भारत में पहले आम चुनाव के समय दुनिया में तीन राजनीतिक हत्याएं हुई थीं। जॉर्डन के बादशाह, ईरान के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की। दुर्गा दास की किताब फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर के अनुसार, नेहरू को ठीक नहीं लगा कि वह उस जहाज में चुनाव प्रचार करें, जिसे वह बतौर प्रधानमंत्री इस्तेमाल करते थे। तब ऑडिटर जनरल ने एक तरीका सुझाया। पीएम की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न किया जाए। प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है, इसलिए सरकार को हवाई जहाज का खर्च वहन करना चाहिए। तब नियम बनाया गया कि नेहरू एक व्यक्ति को जहाज से ले जाने का किराया सरकार को अदा करेंगे। साथ चलने वाले सुरक्षाकर्मियों का किराया सरकार देगी और अगर उनकी पार्टी का कोई सदस्य उनके साथ जहाज में है, तो वह अपना किराया खुद वहन करेगा। इस तरह नेहरू ने हवाई यात्रा में होने वाले खर्चे का बहुत थोड़ा हिस्सा ही सरकार को अदा किया।