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LS Polls 2024: एशिया के बड़े आईटी हब में हार-जीत तय करेंगे राजपूत वंश से निकले 'मेव', विचित्र हैं जातीय समीकरण

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 23 May 2024 07:55 PM IST

सार

इस लोकसभा क्षेत्र में तीन जिले, गुरुग्राम, नूंह और रेवाड़ी आते हैं। नूंह और उसके आसपास का क्षेत्र, जिसे 'मेवात' कहा जाता है, उसकी कहानी अलग है। नीति आयोग की रिपोर्ट में मेव मुस्लिम बहुल क्षेत्र 'नूंह', देश के सबसे पिछड़े जिलों की सूची में शामिल रहा है।
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लोकसभा चुनाव 2024। - फोटो : अमर उजाला


करीब 1200 गांवों में सवा लाख मेव बसाए गए

इस लोकसभा क्षेत्र में तीन जिले, गुरुग्राम, नूंह और रेवाड़ी आते हैं। नूंह और उसके आसपास का क्षेत्र, जिसे 'मेवात' कहा जाता है, उसकी कहानी अलग है। नीति आयोग की रिपोर्ट में मेव मुस्लिम बहुल क्षेत्र 'नूंह', देश के सबसे पिछड़े जिलों की सूची में शामिल रहा है। यहां रहने वाले मुसलमानों को मेव बोला जाता है। दरअसल ये मेव, 11वीं सदी के राजपूत वंश से निकले हैं। इनमें कुछ जाट, गुर्जर और मीणा समुदाय के लोग भी हैं। बहुत से लोग खुद को कन्हैया जी और रामचंद्र जी के वंशज बताते हैं। मोईनुद्दीन चिश्ती के समय यहां धर्म परिवर्तन हुआ था। वेदों में यकीन रखने वाले अनेक लोगों ने जब कलमा पढ़ा, तो उन्हें मुस्लिम घोषित कर दिया गया। बाद में, इन लोगों को कई तरह की परंपराओं का निर्वहन करने में दिक्कतें आईं। मुस्लिम इन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। ऐसे में इनका एक अलग समुदाय बना दिया गया, तब वे लोग मेव बन गए। उस वक्त रायसीना से लेकर खनवा तक करीब 1200 गांवों में सवा लाख 'मेव' बसा दिए गए थे।


मेव मुस्लिमों की तादाद, लगभग 19 फीसदी है

दिल्ली-एनसीआर में शामिल इस लोकसभा क्षेत्र में 25 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं। मेव मुस्लिमों की तादाद, लगभग 19 फीसदी है। दूसरे नंबर पर अहीर आबादी है। इनकी संख्या 17 फीसदी बताई जाती है। अधिकांश मेव, नूंह के आसपास हैं, जबकि अहीर आबादी गुरुग्राम, नूंह और रेवाड़ी जिलों में है। इसके बाद जाटों का नंबर, करीब 'आठ फीसदी' आता है। अनुसूचित जाति के समुदाय की संख्या करीब 15 फीसदी है। इनके अलावा ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, पंजाबी एवं अन्य जातियां भी गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में निवास करती हैं। गुरुग्राम में निजी कंपनी में काम करने वाले दीपक सैनी बताते हैं, देखिये यहां पर शहर और गांव की अपनी समस्याएं हैं। शहर में ट्रैफिक, ड्रेनेज की समस्या है, मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां पर दूसरे राज्यों से आकर लोग, बस रहे हैं। कुछ समय पहले तक जहां खेत खलियान नजर आते थे, वहां ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बन रही हैं। नियमों की अनदेखी हो रही है। केंद्र में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे और द्वारका एक्सप्रेस-वे के निर्माण का श्रेय लेते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गत फरवरी में एम्स, रेवाड़ी की आधारशिला रखी थी।


चुनाव प्रचार में जुटी हैं दोनों उम्मीदवारों की बेटियां

कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर को बाहरी उम्मीदवार होने का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनकी बेटी जूही बब्बर और दामाद भी चुनाव प्रचार में जुटे हैं। वे लोगों से कह रहे हैं, राज बब्बर 'बाहरी' नहीं हैं। वे यहां की समस्याओं को जानते हैं। उन्हें समाधान भी मालूम है। दूसरी तरफ, राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव भी चुनाव प्रचार में सक्रिय हैं। वे अपनी जनसभाओं में वोटरों से 'हरियाणवी खून' पर मतदान करने की अपील कर रही हैं। कांग्रेस में गुटबाजी, राज बब्बर के लिए मुश्किल का सबब बन रही है। पूर्व मंत्री और छह बार के विधायक कैप्टन अजय यादव, यहां से टिकट के प्रबल दावेदार थे। कांग्रेस ने उनके स्थान पर बब्बर को मैदान में उतार दिया। इसके पीछे कांग्रेस का मकसद, गैर-यादव मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट करना था। राज बब्बर, लोगों से बेहतर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का वादा कर रहे हैं। वे लोगों से कहते हैं, उन्हें मालूम है कि कहां पर स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, सड़कें और फ्लाईओवर चाहिए। बतौर राज बब्बर, ट्रैफिक और जलभराव की समस्या से कैसे निपटना है, यह बात अच्छी तरह जानते हैं। वे लोगों से कानून-व्यवस्था में सुधार का वादा करते हैं। उन्होंने इंद्रजीत पर 'राजनीतिक अवसरवादिता' का आरोप लगाया। राव इंद्रजीत को मौसम वैज्ञानिक और राजा साहब तक कह दिया।


इस चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दा नहीं देखते

जजपा ने यहां पर राव इंद्रजीत की राह को मुश्किल बनाने का कार्य किया है। उसने बॉलीवुड रैपर, राहुल फाजिलपुरिया को टिकट दिया है। राहुल ने 2016 में आई फिल्म 'कपूर एंड संस' के गाने 'कर गई चुल्ल' में अपनी आवाज दी थी। खास बात है कि राहुल फाजिलपुरिया अहीर जाति से हैं। ऐसे में वे अहीर समुदाय के जितने भी वोट लेते हैं, उससे इंद्रजीत के वोटों में ही सेंध लगेगी। गुरुग्राम के रहने वाले सूरजपाल सिंह कहते हैं, वैसे तो लोकसभा चुनाव देश के मुद्दों पर होता है। यहां स्थिति थोड़ी उलट है। गुरुग्राम आईटी का हब है। यहां पर गूगल जैसी कई वैश्विक कंपनियों के दफ्तर हैं। लोगों के सामने अनगिनत समस्याएं हैं। इसी वजह से यहां के लोग, इस चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दा नहीं देखते। वे उसी उम्मीदवार का समर्थन करते हैं, जो उनकी समस्याओं का निदान करे।


लोग अपने मन से ही वोट देंगे

अभी यहां पर शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे सरकारी संस्थानों का अभाव है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी और अस्पताल हैं, लेकिन इनकी फीस आम लोगों के दायरे से बाहर है। लोग सोचते हैं, रोड अच्छी हों, जाम न लगे और जल भराव की समस्या का हल हो जाए, उनके लिए ये तो यही मुद्दे अहम हैं। मोहसिन बताते हैं, मेवात का इलाका अभी विकास के क्षेत्र में पिछड़ा है। ये बात तो नीति आयोग भी कहता है। एसएचकेएम मेडिकल कॉलेज है। क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों की भारी कमी है। यहां के युवा, साइबर अपराध में शामिल हो रहे हैं। कोई बड़ा उद्योग नहीं है। कोरोना के दौरान यहां के लोगों को बदनाम किया गया। उसके बाद नूंह का दंगा हुआ। उसमें एक तरफा कार्रवाई की बात सामने आई। लोकसभा चुनाव में लोग उसी पार्टी के पक्ष में मतदान करेंगे, जो क्षेत्र में शांति बहाल करे। यहां के युवाओं के लिए सोचे। मेव समुदाय से जुड़े कई बड़े नाम, जिनमें आजाद मोहम्मद और जाकिर हुसैन आदि शामिल हैं, वे भाजपा में आ चुके हैं। इस बाबत मोहसिन का कहना था, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। लोग अपने मन से ही वोट देंगे।


राष्ट्रीय मुद्दों पर वोट नहीं करेंगे

चुनाव प्रचार में जातिगत और धार्मिक समीकरणों को भुनाने का खूब प्रयास हो रहा है। भाजपा प्रत्याशी को भरोसा है कि उसे यादवों और गैर यादवों का बड़ा समर्थन मिलेगा। मेवों के वोट भी आएंगे। कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर, ये मानकर चल रहे हैं कि यहां के लोग, राष्ट्रीय मुद्दों पर वोट नहीं करेंगे। वे स्थानीय समस्याओं को देखेंगे। इसके अलावा, बब्बर को मुस्लिम समुदाय पर पूरा भरोसा है। वे गैर-यादवों में भी पैठ बनाने का दावा करते हैं। कांग्रेस प्रत्याशी को लगता है कि उसे यादव समुदाय से थोड़ा बहुत समर्थन मिल जाए, तो वह राव इंद्रजीत को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। वजह, मेव और गैर यादवों से बब्बर को बड़े समर्थन की उम्मीद है।
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वोटरों की संख्या 25 लाख के पार

गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में कुल नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। नूंह जिले की तीन विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। रेवाड़ी जिले की दो विधानसभा सीटें, बावल और रेवाड़ी, गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में शामिल हैं। इनमें से एक सीट पर कांग्रेस और एक पर भाजपा का कब्जा है। गुरुग्राम जिले में चार विधानसभा सीट हैं। इनमें पटौदी, गुड़गांव और सोहना विधासभा सीट पर भाजपा का कब्जा है, जबकि बादशाहपुर सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई थी। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, छठी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने इससे पहले के सभी चुनाव जीते हैं। राज बब्बर भी छठीं बार संसद में पहुंचने के लिए प्रयासरत हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें, तो गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में 21,39,788 मतदाता थे। इसमें 11,35,004 पुरुष व 10,04,749 महिला मतदाता थे। इस बार वोटरों की संख्या 25 लाख के पार जा चुकी है।

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