आम चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र इस बार बिल्कुल अलग होगा। स्थापना के बाद पहली बार होगा, जब पार्टी के घोषणापत्र में राम मंदिर का निर्माण और अनुच्छेद-370 का खात्मा वादों की सूची में नहीं, मोदी सरकार की सर्वोच्च उपलब्धियों की सूची में होगा। हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की आंच को तेज करने के लिए पार्टी तीसरी बार सत्ता में आने पर देशभर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की गारंटी देगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित भाजपा की 27 सदस्यीय घोषणापत्र समिति ने इसे तैयार करने को लेकर विमर्श शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार का घोषणापत्र मुख्य रूप से गरीब, युवा, महिला और किसान केंद्रित होगा, जिसे पीएम मोदी ने देश की असली जाति बताई थी। इसके अलावा घोषणापत्र में मोदी की गारंटी और विकसित भारत 2047 संकल्प के रूप में दो थीम होंगी। घोषणापत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बताई गई चार जातियों के लिए दृष्टिपत्र पेश किया जाएगा, जिसमें मोदी सरकार के दस साल के कार्यकाल के दौरान नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों के माध्यम से इन वर्गों में आए बदलावों का जिक्र होगा। साथ ही पार्टी इन वर्गों के लिए भविष्य में किए जाने वाले वादों का जिक्र करेगी। युवाओं-महिलाओं के लिए रोजगार-स्वरोजगार के लिए कई अहम घोषणाएं की जाएंगी।
युवाओं को लुभाने की तैयारी
यूसीसी-एनआरसी पर स्पष्ट संदेश
पार्टी की योजना घोषणापत्र के जरिये हिंदुत्व और राष्ट्रवाद समर्थक मतदाताओं को साधने की है। इसके मद्देनजर पार्टी मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में यूसीसी और एनआरसी लागू करने की गारंटी देगी। इसी क्रम में पार्टी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से जुड़े मामले को सुलझाए जाने का जिक्र करते हुए राममंदिर निर्माण, अनुच्छेद-370 की समाप्ति, तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने और नागरिकता संशोधन कानून लागू करने का जिक्र करेगी।
राममंदिर और अनुच्छेद-370 का वादा पार्टी ने किया पूरा
बस एक बार इस मुद्दे से किया किनारा
राममंदिर, अनुच्छेद-370 और यूसीसी भाजपा-जनसंघ का सबसे पुराना और मूल एजेंडा रहा है। अपनी स्थापना के बाद महज एक बार भाजपा ने 1999 के चुनाव में इन मुद्दों का जिक्र अपने घोषणापत्र में नहीं किया था। तब वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए एक एजेंडे के साथ चुनाव मैदान में था। हालांकि, उस चुनाव में 182 सीटें जीत कर भाजपा ने एनडीए की अगुवाई में अपनी सत्ता बरकरार रखी थी। 2004 के चुनाव में भाजपा ने अपने सबसे पुराने तीनों अहम मुद्दों के प्रति एक बार फिर से प्रतिबद्धता जाहिर की थी।