधान व आरक्षण खत्म करने की बनाई धारणा भी कमजोर हुई। हरियाणा-महाराष्ट्र के बाद मोदी सरकार पर सहयोगी दलों का दबाव कम होगा। बिहार में पार्टी जदयू के साथ मोलभाव की स्थिति में होगी। दिल्ली चुनाव में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा।

वहीं, झारखंड में स्थानीय कद्दावर नेता की कमी पार्टी की रणनीति पर भारी पड़ गई। आदिवासी वोट बैंक में सेंध के लिए पार्टी ने जमीन जिहाद, लव जिहाद व वोट जिहाद को मुद्दा बनाया, पर आदिवासियों को रास नहीं आया। वहीं, झामुमो धारणा बनाने में सफल रहा कि भाजपा के आने से राज्य आदिवासी नेतृत्व विहीन हो जाएगा। भाजपा आदिवासी-मुस्लिम एकजुटता की काट भी नहीं ढूंढ पाई। 

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