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Election: सूरत से मुकेश दलाल की निर्विरोध जीत के बाद तिलमिलाई कांग्रेस, नीलेश कुंभानी छह साल के लिए निलंबित

Fri, 26 Apr 2024 06:25 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

Election: कांग्रेस ने सूरत लोकसभा से उम्मीदवार नीलेश कुंभानी को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। इससे पहले इस सीट से भाजपा के मुकेश दलाल निर्विरोध चुने गए थे। एक तरफ कुंभानी का निलंबन कांग्रेस का गुस्सा दिखाता है तो दूसरी तरफ कुंभानी ने आरोप लगाया है कि पार्टी ने चुनाव में उनकी मदद नहीं की।

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नीलेश कुंभानी - फोटो : ANI
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विस्तार
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गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार मुकेश दलाल के निर्विरोध चुने जाने के बाद कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने सूरत लोकसभा उम्मीदवार नीलेश कुंभानी को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। बता दें कि नीलेश कुंभानी का नामांकन फॉर्म कुछ खामियों की वजह से खारिज कर दिया गया था। इस वजह से भाजपा के मुकेश दलाल निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।

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नीलेश कुंभानी छह साल के लिए निलंबित
कांग्रेस की तरफ से जारी बयान के अनुसार पार्टी की अनुशासनात्मक समिति द्वारा कुंभानी को लंबी चर्चा के बाद निलंबित करने कै फैसला लिया गया है। बैठक के बाद यह निष्कर्ष निकला कि कुंभानी का नामांकन फॉर्म उनकी ओर से की गई घोर लापरवाही या भाजपा के साथ मिलीभगत के कारण खारिज किया गया। 

कुंभानी की हरकत से नाराज हैं कार्यकर्ता- कांग्रेस
कांग्रेस अनुशासनात्मक समिति द्वारा जारी विज्ञप्ति मे कहा गया है कुंभानी को अपना मामला समझाने के लिए समय दिया गया था लेकिन अनुशासन समिति के सामने आने के बजाय वे संपर्क में ही नहीं आए। आगे कहा गया कि कुंभानी का नामांकन खारिज होने के बाद भारतीय जनता पार्टी बाकी आठ उम्मीदवारों के फॉर्म भी वापस ले लिए। इस तरह से सूरत के लोगों को उनके मतदान के अधिकार से दूर रखा गया।  आगे कहा गया है कि सूरत के लोग और पार्टी के कार्यकर्ता कुंभानी की इस हरकत से काफी नाराज हैं और अलग अलग तरीके से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इसलिए नीलेश कुंभानी को छह साल के लिए निलंबित कने का फैसला लिया गया है। 
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कांग्रेस नेतृत्व पर मदद नहीं करने का आरोप
निलंबन की कार्रवाई के बाद कुंभानी ने शुक्रवार को दावा किया कि कांग्रेस पार्टी में उनके सहयोगियों ने प्रचार के दौरान मदद नहीं की। एक वीडियो संदेश में कुंभानी ने कहा कि उन्हें अतीत में भाजपा से प्रस्ताव मिले थे, लेकिन इतने वर्षों तक कांग्रेस के साथ रहने का फैसला लिया। चुनाव हारने के बावजूद वराछा क्षेत्र में अपना कार्यालय बंद नहीं किया। उन्होंने कहा, जब वे नामांकन फॉर्म खारिज होने के संबंध में उच्च न्यायालय में अपील करने अहमदाबाद आ रहे थे, तो कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सूरत में उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।

प्रचार में सहयोग नहीं, बूथ पर जाने वाले कार्यकर्ताओं की सूची भी नहीं मिली
बकौल कुंभानी चुनावी रैलियों और डोर-टू-डोर अभियान के दौरान कांग्रेस नेता नदारद रहते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन कार्यकर्ताओं की सूची भी नहीं दी, जिन्हें चुनाव के दौरान बूथ पर ड्यूटी दी जानी थी। कुंभानी ने कहा, 'जो लोग आज मेरे खिलाफ बोल रहे हैं, वे वास्तव में भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और मुझे अपने हाल पर छोड़ दिया है।' उन्होंने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर भी मैंने कांग्रेस नहीं छोड़ी। ऐसे में पार्टी के खिलाफ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

21 अप्रैल को खारिज किया गया था नामांकन फॉर्म
कुंभानी का नामांकन फॉर्म 21 अप्रैल को खारिज कर दिया गया। दावा किया गया था कि दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे। इसी आधार पर कांग्रेस के पास विकल्प के रूप में मौजूद सुरेश पादसाला का नामांकन पत्र भी खारिज कर दिया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर सौरभ पार्धी ने अपने आदेश में कहा है कि कुंभानी और पादसाला की तरफ से तीन नामांकन फॉर्म जमा किए गए थे। शुरुआती जांच में पाया गया कि प्रस्तावकों के हस्ताक्षर वास्तविक प्रतीत नहीं हुए। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मुकेश दलाल को सूरत लोकसभा सीट से 22 अप्रैल को निर्विरोध चुना गया था, क्योंकि अन्य सभी उम्मीदवार नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन एक-एक करके मैदान से हट गए थे।

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