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Lok Sabha Elections : बड़े मुद्दों पर दिल्ली की आधी आबादी करती है ज्यादा वोट, कई चुनाव में पुरुषों से भी आगे

Sun, 31 Mar 2024 06:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली

सार

बड़े मुद्दों पर लड़े गए चुनावों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। अब तक महिलाओं ने सबसे ज्यादा वोट भारत-चीन संकटकाल के तीसरे आम चुनाव में मतदान किया। इसमें महिलाएं पुरुषों से आगे रहीं।
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सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की आधी आबादी की सियासी चाल चुनाव-दर-चुनाव बदलती रही है। बड़े मुद्दों पर लड़े गए चुनावों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। अब तक महिलाओं ने सबसे ज्यादा वोट भारत-चीन संकटकाल के तीसरे आम चुनाव में मतदान किया। इसमें महिलाएं पुरुषों से आगे रहीं। वहीं, आपातकाल के बाद के आम चुनाव में 70 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसके अलावा हुए चुनावों में महिलाओं की प्रतिक्रिया सामान्य रही। वर्ष 1991-2009 के बीच के सभी आम चुनावों में आधी आबादी ने 50 फीसदी से भी कम वोट किया। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की वोटिंग में उतार-चढ़ाव राज्य की प्रकृति को भी दिखाता है। 

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आंकड़ों पर गौर करें तो भारत-चीन संकटकाल के दौर में 1962 के आम चुनाव में महिलाओं का 71.71 प्रतिशत व पुरुष मतदाताओं का 65.82 प्रतिशत मतदान रहा था। 1967 के चुनाव में भी महिलाएं पुरुष मतदाताओं से करीब दो प्रतिशत आगे रही थीं। आपातकाल के बाद भी वोटिंग प्रतिशत ज्यादा रहा। 1977 के समय जहां पुरुषों का मत प्रतिशत 71.88 प्रतिशत था, वहीं महिलाओं का मत प्रतिशत 70.57 प्रतिशत रहा था। 1984 के चुनाव में जहां पुरुषों का मतदान प्रतिशत 64.21 था तो वहीं महिलाओं का 64.83 प्रतिशत था। इसी तरह 1996 के लोकसभा चुनाव में भी महिलाओं का मत प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले महज 1.48 प्रतिशत ही कम था। जबकि प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या कम है। 

कोई भी सरकार महिलाओं को उपेक्षित नहीं कर सकती
भारतीय समाज में महिलाएं बराबरी की हकदार नहीं रही हैं। ऐसे में अगर शासन की प्रकृति लोक कल्याणकारी होगी और राज्य उपेक्षित वर्ग के लिए लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाएगा तो महिलाएं ज्यादा वोट करेंगी। इसके उलट होने पर महिलाओं की चुनाव के प्रति प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक नहीं रहेगी। वर्ष 1991-2009 का काल उदारवाद और नव उदारवाद का था, तभी वोटिंग प्रतिशत यहां कम रहा। उससे पहले सरकारें अलग-अलग योजनाओं से उपेक्षित तबके के लिए योजनाएं चलाती थीं। वर्ष 2010 और उसके बाद महिलाओं को लक्षित करके कई योजनाएं चलाई गई हैं। इसका नतीजा दिल्ली में वोटिंग पैटर्न पर दिखा है। पूरे देश में 12 राज्यों में आज महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से ज्यादा है। इन राज्यों में 113 लोकसभा सीटें हैं। ऐसे में आज कोई भी सरकार महिलाओं को उपेक्षित नहीं कर सकती। 
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- प्रो. चंद्रचूड़ सिंह, राजनीति विभाग, डीयू व राजनीतिक विश्लेषक 
 

53 वर्ष बाद सुधरे हालात

साल-दर-साल का सिलसिला - फोटो : अमर उजाला
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव के बाद से 47 वर्षों से महिला मतदाताओं का लिंगानुपात बढ़ा है, इसलिए मतदान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन दिल्ली में महिला मतदाताओं का लिंगानुपात सबसे अधिक वर्ष 1971 में ही था, तब एक हजार पुरुष मतदाताओं पर 850 महिला मतदाता थीं। इसके 53 वर्ष बाद अब वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली में एक हजार पुरुष मतदाताओं पर 843 महिला मतदाता हैं। वर्ष 1971 के चुनाव में दिल्ली में सिर्फ 20,16,396 मतदाता थे। इसमें से 10,89,736 पुरुष और 9,26,660 महिला मतदाता थीं।

2024 में सातों सीटों पर महिलाएं
बीते लोकसभा चुनाव में दिल्ली में महिला मतदाताओं का लिंगानुपात 818 था, जो देश में सबसे कम था। दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश व हरियाणा में लिंगानुपात कम था। इस बार भी दिल्ली में लिंगानुपात सबसे कम है। हालांकि, पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार एक हजार पुरुष मतदाताओं की संख्या पर महिला मतदाताओं की संख्या 25 बढ़ी है।

इस वर्ष महिला मतदाता बढ़ीं
दिल्ली में इस बार पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले मतदाताओं की संख्या 2.72 प्रतिशत बढ़ी है। खास बात यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या ज्यादा बढ़ी है, इसलिए इस चुनाव में दिल्ली में महिला मतदाताओं की भागीदारी अधिक होगी। पिछले चुनाव मेंं दिल्ली में 1,43,27,649 मतदाता थे। इसमें से 60.6 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया था। 

इस बार दिल्ली में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 1,47,18,119 हो गई है। इससे दिल्ली में पांच वर्षों में करीब चार लाख मतदाता बढ़े हैं। इन बढ़े हुए मतदाताओं में 73.25 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस वजह से पिछले लोकसभा के मुकाबले इस बार महिला मतदाताओं की संख्या 2.86 लाख से ज्यादा हो गई है, इसलिए इस चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी अहम होगी।
 

सियासी किस्से : पत्नी के पैर छूकर वोट मांगा

चुनाव के दौरान जेपी अग्रवाल file pic - फोटो : अमर उजाला
चुनाव प्रचार के दौरान कई बार अजीबो-गरीब हालात पैदा हो जाते हैं। वर्ष 1989 चुनाव का वाकया याद आता है। मैं चांदनी चौक से चुनाव लड़ रहा था। कांग्रेस के खिलाफ विपक्ष की चल रही मुहिम के बीच दोबारा सीट बचाने की चुनौती थी। उस समय प्रचार के अत्याधुनिक साधन नहीं थे। ऐसे में सुबह ही चुनाव प्रचार के लिए निकल जाता था। गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले भागदौड़ चलती रहती थी। वोटिंग के दो-तीन दिन पहले की बात है।

प्रचार के आखिरी दिनों में ज्यादा से ज्यादा वोटर तक पहुंचने की कोशिश रहती थी। उस दिन हुआ यह कि देर शाम तक बैठकों का दौर चला। इसके बाद लोगों से मुलाकात को जो सिलसिला शुरू हुआ वो रात दो बजे तक चलता रहा। इसके बाद घर लौटने की बारी आई। रात ढाई बजे के घर पहुंचा। एक-दो सहयोगी छोड़ने आए थे। उन्हें बाहर से विदा किया और डोर वेल बजाकर गेट खुलने का इंतजार करने लगा। इस बीच मैं भूल सा गया कि अपने घर पर खड़ा हूं।

वोट मांगने की आदत ऐसी पड़ी कि सामने खड़ी पत्नी भी वोटर नजर आईं। मैंने उनके पैर छुए और खुद को वोट देने की अपील की। मेरे इस व्यवहार से पत्नी हड़बड़ा गईं। उन्होंने सवाल किया कि अरे यह क्या रहे हो आप? पत्नी की आवाज सुनकर समझ गया कि गड़बड़ हो गई है। फिर, हम दोनों मुस्कुराते हुए हुए घर में दाखिल हुए। बहरहाल, इस सबके बीच दूसरी बार संसद पहुंचने में कामयाब रहा। बाद में कभी-कभार पत्नी चुटकी लेती कि जब मेरा आशीर्वाद मिल गया था, तो कौन चुनाव हरा सकता था। 
(जैसा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश अग्रवाल ने बताया)

 
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सोशल मीडिया से...सरकारी अस्पताल पर छिड़ी बहस

दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर छाया रहा। यूजर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा आज सुबह पापा के इलाज के लिए एक सरकारी अस्पताल में गई। यहां सब कुछ सुव्यवस्थित था। लगभग एक निजी अस्पताल की तरह। वीडियो को देखकर लोग प्रभावित हुए और तरह-तरह की प्रतिक्रिया देते रहे।

एक यूजर ने लिखा अगर दिल्ली में इतने ही अच्छे अस्पताल होते तो राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की आंख की सर्जरी भी  यहीं हो जाती। दूसरे यूजर ने कहा कि दिल्ली के सभी विधायक सरकारी अस्पतालों की जगह अपोलो जैसे दूसरे निजी अस्पतालों में जाते हैं और आप इंटरनेट पर ढोंग कर रहे हैं।

वहीं, एक अन्य यूजर ने हंसते हुआ लिखा कि ऐसी वीडियो इंटरनेट पर मत डाला करिए, वरना उपराज्यपाल इस पर भी रोक लगा देंगे। हजारों की संख्या में लाइक शेयर मिलने के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर दिनभर चक्कर लगाता रहा। वायरल अस्पताल को जनकपुरी का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल 
बताया जा रहा है।
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